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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 जनवरी 2023। वर्तमान समय में शनि देव अपनी राशि मकर में भ्रमण कर रहे हैं और इसी से निकलकर कुंभ राशि में लगभग 30 वर्ष के बाद उनकी घर वापसी होगी। कुंभ राशि में शनि का गोचर मंगलवार के दिन, 17 जनवरी 2023 को सायंकाल 5:04 बजे होगा। यह शनिदेव का अपनी राशि में गोचर है और कुंभ राशि प्रबल राशि होने के कारण और शनि के लिए मूल त्रिकोण राशि होने के कारण शनि ग्रह का कुंभ राशि में गोचर करना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह गोचर देश और दुनिया में व्यापक प्रभाव लेकर आने वाला है। सभी पाठकों के लिए ये महत्वपूर्ण जानकारी पंडित विष्णुदत्त शास्त्री द्वारा उपलब्ध करवाई गई है।

“साढ़े साती”

वर्ष 2023 में शनि ग्रह की चाल बदलने से और उनका कुंभ राशि में गोचर होने से जहां एक तरफ धनु राशि के जातकों को साढ़ेसाती से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी तो वहीं मकर राशि वालों की साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होगा जिसे उतरती हुई साढ़ेसाती कहते हैं। कुंभ राशि में शनि का गोचर कुंभ राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का दूसरा और मध्यम चरण लेकर आएगा तो मीन राशि वालों के लिए यह साढ़ेसाती का प्रथम चरण होगा जिसे चढ़ती हुई साढ़ेसाती कहा जाता है

“ढैया”
जब शनि राशि परिवर्तन करके कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तो मिथुन राशि और तुला राशि के जातकों को ढैय्या से मुक्ति मिलेगी तथा कर्क राशि के लोगों के लिए कंटक शनि और वृश्चिक राशि के लोगों के लिए ढैय्या अथवा पनौती का समय शुरू होगा।

शनि ग्रह का गोचर बहुत ज्यादा प्रभावशाली होता है। जिस समय शनि का गोचर होता है, उस समय चंद्र आदि ग्रहों की स्थिति को देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि शनि जिस समय गोचर कर रहे हैं, उस समय पर शनि का पाया अथवा शनि पाद कौन सा है। इसके आधार पर व्यक्ति को शनि के गोचर फल का प्रभाव भी पता चल जाता है।

यदि इस दौरान शनि देव किसी राशि प्रवेश कर रहे हों, उस समय चंद्रमा पहले, छठे या ग्यारहवें भाव में हो तो यह स्वर्ण पाद कहलाता है। दूसरे, पांचवें और नौवें भाव में होने से रजत पाद, तीसरे, सातवें और दसवें भाव में होने से ताम्र पाद और चौथे, आठवें और बारहवें स्थान में होने से शनि का पाया लौह पाद माना जाता है।

सोने का पाया होने से व्यक्ति को संघर्षपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना होता है क्योंकि यह एक अशुभ पाया माना जाता है। यह बेवजह की कलह अधिक होने और मानसिक तनाव की बढ़ोतरी का समय होता है।

रजत अथवा चांदी का पाया होने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को धन लाभ होता है। उसकी पद और प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। जीवन में पदोन्नति, भूमि, भवन, मकान और वाहन आदि की प्राप्ति के योग बनते हैं।

ताम्र अथवा तांबे का पाया शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे व्यक्ति के कार्य में उसके व्यवसाय अथवा नौकरी में लाभ और उन्नति होने लगती है। उसके रसूखदार लोगों से संपर्क स्थापित होते हैं। सभी प्रकार के सुख जैसे सवारी की प्राप्ति, उच्च विद्या की प्राप्ति, विवाह होना, पारिवारिक सुखों की बढ़ोतरी और सुख सुविधाओं के योग बनते हैं और व्यक्ति को विदेश यात्रा का सुख भी मिलता है।

