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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 अक्टूबर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 का मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 27 दिन शेष है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत की जा रही है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की टिप्पणी।

बोल अलख…. आगे आगे गोरख जागे..।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। “बोल अलख.. आगे आगे गोरख जागे” ये शब्द सामान्य तौर पर निर्विकार भावों वाले साधुओं से तो अक्सर सभी ने सुनें होगें लेकिन इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की टिकट को लेकर फंसे पेंच के कारण क्षेत्र के सभी पार्टियों, सभी गुटों के नेता भी अपने कार्यकर्ताओं को इसी तर्ज पर आश्वासन दे रहे है। बात भाजपा की तो अभी भाजपा का चुनाव प्रचार जोर नहीं पकड़ पाया है। भाजपा के चुनाव प्रचार को जोर पकड़वाने का सवाल हो या भाजपा प्रत्याशी के सर्मथन में अभी तक नहीं आने वाले भाजपा के विरोधी गुट के पूर्व विधायक एवं पूर्व प्रधान की बगावत होगी या नहीं का सवाल हो। भाजपा बैकग्रांऊड के किसान नेता की सक्रियता, सर्मथन या बगावत के सवाल हो या चाहे कांग्रेस में टिकट के दावेदारों से टिकट मिलने का सवाल हो। इसी क्रम में माकपा से सामने कांग्रेस का प्रत्याशी होने या समझौता होने का सवाल हो, सभी सवालों का सभी नेताओं द्वारा इन दिनों एक ही जवाब दिया जा रहा है कि आगे-आगे गोरख जागे। कहने का भाव इतना सा है कि श्रीडूंगरगढ़ की राजनीति में अभी सब कुछ अनिश्चित सा नजर आ है और भाजपा में बागी हो या ना हों, कांग्रेस के दावेदारों को टिकट मिले तो क्या करना एवं नहीं मिले तो आरएलपी का दामन थामेंगें या नहीं…?, जेजेपी, आरएलपी मैदान में हो या ना हो, इन सभी पर पिक्चर साफ होने में अभी समय लगने वाला है।

दर्द की साझेदारी नहीं पर खुशियों में दावेदारी, बन रही है डायरी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। “करनी है तो मेरे दर्द की साझेदारी कर ले, मेरी खुशियों के तो दावेदार बहुत है” इस शेर के साथ इन दिनों क्षेत्र के नेता सीधे शब्दों में उन कार्यकर्ताओं की टोह ले रहे है जो अभी सक्रिय नहीं हुए है। हालांकि इस प्रकार के ये कार्यकर्ता अपने नेता के जीतने के बाद बजने वाले ढ़ोल पर सबसे पहले नाचते है लेकिन अभी कोई जिम्मेदारी ना मिल जाए इसलिए अपने नेताओं को बाहर से सर्मथन देने का उपक्रम चलाए हुए है। अभी तक ऐसे कार्यकर्ता भाजपा एवं माकपा दोनो जगहों पर दिख रहे है एवं ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम भी नेताओं की विशेष डायरी में लिखे जा रहे है कि अगर जीत गए तो इन्हें सत्ता का साथ कितना देना है।

हनुमान और रावण का गठजोड़ के बाद कयासों के बाजार गर्म।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल एवं आजाद समाज पार्टी के सुप्रीमो चंद्रशेखर रावण के बीच हुए गठबंधन के बाद सोशल मीडिया पर भले ही कितने ही मिम्स बने हो इस गठबंधन ने श्रीडूंगरगढ़ में नई चर्चा छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि इस गठबंधन में श्रीडूंगरगढ़ मूल के एक दलित नेता की भूमिका खासी महत्वपूर्ण रही। ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि सब कुछ सामान्य रहा तो रालोपा द्वारा बोतल के निशान पर इस दलित नेता को भी श्रीडूंगरगढ़ से उम्मीदवारी दी जा सकती है। अब भले ही अपने वजूद को विभिन्न नेताओं, पार्टियों के साथ जोड़ कर बड़ा बनाने की कोशिश में लगे इन दलित नेता का कद इस चुनाव में बढ़ जाए लेकिन यह सीधा सीधा हंसिया हथौडे को कमजोर करेगा। राजनीति में दुश्मन भी कब फायदा कर दे इसका पता नहीं लगता और इसी लाईन की तर्ज पर फूल ब्रांड पार्टी इस गठबंधन से खासी खुश नजर आ रही है।