Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
010
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 सितबंर 2022। बरसात के दिनों में कक्षाओं तक आया पानी, दीवारों में चार चार फीट चढ़ी सीलन, स्कूल के पीछे पीने के पानी की टंकी में भरा कीचड़, और अब जोहड़ से उठ रही बदबू से परेशान छात्र, स्कूल में बदबू से उल्टियां करते विद्यार्थी और तीन दिन इस गंदगी से निजात पाने के लिए संघर्ष करते छात्र। ये दृश्य श्रीडूंगरगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में लगातार नजर आ रहें है और श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स लगातार छात्रों की आवाज बनकर इसे शासन प्रशासन सहित जन जन तक पहुंचाने में सहायक बना। स्कूल प्रशासन भी सभी नेताओं व अधिकारियों से गुहार लगाकर नाउम्मीद हो गया तो संघर्ष व आंदोलन की कमान युवा कंधो ने अपने बाजुओं पर उठाई। ये छात्र बुधवार को पालिका भवन पहुंचे व स्कूल की दोनों समस्याओं का समाधान की मांग की, गुरूवार को छात्रों ने पालिका बोर्ड व पालिका प्रशासन को स्कूल में बुलाया तथा आज सुबह छात्रों ने स्कूल को ताला लगा दिया। छात्रों ने स्टॉफ को भी अंदर नहीं जाने दिया व जमकर आक्रोश प्रकट करते हुए नारेबाजी की। दोनों दलों के मुखिया मौके पर पहुंचे और आखिर पालिका ईओ भवानी शंकर व्यास ने लिखित में आश्वासन पत्र दिया और जलदाय विभाग के एईएन बृजमोहन मूंड ने दो दिन में पेयजल आपूर्ति की लाइन डलवाने का लिखित आश्वासन दिया। लगे हाथ छात्रों ने स्कूल के खेल मैदान श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्टेडियम को साफ करने की भी मांग की और आश्वासन भी लिया।

सांस लेने को शुद्ध हवा व पीने को साफ पानी छात्रों का हक है, इसे देना सबकी जिम्मेदारी है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शुद्ध हवा में सांस लेने व पीने का साफ पानी उपलब्ध करवाना, ये प्रत्येक विद्यालय में पढ़ रहें छात्रों का हक है। इस हक को उपलब्ध करवाना शासन और प्रशासन की ना केवल नैतिक जिम्मेदारी है बल्कि भारत का भविष्य इन किशोरों के प्रति जिम्मेदारों का कर्तव्य भी है। इन नौनिहालों के लिए संसाधनों व बजट की कमी किसी नेता, दानदाता या प्रशासन के पास नहीं है कमी है तो केवल कार्य करने की नीयत की है। देखा जाए तो ये दोनों ही कार्य ऐसे कार्य नहीं थे जिनके लिए छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़े परंतु श्रीडूंगरगढ़ में आजकल ये ट्रेंड बन गया है कि बिना हंगामे के आवाज को सुना ही नहीं जाता है। आज आखिर छात्रों के आंदोलन की प्राथमिक विजय हुई परन्तु वास्तविक जीत कार्य हो जाने के बाद ही मानी जा सकेगी।