लोहे अथवा लौह पाद को अशुभ माना जाता है। इसके कारण मानसिक तनाव, स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं, उलझनें, आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं तथा दुर्घटना आदि होने के योग बनते हैं। जातक के कार्यों में विघ्न पड़ते हैं और खर्चों में अधिकता होती है।

17 जनवरी 2023 को जब शनि का कुंभ राशि में गोचर होगा, उस समय चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे। इसके अनुसार विभिन्न राशियों के लिए शनि का पाया और उसका प्रभाव इस प्रकार होगा:

मिथुन राशि, वृश्चिक राशि और मकर राशि के जातकों के लिए शनि का स्वर्ण पाया होगा। इस कारण से यह मध्यम रूप से फलदायक रहेगा। पारिवारिक और व्यावसायिक उलझनों की बढ़ोतरी हो सकती है। शत्रुओं का भय होगा और मानसिक तनाव की बढ़ोतरी के योग बन सकते हैं।

कर्क राशि, तुला राशि और मीन राशियों के लिए शनि का पाया रजत (चांदी) का होगा इसलिए इसके शुभ परिणाम मिलने के योग ज्यादा होंगे। इससे व्यक्ति को मेहनत के अनुपात में अच्छे परिणाम मिलेंगे। सुख संसाधनों में बढ़ोतरी होगी। समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान की प्राप्ति होगी। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में उन्नति के योग बनेंगे। भूमि, भवन, मकान और वाहन प्राप्ति के योग बनेंगे तथा आकस्मिक धन लाभ भी हो सकता है।

वृषभ राशि, कन्या राशि और कुंभ राशि के लिए शनि ताम्र पाद से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए यह आपके लिए शुभ समय हो सकता है। आपको आपके कार्य और व्यवसाय में अच्छी सफलता के योग बनेंगे। लंबी यात्राओं के योग बनेंगे जिनमें आपको सुख और शांति तथा उन्नति की प्राप्ति होगी। पारिवारिक और निजी जीवन में खुशियों की बरसात होगी। नया वाहन खरीदने के योग बन सकते हैं तथा समाज के उच्च और महत्वपूर्ण लोगों से आपके संपर्क बनेंगे, जो आपके जीवन में लाभकारी साबित होंगे।

मेष राशि, सिंह राशि और धनु राशियों के लिए शनि लौह पाद से कुंभ राशि में गोचर करेंगे जिसके कारण यह अशुभ हो सकते हैं। इससे पारिवारिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य में भी गिरावट आने की संभावना बन सकती है। विभिन्न प्रकार की उलझनें, कलह, क्लेश और तनाव बढ़ सकते हैं। किसी प्रकार की दुर्घटना या चोट लगने का भय तथा व्यवसाय में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस दौरान आपको अपने खर्चों पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि वह बेतहाशा बढ़ सकते हैं।

“कुंभ राशि में गोचर का प्रभाव”

