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October 17, 2026
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तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद भी किसानों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा नहीं है। अपना धरना, आंदोलन जारी रखा है। केंद्र सरकार किसानों को सही तरह से पढ़ नहीं पाई, ये अब राजनीति के जानकारों को साफ साफ लगने लगा है। सड़कों से घर जाने के स्थान पर उसने तो आज लखनऊ में बड़ी किसान महापंचायत का निर्णय लेकर सबको अचंभे में डाल दिया है।
किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद ही कह दिया कि ये तो घोषणा है, कानून वापस तो संसद में लिए जायेंगे। तब तक हम सड़कों से नहीं हटेंगे। बात भरोसे में सच की हो गई। जबकि सरकार ने सोचा, घोषणा होते ही किसान घरों को लौट जायेंगे।
सरकार को तो यूपी चुनावों में उतरने की जल्दी है, इसलिए अपने हिसाब से कयास लगा परिणाम भी तय कर लिए मगर किसान ने अपने तेवर बदल केंद्र सरकार को सकते में डाल दिया। किसान संगठनों ने आंदोलन समाप्ति में जल्दबाजी नहीं दिखाई, सरकार को तभी समझ जाना चाहिए था, मगर वो अंजान रही।
किसानों ने एमएसपी पर कानून बनाने, किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने, आंदोलन में मरे किसानों को मुवावजा देने सहित छह मांगे रख नया फ्रंट खोल दिया।
भाजपा नेताओं के लिए ये बड़ा चैलेंज हो गया और आदत के अनुसार उन्होंने धड़ाधड़ अर्थहीन बयान दे दिए जो किसानों को उकसाने वाले थे। यहां तक कह दिया गया कि जरूरत पड़ने पर ये कृषि कानून वापस लाये जा सकते हैं। इतनी राजनीति तो किसान भी समझता है। उसने सोमवार को लखनऊ में बड़ी किसान महापंचायत की घोषणा कर दी, भाजपा को लगा कि फिर चूक हो गई। यूपी चुनाव को देखते हुए ही तो कानून वापसी का निर्णय किया था। राजनीति में निर्णय की देरी इसी तरह की परेशानियां खड़ी करती है।
आज की किसान महापंचायत में किसान जो निर्णय लेगा, वे निर्णय भाजपा की चुनावी राजनीति पर भी असर डालेंगे।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार