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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 नवम्बर 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 02 – Nov – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि द्वादशी 11:33:49
🔅 नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी 11:45:17
🔅 करण :
तैतिल 11:33:49
गर 22:23:37
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग वैधृति 18:12:34
🔅 वार मंगलवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:45:34
🔅 चन्द्रोदय 28:47:00
🔅 चन्द्र राशि कन्या
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 17:49:12
🔅 चन्द्रास्त 16:18:59
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 11:03:36
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:55:16 – 12:39:30
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:58:18 – 09:42:32
🔅 कंटक 07:29:49 – 08:14:03
🔅 यमघण्ट 10:26:47 – 11:11:01
🔅 राहु काल 15:03:17 – 16:26:14
🔅 कुलिक 13:23:45 – 14:07:59
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:58:18 – 09:42:32
🔅 यमगण्ड 09:31:29 – 10:54:26
🔅 गुलिक काल 12:17:23 – 13:40:20
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅रोग 06:45:34 – 08:08:32
🔅उद्वेग 08:08:32 – 09:31:29
🔅चल 09:31:29 – 10:54:26
🔅लाभ 10:54:26 – 12:17:23
🔅अमृत 12:17:23 – 13:40:20
🔅काल 13:40:20 – 15:03:17
🔅शुभ 15:03:17 – 16:26:14
🔅रोग 16:26:14 – 17:49:11
🔅काल 17:49:12 – 19:26:20
🔅लाभ 19:26:20 – 21:03:28
🔅उद्वेग 21:03:28 – 22:40:36
🔅शुभ 22:40:36 – 24:17:44
🔅अमृत 24:17:44 – 25:54:52
🔅चल 25:54:52 – 27:32:00
🔅रोग 27:32:00 – 29:09:08
🔅काल 29:09:08 – 30:46:16

❄️ लग्न तालिका❄️

🔅 तुला चर
शुरू: 05:36 AM समाप्त: 07:55 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:55 AM समाप्त: 10:14 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:14 AM समाप्त: 12:19 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 12:19 PM समाप्त: 02:02 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:02 PM समाप्त: 03:30 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:30 PM समाप्त: 04:56 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 04:56 PM समाप्त: 06:32 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:32 PM समाप्त: 08:28 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:28 PM समाप्त: 10:43 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 10:43 PM समाप्त: अगले दिन 01:03 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:03 AM समाप्त: अगले दिन 03:20 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:20 AM समाप्त: अगले दिन 05:36 AM

धनतेरस, यमदीपदान

🌟धनतेरस का महत्व🌟

सनातन धर्म में धनतेरस को एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस पर्व की कड़ी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। मान्यताओं के अनुसार जब अमृत की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था तब इस समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लिए उपन्न हुए थे। भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैध भी कहा जाता है और इस दिन विशेष तौर पर भगवान धन्वंतरि की पूजा भी की जाती है। ऐसे में धनतेरस के पर्व को पूरी आस्था और नियमपूर्वक मनाने वाले भक्तों को भगवान धन्वंतरि न सिर्फ धन, ऐश्वर्य, सुख व समृद्धि प्रदान करते हैं बल्कि भक्तों को आरोग्यता का वरदान भी देते हैं। चूंकि इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ उत्पन्न हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन बर्तन की ख़रीदारी करने से धन में 13 गुना की वृद्धि होती है। हालांकि इस दिन सोना, चांदी व अन्य सामानों को भी खरीदने की परंपरा भी है। भगवान धन्वंतरि के साथ इस दिन भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का भी विधान है।

इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यम को दीपदान करने की भी परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान यम को दीपदान करने से भक्तों की अकाल मृत्यु नहीं होती। पद्म पुराण में वर्णित एक श्लोक के अनुसार~

कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां तु पावके।

यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति।।

अर्थात :

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन भगवान यम को दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है।

ऐसे में देखा जाए तो धनतेरस का पावन पर्व न सिर्फ भक्तों को धन के साथ आरोग्यता प्रदान करता है बल्कि अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्त करता है। यही वजह है कि धनतेरस का सनातन धर्म में काफी महत्व है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026