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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 फरवरी 2024। श्रीडूंगरगढ़ का राजकीय बेगराज सोमाणी नेत्र चिकित्सालय पूरे प्रदेश में उपखंड स्तरीय एकमात्र चिकित्सालय है और इसकी कीर्ति ऐसी रही है कि प्रति वर्ष सैंकड़ो मरीजों की आंखों को यहां रोशनी मिली है। कुछ समय पहले जहां यह चिकित्सालय ना केवल श्रीडूंगरगढ़ बल्कि आस-पास के सैंकड़ों गांवों, आस-पास के उपखण्डों और पड़ोसी जिलों में सरकारी स्तर पर उच्च स्तरीय मोतियाबिंद आपरेशन के लिए विख्यात था। वहीं अब हालात यह है कि यहां पर आपरेशन नहीं हो पाने का टैग लगने के कारण नेत्र रोगियों में यह कुख्यात भी हो रहा है। साल भर में यहां करीब 800 नेत्र रोगियों के निःशुल्क आपरेशन सरकारी स्तर पर एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से होते रहें है। परंतु प्रशासनिक उदासीनता के कारण पिछले छह माह से यहां एक भी आपरेशन नहीं हुआ है। पढ़ें पूरी खबर विस्तार से।
सैंकड़ों नर्सिंगकर्मियों का बेड़ा, लेकिन अधिकारियों की आंखें बंद, दे दी जनता को लूटने की छूट।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ ब्लाक में ब्लाक सीएमएचओ के अधीन 84 एएनएम, 12 जीएनएम का स्टाफ है जिन्हें विभिन्न जगहों पर तैनात किया हुआ है। इनके अतिरिक्त उपजिला चिकित्सालय, मोमासर सीएचसी में नर्सिंगकर्मियों की संख्या भी जोड़ ली जाए तो श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में 125 से अधिक नर्सिंगकर्मी वर्तमान में तैनात है। इतने बड़े कार्मिकों के बेड़े के बाद भी नेत्र चिकित्सालय में एक भी नर्सिंगकर्मी की तैनाती नहीं होने के कारण अधिकारियों की नियत पर सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्र में एकमात्र नेत्र चिकित्सालय होने एवं यहां भी मोतियाबिंद के आपरेशन होने बंद हो जाने के कारण गत एक वर्ष में कम से कम 1 हजार से अधिक रोगियों को निजी चिकित्सालयों में अपने आपरेशन करवाने पड़े है। अब औसतन 25 हजार रुपए का खर्च भी एक आपरेशन का मानें तो श्रीडूंगरगढ़ की जनता के 2.5 करोड़ से अधिक रुपए लूटा दिए गए है। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे रोगी भी है जिनकी आंखें धन के अभाव में निजी चिकित्सालय में मोतियाबिंद का आपरेशन नहीं करवा पाने के कारण अंधी होने की कगार पर है।
दानदाताओं में मायूसी, जनता में आक्रोश, नेताओं से उम्मीद।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ में दानदाताओं द्वारा निर्मित सुविधाओं युक्त ऐसा राजकीय नेत्र चिकित्सालय शायद ही अन्यत्र कहीं मौजूद हो। यहां दानदाता बेगराज सोमाणी परिवार द्वारा करोड़ों की भूमि, भवन व मशीनों की उपलब्धता दी गयी। वहीं दूसरी और मोतियाबिंद के आपरेशन के लिए भी आम जन को बड़ा खर्च नहीं करना पड़े इसलिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी प्रतिवर्ष से लगभग 4 से अधिक बड़े शिविर दानदाताओं की सहायता से सरकार के साथ मिल कर आयोजित किए जाते रहें है। ऐसे में प्रतिवर्ष 1 हजार से अधिक लोगों को मोतियाबिंद आपरेशन की सेवाएं मिल रही थी। लेकिन वर्तमान हालातों में एक भी आपरेशन केवल एक नर्सिंगकर्मी के अभाव में नहीं होने के कारण दानदाताओं, सामाजिक संस्थाओं में मायूसी छा गयी है। वे लगातार जरूरतमंद रोगियों की आंखों की रोशनी देने के लिए जागरूक होकर चिकित्साकर्मी देने की मांग कर रहें है। दूसरी और आम जनता में इससे रोष व्याप्त है व जनता अब क्षेत्र के नेताओं की और उम्मीद की नजर से देख रही है कि चिकित्सा विभाग के अधिकारियों पर नर्सिंगकर्मी तैनात करवाने के लिए दबाव बनाया जावें।

“श्रीडूंगरगढ़ के आंखों के अस्पताल में नर्सिंग कर्मी व एक अन्य डॉक्टर की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य मंत्री से सम्पर्क कर आमजन के लिए राहत का प्रयास किया जाएगा, ऑपरेशन नहीं हो पाने की स्थिति में हजारों लोग परेशान हो रहें है इस हेतु स्थानीय प्रशासन से भी संज्ञान लेने और यहां नर्सिंग कर्मी की नियुक्ति के निर्देश दिए जाएंगे।”
ताराचंद सारस्वत, विधायक, श्रीडूंगरगढ़।

“राज्य भर में चिकित्सकों का अभाव तो है लेकिन नर्सिंगकर्मी के अभाव में चिकित्सालय में चिकित्सा ही बंद होने की कगार पर पहुंच जाए यह तो स्थानीय चिकित्सा अधिकारियों की नाकामी है। इस संबध में कई बार आवाज उठाई गई एवं प्रशासन से भी हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई गई। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही एवं उदासीनता आमजन के हितों पर भारी पड़ रही है।”
जगदीश स्वामी, अध्यक्ष नागरिक विकास परिषद, श्रीडूंगरगढ़।

“जरूरतमंदों की आंखों की रोशनी के लिए क्लब व स्थानीय एनवीपी ने अनेक प्रयास किये है। अब प्रशासनिक स्तर पर प्रयास हो तो ऑपरेशन कार्य पुनः प्रारंभ हो। यहां के अनेक दानदाता जो निःशुल्क शिविरों में सहयोगी बने है निराश हो रहें है और अन्यत्र अस्पतालों में आंखों के शिविर में सहयोग दे रहें है। चिकित्सा विभाग के प्रबंधन को इस पर गंभीरता से विचार करें।”  महावीरप्रसाद माली, कैबिनेट मैम्बर, लॉयन्स क्लब इंटरनेशनल।