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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 दिसम्बर 2021। एक साल से अधिक चला लोकतंत्र का सबसे बड़ा आंदोलन खत्म हुआ। दिखने को ये किसान यानी अन्नदाता की जीत है मगर ये जीत लोकतंत्र, अहिंसा और गांधी के सिद्धांत सत्याग्रह की भी जीत है। सामूहिक संघर्ष निष्फल नहीं होते, ये देश की जनता ने देखा।
केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लिए। एमएसपी की गारंटी पर सहमति दी। आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज हुए मुकदमें वापस लेने का काम किया। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को मुआवजा देने की बात भी मानी। बिजली, पराली आदि की समस्या के निदान के लिए समिति बनी। आजादी के बाद पहली बार कोई आंदोलन इतना सफल हुआ। वो भी सत्याग्रह के मार्ग से।
किसान ने खेत छोड़ा और सड़क पर डेरा डाला। उसका परिवार भी साथ आया। एक साल तक घर, खेत छोड़कर सत्याग्रह करना, आसान नहीं। संघर्ष तभी सफल होता है जब उसका ध्येय साफ, स्पष्ट और सार्थक हो। भारत ने आजादी के लिए बड़ा आंदोलन किया और अंग्रेजों को भगाया, उसमें में किसानों की बड़ी भूमिका थी।
किसानों ने आंदोलन आरम्भ करते ही कह दिया था कि हम अपने मंच पर राजनीतिक दलों को स्थान नहीं देंगे। वे अपने स्तर पर समर्थन करे तो मंजूर है। उनका सड़क से संसद तक का समर्थन हो, किसानों का मंच नहीं। पहली बार सभी विपक्षी दलों ने भी किसानों की भावना को समझा और एक साथ आकर समर्थन किया। हालांकि चाहे सत्ता का दल हो या विपक्ष, बिना राजनीतिक वजह से काम नहीं करता। वो अपनी बात करते रहे मगर किसान अपनी मांगों पर अपने तरीके से सत्याग्रह पर रहे।
बहुत बार किसानों और सत्ता की टकराहट भी हुई। कड़वी बयानबाजी भी हुई। तभी तो किसानों पर मुकदमें भी हुए। मगर किसान अपनी मांगों के लिए संघर्षरत रहा। ये लोकतंत्र का सबसे बड़ा सत्याग्रह बन गया। दुनिया को इस आंदोलन ने प्रभावित किया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के लिए सत्याग्रह की राह अपनाई तब दुनिया ने उसे पहला सत्याग्रही कहा था। वो सिद्धांत ही लोकतंत्र की आत्मा है, ये किसान आंदोलन ने साबित कर दिया। सत्ता नहीं जनता बड़ी होती है, इसे ही तो लोकतंत्र कहते हैं। जो आजादी के 75 साल में एक बार फिर साबित हुआ।
किसान आंदोलन के खत्म होने पर किसानों ने ही नहीं आम जनता ने भी भी राहत की सांस ली है। क्योंकि संघर्ष, सत्याग्रह, लोकतंत्र जीता। ये आंदोलन भी अर्से तक याद रखा जायेगा और सदा अहसास करायेगा कि लोकतंत्र बड़ा है। ये सीख दुनिया को भी मिली है। एक आंदोलन कई नये आयाम उद्घाटित करता है, इस आंदोलन ने भी ये काम किया है। जिसके असर आने समय में दिखेंगे। किसानों को संघर्ष, सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई तो सरकार को भी साधुवाद। लोकतांत्रिक तरीके को माना। देखा जाये तो ये लोकतंत्र, सत्याग्रह और महात्मा गांधी के सिद्धांतों की जीत है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार