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October 15, 2026
26jan
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अप्रैल 2022। अमृतसर। साहित्य में अनुवाद का काम न केवल दो भाषाओं को नजदीक लाता है अपितु दो संस्कृतियों को भी पोषित करता है। ये बात गुरु नानक देव विश्व विद्यालय के पंजाबी विभाग में साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की और से आयोजित पंजाबी – राजस्थानी कहानी अनुवाद कार्यशाला में बोलते हुए डीन प्रो. सरबजोत सिंह बहल ने कही।
इस कार्यशाला में पंजाबी लेखक राजस्थानी की और राजस्थानी लेखक पंजाबी कहानियों का अनुवाद कर रहे हैं। कार्यशाला को शुरू करते हुए बहल ने कहा कि अनुवाद बड़ा कठिन काम है, केवल शरीर का इसमें बदलाव नहीं होता अपितु आत्मा तक पहुंचना पड़ता है। बहल ने अपनी कुछ हिंदी रचनाएं भी सुनाई।
विवि के पंजाबी विभाग के विभागाध्यक्ष और कार्यशाला संयोजक मनजिंदर सिंह ने बताया कि विवि के लिए सार्थक आयोजन है, क्योंकि ये काम हमारी परंपरा में शामिल है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में 20 कहानियों का अनुवाद होगा। पंजाबी साहित्यकार रवैल सिंह ने बताया कि अनुवाद का साहित्य में खास स्थान है। इसके जरिये ही हम एक भाषा से दूसरी भाषा में जाते हैं। पंजाबी भाषा कन्वीनर, साहित्य अकादमी डॉ वनिता मनचंदा ने कहा कि पंजाबी कहानी ने भारतीय साहित्य में खास स्थान बनाया है, हमारी कहानियां राजस्थानी में जाये, ये बड़ा महत्ती कार्य है।
कार्यशाला निदेशक और राजस्थानी भाषा कन्वीनर मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘ ने अनुवाद को मूल रचना से बड़ा बताते हुए कहा कि बीज का अनुवाद पेड़ है और नदियों का अनुवाद समुद्र। उन्होंने कहा कि रचना और अनुवाद वर्तमान को जीते हैं मगर अतीत साथ रहता है, नजर भविष्य पर रहती है। उन्होंने कार्यशाला की पूरी रूपरेखा बताई। आयोजन में डॉ रममिन्द्र कौर, हरिंदर सोहेल, बलजीत कौर, मेघा सलमान, कँवलदीप, हरिंदर सिंह आदि उपस्थित थे।
पंजाबी काव्य लूणा का अनुवाद विमोचित
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आयोजन में पंजाबी काव्य ‘ लूणा ‘ के हरिमोहन सारस्वत द्वारा किये राजस्थानी अनुवाद की पुस्तक का लोकार्पण भी डीन बहल, मधु आचार्य, रवैल सिंह, डॉ वनिता और मनजिंदर सिंह ने किया। इस पुस्तक को साहित्य अकादमी ने प्रकाशित किया है।
कार्यशाला का पहला दिन
पहले दिन में अनुदित हुई पंजाबी और राजस्थानी कहानियों का अनुवाद और वाचन किया गया। अनुवाद में आई खास स्थितियों की चर्चा की गई। ये पहली अनूठी कार्यशाला है जिसमें अनुवाद के मूल सिद्धांतों के साथ अनुवाद के लिए आई कहानियों के शब्द, भाव और लय पर भी चर्चा हो रही है।
कार्यशाला के भागीदार
इस कार्यशाला में राजस्थानी के डॉ मंगत बादल, राजेन्द्र जोशी, सीमा भाटी, संतोष चौधरी और हरिमोहन सारस्वत पंजाबी कहानियों का अनुवाद कर रहे हैं। वहीं डॉ वनिता, रवैल सिंह, मनजिंदर सिंह, देशराज काली और सुरिंदर नीर राजस्थानी कहानियों का अनुवाद कर रहे हैं। कार्यशाला निदेशक मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘ हैं।