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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 नवम्बर 2021। लोक सभा और विधान सभा के उप चुनावों के कल आये नतीजों ने देश में नये राजनीतिक समीकरण बनने के स्पष्ट संकेत दिये हैं। ये नतीजे भाजपा – कांग्रेस के लिए चिंता पैदा करने वाले हैं और उनको अपनी राजनीति पर फिर से मंथन करना पड़ेगा। आने वाले लोक सभा के चुनावों के लिए दोनों दलों को इन्हीं नतीजों के आधार पर अपनी रणनीति बनानी पड़ेगी।
भाजपा का गढ़ और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के गृह राज्य हिमाचल प्रदेश में तो भाजपा की बुरी गत हुई है। यहां की तीन विधानसभा और एक मंडी लोकसभा की सीट पर कांग्रेस ने भाजपा को बुरी शिकस्त दी है। इस राज्य के अगले विधान सभा चुनाव को लेकर भाजपा के लिए ये परिणाम जहां खतरे की घंटी है वहीं कांग्रेस के लिए उत्साह देने वाली घटना है।
मध्य प्रदेश में जरूर भाजपा के लिए मामला ठीक रहा है। तीन में से दो विधान सभा और खंडवा की लोकसभा सीट जीत के पार्टी ने राहत की सांस ली है। कांग्रेस यहां केवल एक विधान सभा सीट जीत सकी है। मगर यहां भी भाजपा पूरी राहत में नहीं समझी जा सकती। खंडवा का पिछला चुनाव भाजपा ने तीन लाख से अधिक मतों से जीता था जिसका अंतर अब केवल हजारों में रह गया। वहीं कांग्रेस को भी प्रदेश के लिए नई रणनीति पर काम करना होगा। आखिर कब तक कमलनाथ के भरोसे रहेंगे। ज्योतिरादित्य छोड़ चुके। यहां कांग्रेस ने अभी से मेहनत नहीं की तो हालत खराब ही होगी। असम में भाजपा और सहयोगी दल ने पांचों विधानसभा सीट जीतकर साबित कर दिया कि पूर्वोत्तर में वो अब भी ताकत में है।
हिमाचल की तरह राजस्थान में भी भाजपा की बुरी गत हुई है और ये पार्टी आलाकमान के लिए बड़ी चिंता की बात है। यहां विधानसभा के दोनों चुनाव तो भाजपा ने हारे ही मगर तीसरे और चौथे स्थान पर रही। मुख्य मुकाबले में भी जी तोड़ प्रयास के बाद भी नहीं आ सकी। भाजपा के वर्तमान प्रदेश नेतृत्त्व की समीक्षा जरुरी है हो गई। जिद से संगठन कमजोर हुआ है। पार्टी नेतृत्त्व भले ही न माने मगर जनता ने संकेत दे दिए कि वसुंधरा राजे के बिना चुनावी वैतरणी पार करना मुश्किल है। ये बात राजस्थान में तीन साल में हुए सभी उप चुनावों में साबित हुआ है। भाजपा को फिर से राज्य में समीक्षा की जरूरत है।
बंगाल की चारों सीटें जीतकर ममता ने साबित कर दिया कि यहां उनकी टक्कर में कोई नहीं है। वे अपराजेय हैं। तभी तो वे कांग्रेस पर हमले कर मुख्य विपक्षी दल बनने का दावा ठोक रही है। बिहार में दोनों सीट जीत नीतीश ने लाज बचाई है। दादर नगर हवेली की लोक सभा सीट जीत सही सेना ने अपने को मजबूत साबित किया है। हरियाणा में चौटाला की जीत को किसान आंदोलन की जीत माना जाना चाहिए। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र, मेघालय के परिणाम खास उलटफेर का संकेत नहीं देते। भाजपा और कांग्रेस के लिए उप चुनावों के परिणाम जरूर विचारणीय बने हैं।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार