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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 अगस्त 2024। भाद्रपद महीने की कृष्ण पक्ष की छठ (षष्ठी तिथि) ऊब छठ होती है। ऊब छठ को चन्दन षष्ठी, चानन छठ और चंद्र छठ के नाम से भी जाना जाता है। वहीं देश के कई राज्यों में इस दिन को हलषष्ठी के रूप में मनाई जाती है। माना जाता है, कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था। और उनका शस्त्र हल था इसलिए इस दिन को हलषष्ठी भी कहा जाता है। वहीं कई जगह इस दिन को चंदन षष्ठी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।

कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर पाने के लिए करती हैं यह व्रत
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भाद्र कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ऊब छठ त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विवाहिता और कुंआरी कन्याएं व्रत रखती हैं। पूरे दिन निर्जला (बिना पानी)-निराहार (बिना भोजन) रहती हैं। चानन छठ की कहानी सुनती हैं। उब छठ का व्रत और पूजा विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु के लिए तथा कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर पाने के लिए करती हैं। सूर्यास्त के बाद से लेकर चांद के दिखने तक व्रत करने वाली महिला एवं युवती को खड़ा रहना होता है। इस दौरान जमीन पर नहीं बैठ सकती है। इसलिए इसीलिए इसको उब छठ कहते हैं।

पूजा करने की विधि
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इस दिन के पूजन के लिए विधान है। सूर्यास्त पश्चात नहाने के बाद तैयार होकर पूजन किया जाता है। इसके लिए लकड़ी के एक पाटे पर जल का कलश रखें. उस पर रोली से एक सतिया बनाकर सात बिन्दी लगा एक गिलास में गेहूं रखकर, दक्षिणा रखें। हाथ में गेहूं के सात-सात दाने लेकर कथा सुनी जाती है। कहानी सुनने के बाद जल कलश तथा गेहूं उठाकर रख दिया जाता है। रात्रि में चन्द्रमा उदय होने पर अर्घ्य देकर गिलास का गेहूं तथा दक्षिणा ब्राह्मणी को दी जाती हैं। चन्द्रमा के उदय के पश्चात् एक कलश का चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत को खोला अर्थात पारण करना चाहिए।

भगवान बलराम का भी आज के ही दिन हुआ था जन्म
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इस दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। उनका मुख्य शस्त्र हल था इसलिए बलराम जी को हलधर भी कहा जाता है। इसलिए देश के कई राज्यों में इस दिन को हल छठ भी कहा जाता है। सूर्यास्त के बाद चंद्रोदय से पहले बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां इस दिन कृष्ण मंदिरों में दर्शन करने के लिए जाती हैं। मंदिरों में इस दिन पुरुषों का प्रवेश इसलिए वर्जित कर दिया जाता है क्योंकि बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां वहां पहुंचती है।

उब छठ की व्रत कथा
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किसी गांव में एक साहूकार और इसकी पत्नी रहते थे। साहूकार की पत्नी रजस्वला होती थी तब सभी प्रकार के काम कर लेती थी। रसोई में जाना, पानी भरना, खाना बनाना, सब जगह हाथ लगा देती थी। उनके एक पुत्र था। पुत्र की शादी के बाद साहूकार और उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई।
अगले जन्म में साहूकार एक बैल के रूप में पैदा हुआ और उसकी पत्नी अगले जन्म में कुतिया बनी। ये दोनों अपने पुत्र के यहाँ ही थे। बैल से खेतों में हल जुताया जाता था और कुतिया घर की रखवाली करती थी।
श्राद्ध के दिन पुत्र ने बहुत से पकवान बनवाये। खीर भी बन रही थी। अचानक कही से एक चील उड़ती हुई आई। चील के मुँह में एक मरा हुआ साँप था। वो सांप चील के मुँह से छूटकर खीर में गिर गया।
कुतिया ने यह देख लिया। उसने सोचा इस खीर को खाने से कई लोग मर सकते है। उसने खीर में मुँह अड़ा दिया ताकि उस खीर को लोग ना खाये।
पुत्र की पत्नी ने कुतिया को खीर में मुँह अड़ाते हुए देखा तो गुस्से में एक मोटे डंडे से उसकी पीठ पर मारा। चोट तेज थी कुतिया की पीठ की हड्डी टूट गई। उसे बहुत दर्द हो रहा था। रात को वह बैल से बात कर रही थी।
उसने कहा तुम्हारे लिए श्राद्ध हुआ तुमने पेट भर भोजन किया होगा। मुझे तो खाना भी नहीं मिला, मार पड़ी सो अलग। बैल ने कहा – मुझे भी भोजन नहीं मिला , दिन भर खेत पर ही काम करता रहा।
ये सब बातें बहु ने सुन ली। उसने अपने पति को बताया। उसने एक पंडित को बुलाकर इस घटना का जिक्र किया।
पंडित में अपनी ज्योतिष विद्या से पता करके बताया की कुतिया उसकी माँ और बैल उसके पिता है। उनको ऐसी योनि मिलने का कारण माँ द्वारा रजस्वला होने पर भी सब जगह हाथ लगाना, खाना बनाना, पानी भरना था।
उसे बड़ा दुःख हुआ और माता पिता के उद्धार का उपाय पूछा। पंडित ने बताया यदि उसकी कुँवारी कन्या भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्टी यानि ऊब छठ का व्रत करे। शाम को नहा कर पूजा करे उसके बाद बैठे नहीं। चाँद निकलने पर अर्ध्य दे। अर्ध्य देने पर जो पानी गिरे वह बैल और कुतिया को छूए तो उनका मोक्ष हो जायेगा।
जैसा पंडित ने बताया था कन्या ने ऊब छठ का व्रत किया, पूजा की। चाँद निकलने पर चाँद को अर्ध्य दिया। अर्ध्य का पानी जमीन पर गिरकर बहते हुए बैल और कुतिया पर गिरे ऐसी व्यवस्था की। पानी उन पर गिरने से दोनों को मोक्ष प्राप्त हुआ और उन्हें इस योनि से छुटकारा मिल गया।
हे! ऊब छठ माता, जैसे इनका किया वैसे सभी का उद्धार करना। कहानी कहने वाले और सुनने वाले का भला करना।
बोलो छठ माता की…. जय !!!