शनि के गोचर के प्रभाव से विभिन्न स्थानों पर सर्दी बढ़ने की आशंका रहेगी और शीतलहर चलेगी। शनि के प्रभाव से वायु की तीव्रता कम होगी लेकिन वायु ठंडी हो जाएगी जिससे भूमंडलीय परिवर्तन होंगे।
यदि स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार देखें तो शनि का गोचर चंद्र राशि से अष्टम भाव में और लग्न भाव से दशम भाव में होने वाला है। यह समय मजबूत न्यायिक व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
देश में न्यायपालिका के प्रभाव में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी और शनि के प्रभाव से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर बड़े महत्वपूर्ण निर्णय सामने आएंगे जिनका दूरगामी और दीर्घावधि प्रभाव पड़ेगा।
इस दौरान सरकार भी कुछ महत्वपूर्ण कानून बना सकती है जिनमें अल्पसंख्यक और निर्धन वर्ग के लिए कोई विशेष योजना भी शामिल हो सकती है।
भारत के पश्चिमी राज्यों में ठंड का प्रकोप बढ़ सकता है और वातावरण में नमी बढ़ने के योग बनेंगे।
शनि के इस गोचर से नौकरीपेशा लोगों को आशा की किरण नजर आएगी और मंदी की चपेट में आ रहे समय से बाहर निकलने में मदद मिलेगी तथा सेवा प्रदाता कंपनियों को लाभ मिलेगा।
शनि के गोचर के प्रभाव से खाद्यान्नों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
आलू, शकरकंद और ऐसे सभी खाद्य पदार्थ, जो जमीन के अंदर से निकलते हैं, वे भरपूर मात्रा में उत्पादित होंगे जिससे उनके दामों में कमी देखने को मिलेगी।
भारत देश-विदेशों से कम दामों पर कच्चा तेल और गैस खरीदने में कामयाब रहेगा जिससे देश में इन वस्तुओं में कोई कमी नहीं होगी।
शनि के प्रभाव से सत्ताधारी दल को जनता का समर्थन मिलेगा।
विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों में शनि के प्रभाव से उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे।
भारत के विदेशी व्यापार में प्रगति होगी और कुछ नए देशों से मजबूत व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे।
शनि के गोचर के प्रभाव से गृह स्तर पर आंतरिक संघर्षों को बढ़ने से रोकना सरकार के लिए चुनौती बनेगा।
किसी विपक्षी बड़े नेता के लिए यह समय कष्टकारी साबित हो सकता है।
शनि के गोचर के प्रभाव से भारत की सीमाओं पर बढ़ते तनाव को भारत मजबूती से संभाल पाएगा।
यदि शनि के गोचर का विश्वव्यापी प्रभाव देखा जाए तो पश्चिमी देश एकजुट होने का प्रयास करते नजर आएंगे।
नाटो देश एकजुट होने का प्रयास करेंगे और रूस के खिलाफ अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
एशिया और प्रशांत के बीच अच्छी साझेदारी के योग बनेंगे।
विश्व स्तर पर एल्युमिनियम और लोहे की वस्तुओं में पहले तेजी और फिर मंदी के योग बनेंगे।
शनि के कुंभ राशि में प्रवेश के बाद हवा से फैलने वाली बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।
वर्तमान समय में चल रहे कोरोना के प्रकोप से बचना एक कठिन कार्य होगा और इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
एक नियमबद्ध और पक्के तरीके से सतत प्रयासों और विभिन्न देशों की सरकारों के संयुक्त प्रयासों से कोरोना वायरस से जीत हासिल करने में सफलता मिलेगी।
प्रवासी मजदूरों के मामलों में विशेष कानून देखने को मिल सकते हैं।
विभिन्न बड़े देश वर्क परमिट वीजा में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
नौकरी के सिलसिले में एक देश से दूसरे देश लेबर का आना-जाना सुगम होगा और उनके अधिकारों में बढ़ोतरी हो सकती है। उनके अधिकारों की मांग भी उठेगी।

“शनि ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए अचूक उपाय”

आपको शनिवार के दिन भीगे हुए साबुत उड़द पक्षियों को डालने चाहिए।
11 या 21 कच्चे नारियल अपने सिर से वार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर देने से भी आपको मानसिक तनाव से और शनि जनित पीड़ा से मुक्ति मिलेगी।
शनि देव के बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नमः का जाप करना चाहिए।
शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना भी लाभदायक रहेगा।
शनिवार के दिन किसी काले धागे में बिच्छू जड़ी या धतूरे की जड़ को अपनी दाहिनी बाजू अथवा गले में धारण करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
रुई की एक बत्ती में लोबान लगाकर सरसों के तेल का दीपक शनिवार को सायंकाल में पीपल वृक्ष के नीचे जलाएं।
शनिदेव के किसी भी स्तोत्र का मन लगाकर पाठ करें।