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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 अगस्त 2025। भले ही चौपाल पर होने वाली आम चर्चा ना हो, भले ही नुक्कड़ की दुकानों या किसी गॉसिप झूंड व दल में होने वाली साधारण चर्चा का हिस्सा ना हो, परंतु शिक्षा जगत से जुडे लोग व जागरूक नागरिकों में ये चर्चा खूब हो रही है। आप भी जरूर पढें व जाने समझे पूरी खबर।
स्कूटी देना किया बंद, पुरस्कार राशि घटाई।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। राज्य सरकार ने जिला स्तर पर टॉप करने वाली बेटियों की पुरस्कार राशि में 15 से 25 हजार रूपए तक की कटौती की है, वहीं स्कूटी योजना भी बंद कर दी गई है। बीते शनिवार शिक्षा विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए है। इस आदेश के बाद आमजन में इस सरकारी फरमान को लेकर नाराजगी दिखाई देने लगी है। वहीं बेटियों की आवाज कौन बुलंद करेगा.? पर भी सवाल उठ रहें है। अनेक जागरूक ग्रामीणों ने “बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ” का नारा देने वाली सरकार पर बेटी के पुरस्कारों पर ही डाका डालने की बात कह रहें है। फैसला तुगलकी फरमान करार देते हुए क्षेत्र के शिक्षाविदो ने भी नाराजगी जताई है। विदित रहें सरकार ने 8 वीं (शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा) की टॉपर बालिकाओं को पिछले साल 40 हजार रूपए मिले वहीं इस बार उन्हें 25 हजार रूपए मिलेंगे। इसी प्रकार से 10वीं एवं प्रवेशिका में टॉपर को 75 हजार के स्थान पर 50 हजार रूपए तथा 12वीं एवं वरिष्ठ उपाध्याय में 1 लाख रूपए व स्कूटी के स्थान पर केवल 75 हजार रूपए की सहायता दी जाएगी। वहीं स्कूटी नहीं दी जाएगी। भाजपा ने योजना का नाम भी इंदिरा प्रियदर्शिनी अवार्ड से बदल कर पद्माक्षी योजना कर दिया है और ये कार्यक्रम अब 19 नवंबर के स्थान पर बसंत पंचमी पर आयोजित होगा।
शिक्षाविदों ने कहा घोर निराशजनक, आमजन में भी नाराजगी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बेटियों ! इनसे उम्मीद ना रखना ये सियासत वाले है ! ये कहते हुए इस मामले में क्षेत्र के शिक्षाविदों ने तो सरकार को आड़े हाथों लिया है। शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि ये सरासर बालिकाओं पर अन्याय है। ये उनके शिक्षण को प्रभावित करेगी और सकरार की दुर्बलता है कि सरकार बालिका हित की योजनाएं बंद कर रही है। गांव मोमासर व श्रीडूंगरगढ़ शहर से कई जागरूक महिलाओं ने कहा कि सांसद, विधायक, या किसी कर्मचारी के वेतन भत्ते में कटौती करके देखें सरकार तो पता चले, ये बेटियों को मिलने वाली राशि को बढ़ाने के बजाए कम कर सरकार आर्थिक ही नहीं नैतिक दुर्बलता का ही परिचय दिया है। जागरूक महिलाओं ने इसे बालिकाओं के आत्मविश्वास व उनके सम्मान पर सीधी चोट बताते हुए कहा कि ग्रामीण अंचल में आज भी सामाजिक व पारिवारिक चुनौतियों के बीच बेटियां इन योजनाओं से प्रोत्साहित हो रही थी। वे पढ़ लिखकर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मेहनत करती और ये पुरस्कार उनकी मेहनत व लगन का परिणाम था। इसे बंद करना घोर निराशाजनक है जो सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के विपरित भी है। मोमासर के बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के प्रयासों में जुटे जागरूक नागरिक पवन सैनी ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में आम बालिकाएं इससे निराश हो रही है। आमजन का आरोप है कि नाम या पुरस्कार देने की तिथि को कांग्रेस अपने व भाजपा अपने हिसाब से बदलती रही है। परंतु राशि कम करना व स्कूटी बंद करना समाज में बालिका शिक्षा के लिए खराब असर छोड़ेगा। क्षेत्र के शिक्षाविदों ने कहा ये:-