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October 16, 2026
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जहाँ राजस्थान विविधता में एकता वाला प्रदेश है, वहीं इसकी अपनी अन्य विशेषताएँ हैं। यहाँ की शौर्य एवं बलिदान की गाथाएँ किसी से छिपी नहीं हैं। यहाँ के हरेक गाँव की अपनी खासियत है। इसी सन्दर्भ में आज चर्चा करते हैं ब्यावर जिले के मसूदा उपखण्ड के छोटे-से ग्राम ‘देवमाली’ की।
इस ग्राम के बारे में पहले बहुत-सी बातें सुन एवं पढ़ रखी थीं किन्तु ग्राम के दर्शन एवं लोगों के साथ संवाद ने उन बातों को पुख्ता कर दिया।

मुझे किसी ने बताया कि देवमाली ग्राम में श्री राधाकिशन जी नाम से वयोवृद्ध सिद्धपुरुष हैं जो कैंसर एवं जहरनाशक झाड़ा देते हैं। इसलिए मैं भी वहाँ गया। मेरे बड़े भाई-भाभी, पुत्र, एक मित्र एवं वाहन चालक के साथ इस ग्राम की अपनी तीन दिवसीय यात्रा बहुत ही सुकूनभरी रही। लोगों ने बताया कि ग्राम की कांकड़ से बाहर रात्रि विश्राम करने पर ही झाड़ा पलता है। इस परम्परा का निर्वहन करते हुए हम भी वहाँ से सात किमी दूर मसूदा के ‘रांका रिसोर्ट’ में रहे। मैंने न केवल यात्रा का आनन्द लिया अपितु देवधाम देवमाली के बारे में बहुत ही रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक जानकारी जुटाई जिसे राजस्थान को जानने एवं समझने की दृष्टि से यहाँ साझा किया जा रहा है।

मूर्ति के स्थान पर होती हैं पाँच ईंटों की पूजा
ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर देवमाली गुर्जरों के आराध्यदेव देव नारायण जी की कर्मस्थली रही है। देवनारायण जी अपने पिता की हत्या का बदला लेने के बाद अपनी माता एवं बगड़ावत मित्र के साथ आकर जीवनपर्यंत इसी ग्राम में रहे। इसी कारण वे देवमालिनाथ कहलाए। देवजी आयुर्वेद एवं तंत्र-मंत्र के अच्छे जानकार थे। यहाँ उन्होंने अनेक जनहित के कार्य किए तथा लोगों को असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाई। इस ग्राम की पहाड़ी पर उनका मन्दिर है। ऐसी मान्यता है कि विष्णु के अवतार देवजी ने स्वयं इस मन्दिर की स्थापना की थी। इस मन्दिर में उनके पिता सवाई भोज की प्रतिमा है।
यह ग्रामवासियों की श्रद्धा का सबसे बड़ा स्थान है। मन्दिर में मूर्ति के स्थान पर पाँच ईंटें हैं जिनकी पूजा की जाती है तथा प्रदेश में कहीं भी देवजी का मन्दिर बनता है तो यहाँ से पाँच ईंटें एवं जोत ले जाई जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः ग्राम के लोग नगें पैर इस पहाड़ी की परिक्रमा करते हैं।

रहते हैं केवल गुर्जर जाति के लोग
1500 से अधिक आबादी वाले इस ग्राम में मुख्यतः गुर्जर जाति के लोग रहते हैं। उनके वर्तमान में 300 से अधिक घर हैं। इनके आदिपुरुष का नाम नादाजी था। नादाजी की 14-15 वीं पीढ़ी वर्तमान में इस ग्राम में रह रही है। लोगों ने बताया कि देवजी ने सर्वप्रथम नादाजी को प्रत्यक्ष दर्शन दिए थे। तब से नादाजी के वंशज इसी ग्राम में रह रहे हैं। ये लोग बारी-बारी से देव नारायण जी के मन्दिर की पूजा करते हैं। भगवान देवनारायण जी ने गौवंश की सेवा की थी। उनके पास अठानवे हजार गायें थीं। वे गौ माता के रक्षक थे। इस कारण यहाँ के लोगों को गोमाता से लगाव है। लोग कृषि एवं पशुपालन के सहारे अपना जीवनयापन करते हैं। लोगों का प्रकृति में विश्वास है तथा वे पेड़-पौधों के प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं। नीम से उनका अत्यधिक लगाव है।

