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October 16, 2026
23-march
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 मार्च 2026।🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 23 – Mar – 2026
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि पंचमी 06:40 PM
🔅 नक्षत्र कृत्तिका 08:50 PM
🔅 करण :
बव 07:59 AM
बालव 07:59 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग विश्कुम्भ 12:21 PM
🔅 वार सोमवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:35 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:09 AM
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 06:46 PM
🔅 चन्द्रास्त 11:41 PM
🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:11 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:16:34 – 13:05:20
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 01:05 PM – 01:54 PM
🔅 कंटक 09:01 AM – 09:50 AM
🔅 यमघण्ट 12:16 PM – 01:05 PM
🔅 राहु काल 08:06 AM – 09:38 AM
🔅 कुलिक 03:31 PM – 04:20 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:39 AM – 11:27 AM
🔅 यमगण्ड 11:09 AM – 12:40 PM
🔅 गुलिक काल 02:12 PM – 03:43 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅अमृत 06:35:15 – 08:06:41
🔅काल 08:06:41 – 09:38:06
🔅शुभ 09:38:06 – 11:09:32
🔅रोग 11:09:32 – 12:40:57
🔅उद्वेग 12:40:57 – 14:12:22
🔅चल 14:12:22 – 15:43:48
🔅लाभ 15:43:48 – 17:15:13
🔅अमृत 17:15:13 – 18:46:39
🔅चल 18:46:38 – 20:15:05
🔅रोग 20:15:05 – 21:43:31
🔅काल 21:43:31 – 23:11:57
🔅लाभ 23:11:57 – 24:40:23
🔅उद्वेग 24:40:23 – 26:08:49
🔅शुभ 26:08:49 – 27:37:15
🔅अमृत 27:37:15 – 29:05:41
🔅चल 29:05:41 – 30:34:07

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:15 AM समाप्त: 07:40 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 07:40 AM समाप्त: 09:16 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:16 AM समाप्त: 11:12 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:12 AM समाप्त: 01:27 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 01:27 PM समाप्त: 03:47 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:47 PM समाप्त: 06:04 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:04 PM समाप्त: 08:20 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 08:20 PM समाप्त: 10:40 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:40 PM समाप्त: अगले दिन 00:58 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:58 AM समाप्त: अगले दिन 03:03 AM

🔅 मकर चर
शुरू: अगले दिन 03:03 AM समाप्त: अगले दिन 04:46 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:46 AM समाप्त: अगले दिन 06:15 AM

🌼 आप सभी को नवरात्री के पांचवे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं , जय माँ स्कन्द माता

नवरात्रि का पांचवा दिन सुख और शांति की देवी मां स्कंदमाता को समर्पित है। स्कंदमाता की पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की भी कृपा मिलती हैं ।
भगवान स्कंद, शंकर जी और पार्वती के दूसरे और छह मुख वाले पुत्र कार्तिकेय जी का एक नाम है ।
ऐसी मान्यता है कि स्कंदमाता की पूजा करने से संकट और शत्रुओं का नाश होता है, मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। मां स्कंदमाता की 4 भुजाएं हैं, तथा मां का आसन कमल है।
ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। दूसरी व चौथी भुजा में कमल का फूल, तीसरी भुजा से माँ अपने भक्तो को आशीर्वाद देती है।
क्योंकि स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य के जैसा ही अलौकिक तेज दिखाई देता है। सदैव कमल के आसन पर स्थित रहने के कारण स्कंदमाता को देवी पद्मासना भी कहा जाता है।
मां स्कंदमाता को केले का भोग अति प्रिय है। इसके साथ ही इन्हें केसर डालकर खीर का प्रसाद भी चढ़ाएं। माँ को इलाइची का भोग भी अत्यंत प्रिय है, स्कंदमाता को कमल का पुष्प अति प्रिय है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री