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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अक्टूबर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 का मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 25 दिन शेष है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत की जा रही है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जाएगी। इसी क्रम में पढ़ें आज की टिप्पणी।

खामोशी में छिप गए शोर को सुनो..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अक्टूबर 2023। खामोशी में भी बड़ा शोर छिपा होता है, किसी दार्शनिक द्वारा व्यक्ति के मन पर कही यह बात इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ में फुलब्राण्ड पार्टी के प्रचार के लिए भी कही जा रही है। यहां देश पर राज कर रही पार्टी की टिकट को घोषित हुए 20 दिन निकल गए हैं और इन 20 दिनों में इस खेमे में छाई खामोशी की चर्चा सबने सुनी। लेकिन सोमवार को कार्यालय उदघाटन के मौके पर बिना कोई वाहन दिए, बिना किसी सभा के आह्वान पर बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने से खामोशी की चर्चा में छिपे शोर को सब तक सुना दिया। दबे स्वर में अब आत्मविश्वास से लबरेज आवाजें भी सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ की हवाओं में सुनी गई कि 20 दिनों की खामोशी का असल शोर आगामी 2 तारीख को भाजपा प्रत्याशी के नामांकन के दौरान सुनने को मिलेगा।

धीरे-धीरे से मेरे कार्यालय में आना.. धीरे-धीरे विरोध का मिट जाना..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना, धीरे-धीरे से दिल को चुराना.. यह प्रसिद्ध हिंदी गाना तो पाठकों ने खूब सुना होगा। लेकिन सोमवार को इस गाने की तर्ज पर फूल-ब्रांड पार्टी के कार्यालय उदघाटन के मौके पर टिकट के विरोधी भी धीरे धीरे कार्यालय में आते और धीरे धीरे नाराजगी मिटाते नजर आए। यहां पूर्व विधायक खेमे से उनके पौत्र व आन बान शान वाले खेमे के सरपंच व अन्य लोग भी उद्घाटन समारोह में नजर आए। इनकी मौजूदगी से कयास लगने शुरू हो गए हैं कि टिकट के विरोध में इन दोनों ही खेमों के मुखिया भी जल्द ही नाराजगी छोड़ सकते हैं।

सोशल मीडिया पर जोर, खींचो अपनी ओर..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के चुनावों में अभी तक बड़े शहरों, बड़े नेताओं के चुनाव की तर्ज पर सोशल मीडिया के लिए कोई कंपनियों की सेवा तो नहीं ली जा रही लेकिन फिर भी इन कंपनियों के काम को यहां समर्थकों की ताकत से पूरा करने के प्रयास किए जा रहें है। सोशल मीडिया पर किसी एक नेता की पोस्ट, लाइव, वाल पर आक्रामक रुख अपनाए हुए ये कार्यकर्ता बड़े जोर खाए हुए हैं। लेकिन इस जोर खाने के दौर में अपनी ओर खींचने का क्रम भी शुरू हो गया है। सुना जा रहा है कि एक दूसरी पार्टी के सोशल मीडिया पर एक्स्ट्रा एक्टिव युवा समर्थकों को अपनी ओर खींचने के लिए कम्पनी सिस्टम का प्रयास भी किया जा रहा है। अब नकदी भारी रहेगी या समर्थन का जोश यह तो सोशल मीडिया पर आक्रामक ये युवा ही तय करेंगे।