किसी भी मकान के पक्की छत नहीं
ऐसा नहीं है कि यहाँ के लोग साधन सम्पन्न नहीं हैं। उनके पास आधुनिक सुख-सुविधाएँ, यथा- बिजली, पंखा, कूलर, ऐसी, फ्रिज, गैस, महंगी कारें सब कुछ हैं किन्तु इसके बावजूद यहाँ मकानों की छतें खपरैल, घासपूस आदि से कच्ची बनी हैं। केवल सरकारी भवनों को छोड़कर किसी भी मकान की छत पक्की नहीं है। सरकारी भवनों की पक्की छत बनाने के लिए भी भगवान देव नारायण जी के मन्दिर में अर्जी लगाई जाती है।
मान्यता है कि देवनारायण जी ने यहाँ के लोगों की सेवा से खुश होकर वरदान माँगने को कहा तो लोगों ने कुछ नहीं माँगा। तब देवजी ने खुश होकर कहा कि अगर शांति से रहना चाहते हो तो मकान की छत कभी भी पक्की मत बनवाना। नादाजी ने भी देवनारायण जी को जो चार वचन दिए थे, उनमें एक पक्की छत नहीं बनवाने का था। लोग तब से ही अपने पूर्वजों के वचन एवं देवजी की बात को मानकर इस परम्परा का निर्वहन करते आ रहे हैं। कुछ लोगों ने अन्धविश्वास मानकर इस परम्परा को तोड़ना चाहा किन्तु उनके मकान गिर गए। ऐसा भी मानना है कि परम्परा को तोड़ने पर ग्राम में आपदा आ जाती है।

कोई व्यक्ति नहीं है जमीन का मालिक
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार ग्राम में तीन हजार आठ सौ बीघा कृषि भूमि है लेकिन सारी भूमि देव नारायण जी के नाम से है किसी भी ग्रामवासी का उस पर मालिकाना हक नहीं है।

किसी भी घर में ताला नहीं, कोई चोरी एवं आपराधिक घटना नहीं
लोग बताते हैं कि देवमाली ग्राम में किसी भी घर में ताला नहीं लगाया जाता। पिछले 5-6 दशकों में कोई चोरी की घटना नहीं हुई। कोई भी आपराधिक घटना नहीं हुई तथा न ही ग्रामीणों में किसी भी प्रकार के विवाद का मामला दर्ज है। मन्दिर में रुपयों की बोरियां भरी पड़ी है किन्तु किसी की नजर तक उधर नहीं जाती। एक बार कुछ लोग चोरी की नियत से मन्दिर में घुस गए थे किन्तु वे मन्दिर में चिपक गए। बाद में पुलिस को बुलाया गया तथा पुजारी ने पूजा की तब वे वहाँ से बाहर निकले।

शराबमुक्त शाकाहारी ग्राम
लोगों ने बताया कि सभी ग्रामवासी पूर्णतः शाकाहारी हैं तथा कोई भी शराब का सेवन नहीं करता। ग्राम में शराब की कोई दुकान नहीं है। मन्दिर में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर आ जाता है तो वह पागल हो जाता है।

केरोसिन तेल पर पूर्ण प्रतिबंध
लोग मिट्टी का चूल्हा या गैस जलाते हैं किन्तु स्टोव का उपयोग नहीं करते हैं। बिजली नहीं होने पर लालटेन नहीं जलाते। इसके स्थान पर वे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं।

नहीं बैठता दूल्हा घोड़ी पर
ऐसी मान्यता है कि विवाह में दूल्हे को घोड़ी पर बिठाने से हादसे होते हैं। अतः किसी भी दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बिठाया जाता है।

देव नारायण जी के सम्मान में झुक गई सारी चट्टानें
लोगों ने बताया कि अन्याय एवं अत्याचारों के खिलाफ संकल्पित
भगवान देवनारायण जी ने जब देह त्यागी तब उनके सम्मान में इस ग्राम की सभी चट्टानों के सभी पत्थर नमन अवस्था में झुक गए। आज भी झुके हुए पत्थर इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इतना ही नहीं ग्राम से कोई भी पत्थर उठाकर बाहर नहीं ले जा सकता।

भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को लगता है विशाल मेला
भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को विशाल मेले का आयोजन होता है जिसमें पूरे देश से लाखों की संख्या में लोग भाग लेते हैं।

आग्रह
राजस्थान के लोक देवताओं एवं राजस्थान के बारे में विस्तार से जानने के लिए देखते रहें श्री डूंगरगढ़ टाइम्स पोर्टल, फेसबुक पेज एवं पढ़ते रहें श्री डूंगरगढ़ टाइम्स समाचार पत्र।