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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 जुलाई 2022। उड़ीसा की आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू का देश का राष्ट्रपति बनना लोकतंत्र में बड़ी बात है। एक आदिवासी महिला देश के सर्वोच्च पद पर पहली बार पहुंची है। भारत मे आदिवासी समाज बहुत बड़ा है, मगर पहली बार उस समाज की कोई महिला इस पद पर पहुंची है। वे देश की 75 सालों में केवल दूसरी महिला है जो इस पद के लिए निर्वाचित हुई है। ये बड़ी बात है।
मुर्मू का आदिवासी होना, महिला होना, पहली बार ऐसा हुआ है। आदिवासी समाज के उत्थान का इससे मार्ग खुलेगा वहीं लोकतंत्र के उच्च मानदंड का भी दुनिया को आभाष होगा। मुर्मू के सार्वजनिक व राजनीतिक जीवन का पूरा लाभ देश को मिलेगा। उनके महामहिम पद पर पहुंचने से आम आदमी के भीतर एक विश्वास जगा है, जिसकी वर्तमान समय में जरूरत थी। आम आदमी को इस निर्णय से ये भरोसा होगा कि भारत के लोकतंत्र में कोई भी आम आदमी किसी भी बड़े पद पर पहुंच सकता है।
मुर्मू की उम्मीदवारी महामहिम के पद पर तय होते ही उनकी विजय भी लगभग तय हो गई थी। राजनीतिक गणित तो उनके पक्ष में था ही, साथ ही दूसरों के सहयोग की भी पूरी संभावना थी। ऐसा हुआ भी। दलीय सीमाएं तोड़कर सांसदों और विधायकों ने उनको मत दिया और वे बड़े बहुमत से महामहिम के पद तक पहुंची है। उनकी विजय के बाद जाहिर हो रही प्रसन्नता इस बात को अभिव्यक्त करती है कि देश उनके राष्ट्रपति बनने से खुश है।
कल की दूसरी घटना थी, सोनिया की ईडी के सामने नेशनल हेराल्ड के मामले में पेशी। इससे पहले राहुल गांधी से भी ईडी लंबी पूछताछ कर चुकी है। उस समय भी कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता सड़क पर उतरे थे, ऐसा सोनिया गांधी के मामले में भी होना तय था। बीमारी से उठी सोनिया गांधी से पूछताछ की बात कांग्रेस को अखरी थी, ये कल के सड़कों पर हुए प्रदर्शन से साबित हो गया।
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत का ये बयान की 75 वर्षीय महिला, जो बीमार है, उससे ये व्यवहार राजनीतिक प्रतिशोध है। कोरोना से वे हाल ही में नेगेटिव हुई थी। गहलोत का कहना था कि उनकी उम्र, बीमारी और उनका महिला होना देखते हुए ईडी उनके घर जाकर भी उनसे पूछताछ कर सकती थी। ये बात ही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को गुस्से में ले आई। दिल्ली और देश के राज्यों की राजधानी में कांग्रेस ने प्रदर्शन किये। दिल्ली में सभी सांसद व बड़े नेता जुटे, गिरफ्तारियां दी।
एक बार फिर ईडी ने कांग्रेस व उसके कार्यकर्ताओं को एक करने का ही काम किया है। हर चुनाव में हार रही कांग्रेस को इससे थोड़ा तो जोश मिला है। इस स्थिति को ईडी ने भांप लिया। इसीलिए उन्होंने राहुल की तरह सोनिया से लंबी पूछताछ नहीं की। उनको बीमारी के कारण तीन घंटे बाद फ्री कर दिया और अगले दिन भी आने का नहीं कहा। ये कहा कि आपको सूचित कर देंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उग्र प्रदर्शन कर रहे थे। यूथ कांग्रेस सड़क पर थी। कांग्रेस अरसे बाद फिर थोड़ा एक दिखी।
महंगाई के साथ साथ ईडी के रवैये पर कांग्रेसी सांसदों ने लोकसभा व राज्यसभा को चलने नहीं दिया। राहुल के नेतृत्त्व में महंगाई के विरोध में संसद में प्रदर्शन चल ही रहा है। कल का दिन राजनीतिक रूप से दिल्ली सहित पूरे देश में बहुत गतिशील रहा। अब आने वाले समय की राजनीति पर इसका असर होता साफ दिख रहा है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार