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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 अक्टूबर 2021। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के पाठकों के लिए विशेष स्तम्भ। देश के समसामयिक मुद्दों पर प्रख्यात समालोचक ओर वरिष्ठ पत्रकार मधु आचार्य आशावादी की विशेष टिप्पणी।
तीन कृषि बिलों को वापस लेने की मांग पर आंदोलन कर रहे किसानों के आंदोलन को एक साल पूरा होने वाला है। सरकार की अपेक्षा के विपरीत किसान न तो थके हैं और न कमजोर हुए हैं। कल देश भर में 298 रेल गाड़ियों को रोककर किसानों ने अपने नये मगर तीखे तेवर के संकेत दे दिए हैं। जो केंद्र सरकार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी करेंगे। भाजपा के लिए आने वाले 5 राज्यों के विधान सभा चुनाव में भी खेल बिगाड़ेंगे।
कल का रेल रोको आंदोलन किसानों की नई करवट के रूप में देखा जाना चाहिये। इससे एक तरफ जहां आम जनता की जुबान पर किसान आंदोलन आया है वहीं संयुक्त किसान मोर्चा ने इसके जरिये किसानों को फिर से मोबलाईज भी किया है। आंदोलन की लंबी अवधि से सुस्त हुए किसानों को भी रेल रोको आंदोलन ने चुस्ती दी है। सरकार की नजर थी इस आंदोलन पर। उसी के परिणाम स्वरूप 43 रेल गाड़ियां तो रद्द करनी पड़ी। कमोबेश हर राज्य में किसानों ने अपनी दस्तक दी।
पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के बेतहाशा बढे दाम ने भी किसान आंदोलन को मजबूत किया है। इन पेट्रोलियम पदार्थों का सीधा जुड़ाव किसान से है। वहीं आम जनता की कमर भी इस महंगाई से टूटी है। तभी तो उसकी भी सहानुभूति किसानों के साथ हुई है।
महंगाई को लेकर विपक्ष तो बड़ा आंदोलन खड़ा नहीं कर पाया, आम जनता दुखी है पर सड़क पर नहीं उतर रही। उस हालत में आंदोलन कर रहे किसानों के साथ जरूर उसकी सहानुभूति बन गई है।
यूपी के होने वाले विधान सभा चुनाव को देखते हुए किसानों ने तेवर तेज किये हैं, ये सरकार भी जानती है। मगर कोई सार्थक रास्ता सरकार को भी नहीं दिख रहा। इतना आगे बढ़ चुके किसान अब पांव पीछे नहीं खींच सकते। सरकार की भी यही दशा है।
किसान आंदोलन का नया तेवर 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों पर असर डालेगा, ये तो लगने लग गया। मगर कितना, ये तय नहीं हो रहा। किसान और सरकार दोनों के लिए नये तेवर भविष्य की कृषि नीति को तय करेंगे।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार