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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 सितंबर 2022। परिवार के सभी रिश्ते महत्वपूर्ण होते है पर भाई का भाई से रिश्ता कुछ खास होता है। कहा भी जाता है कि भाई, भाई की हिम्मत और सहारा होता है और ये बात साक्षात रूप से सामने आई है क्षेत्र के गांव ठुकरियासर में जहां एक छोटे भाई ने अपनी किडनी देकर बड़े भाई को मौत के मुंह से निकाल लिया है। खेती किसानी से जुड़े सारण परिवार की चर्चा क्षेत्र भर में हो रही है। दोनों भाईयों के ठीक होने से उनके दादाओं के परिवार सहित सभी सदस्य गद्गद है। 43 वर्षीय रामलाल सारण गत एक वर्ष से किडनी की समस्या से पीड़ित था और डॉक्टरों ने दोनों किडनियां खराब होने की बात कह कर किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। रामलाल के छोटे भाई 40 वर्षीय मुन्नीराम सारण ने अपने भाई की जान बचाने के लिए अपनी किडनी देने का फैसला लिया। मुन्नीराम की जांचे की गई तो दोनों की जांच के मिलने पर डॉक्टरों ने 30 अगस्त को अपेक्स हॉस्पिटल में ऑपरेशन संपन्न किया। मंगलवार को दोनों भाईयों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई परंतु अभी एक माह उन्हें वहीं रहना होगा। वे मालवीय नगर में अस्पताल के सामने ही किराए का कमरा लेकर रुक हुए है। रामलाल सारण ने श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स को बताया कि अभी वे दोनों पूरी तरह से स्वस्थ है।

दोनों भाईयों की पत्नियां भी बहनें है, 80 वर्षीया वृद्धा माता कर रही है जाप।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आज समाज मे हर ओर लालच और स्वार्थीपन चरम पर नजर आ रहा है ऐसे में ऐसी कोई घटना सुकून देने वाली प्रतीत होती है। ऐसा लगता है कि आज भी समाज में स्वार्थ के परे कई लोग शिद्दत से अपने रिश्ते निभाते है। रामलाल पुत्र ज्ञानाराम सारण पांच भाई है जिनमें चार भाईयों की पत्नियां भी पाण्डुसर गांव की गोदारा जाट चार सगी बहनें है। रामलाल के ताऊ के बेटे भाई रामकरण सारण ने बताया कि पांचो भाईयों का परिवार आपसी प्रेम के साथ संयुक्त रूप से रहता है। रामलाल को किडनी की जरूरत पड़ी तो बड़े भाई तेजाराम सारण ने भी किडनी देनी चाही परन्तु उनकी किडनी मैच नहीं हुई। रामकरण ने भी किडनी देने की पेशकश की परंतु छोटे भाई मुन्नीराम ने हामी भरी और उनकी किडनी मैच भी हो गई। तेजाराम का बेटा सुरेश जयपुर में लगातार अपने दोनों चाचा में जुटा है। बुजुर्ग 80 वर्षीय माता बालीदेवी को इस बारे में अधिक जानकारी नहीं है परंतु वे अपने दोनों बेटों के शीघ्र स्वस्थ होकर घर लौट आने के लिए जाप कर रही है। रामलाल व मुन्नीराम दोनों भाईयों के दो-दो बच्चे है और पत्नियां दोनों बहनें होने के कारण सदैव सुख दुःख में साथ रहने वाली है।

अधिकांशत: रक्त संबंध वाली किडनी ही कारगर, रखनी होगी सावधानी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। राजकीय चिकित्सालय प्रभारी डॉ. एस.के. बिहानी ने टाइम्स से बातचीत में बताया कि किडनी देने के संबंध में अधिकांशतः रक्त संबंध वाली किडनियां ही सक्सेस होती है। माता पिता या भाई बहन एक दूसरे को किडनी देना ही श्रेयस्कर है। बिहाणी ने बताया कि एक किडनी के कारण अधिक भार वाला कार्य करने व अत्यधिक गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए और थोड़ा ध्यान रखने के साथ ही किडनी देने व लेने वाला अपना पूरा जीवन स्वस्थ रहकर व्यतीत कर सकते है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दाहिने तरफ बड़े भाई रामलाल व बायीं ओर छोटे मुन्नीराम, दोनों स्वस्थ है परन्तु 1 महीने उन्हें डॉक्टरों के निरीक्षण में ही रहना होगा।