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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जुन 2024। शराब बिक्री के टारगेट पूरे करने में जुटे आबकारी विभाग के क्षेत्र में अजीबोगरीब कारनामे सामने आ रहे है। यहां गांव धीरदेसर चोटियान के ग्रामीण सामूहिक रूप से शराब की अवैध ब्रांच के खिलाफ हुए तो विभाग ने गांव में शराब बिक्री जारी रखने के लिए अधिकृत ठेका ही बना दिया। गौरतलब है कि ये कारनाम ग्रामीणों से छुपाकर कागजों में ही किया गया है। अधिकृत ठेका बनाने के करीब तीन माह बीत जाने पर विभाग ठेका खुलवाने पर अड़ गया है। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता श्यामसुंदर आर्य ने बताया कि गांव में आबकारी विभाग की मिली भगत से निकटवर्ती गांव के शराब ठेके की अवैध ब्रांच चल रही थी। गांव में बढ़ते अपराध को देखते हुए ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गत फरवरी में इस अवैध ब्रांच के खिलाफ आंदोलन किया था एवं उसे बंद करवाया गया था। उस समय प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि गांव में अवैध या अधिकृत किसी भी प्रकार का शराब ठेका नहीं खुलेगा। अब कुछ दिन पहले गांव में पुन: शराब की दुकान शुरू हुई तो ग्रामीणों ने पुन: आंदोलन का स्वर तेज किया। इस ब्रांच को अवैध बताते हुए बंद करवाने की मांग की गई। तो विभाग द्वारा कई महिनों पहले अप्रेल में ही ठेका खोल देने की जानकारी दी गई। सरपंच रामचंद्र चोटिया ने बताया कि ग्रामीणों में विभाग के इस कृत्य से खासा रोष व्याप्त है एवं ग्रामीण बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गए है।
विरोध के डर से इतने दिनों तक बंद रखा, ग्रामीण जनमत संग्रह करवाने की राह पर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जुन 2024। आबकारी विभाग द्वारा गांव धीरदेसर चोटियान में भले ही गत अप्रैल से ही ठेका संचालित होने का दावा कर रहा हो लेकिन वास्तविकता यह है कि ग्रामीणों के विरोध के डर से इतने दिनों तक ठेका बंद ही रखा गया था। अब ठेका खोल कर संचालन किया गया तो ग्रामीणों को यही लगा कि पुन: अवैध ब्रांच ही संचालित हो रही है। ऐसे में ग्रामीणों द्वारा विरोध किया गया तो पता चला कि गांव में शराबबंदी के विरोध में यह रास्ते निकाले गए है। ऐसे में ग्रामीण अब बड़े आंदोलन एवं जनमत संग्रह करवा कर स्थाई रूप से गांव में शराब बंदी की तैयारियां करने में जुट गए है।
“आबकारी विभाग को केवल अपनी शराब बेचने और पैसे कमाने से मतलब है। इसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकते है। यह बेहूदा है कि विभाग ने गांव में स्कूल के पास अपनी लोकेशन गुप-चुप में पारित कर ली। गांव में ठेके व शराब के कारण युवा अपराध की ओर बढ़ रहे है। वहीं महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा भी खतरे में है।” – श्यामसुदंर आर्य, अध्यक्ष महर्षि दयांनद छात्रावास विकास समिति, श्रीडूंगरगढ़।

“ग्राम पंचायतों के समूह का ठेका होता है, जिसमें लोकेशन स्वीकृति ठेकेदार द्वारा अपने हिसाब से करवाई जाती है। ग्राम पंचायत धीरदेसर चोटियान का ठेका नहीं बल्कि ग्राम पंचायतों के समूह का ठेका है, जिसकी लोकेशन धीरदेसर चोटियान रखी गई है। ठेका अधिकृत है एवं सरकारी नियमों के तहत ही संचालन किया जा रहा है।“- राकेश खत्री, आबकारी निरीक्षक, बीकानेर।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंगलवार को सरपंच रामेश्वरलाल चोटिया व एडवोकेट श्यामसुंदर आर्य सहित ग्रामीण संभागीय आयुक्त के यहां पेश हुए, जताया विरोध।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंगलवार को ग्रामीण उपखंड अधिकारी सहित जिला कलेक्टर, आबकारी अधिकारी से भी मिले और अपनी आपत्ति जताई।