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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 जुलाई 2025। श्रीडूंगरगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष सहित संचालक बोर्ड का निर्वाचन के माध्यम से गठन वर्ष 2013 में हुआ था एवं तभी से यहां क्षेत्र के ऐसे नेताओं का राज रहा है जो भाजपा के विरोधी खेमे में माने जाते रहे है। हालांकि पांच साल के कार्यकाल के बाद वर्ष 2018 एवं वर्ष 2023 में में पुन: चुनाव होने थे लेकिन अभी तक चुनाव नहीं हो पाए व भाजपा राज आने के बाद भी क्रय विक्रय सहकारी समिति का संचालक मंडल वही रहा जो वर्ष 2013 में निर्वाचित हुआ था। ऐसे में अब भाजपा राज में इसके खिलाफ उठी शिकायतों के आधार पर जांच कमेटी गठित की गई। जांच के आधार पर सहकारी समितियों के अतिरिक्त रजिस्ट्रार ने गत 10 जून को आदेश निकाल कर श्रीडूंगरगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति के बोर्ड को भंग कर दिया था और आगामी संचालक मंडल के निर्वाचित होने तक केन्द्रीय सहकारी बैंक बीकानेर के प्रबंध निदेशक को प्रशासक नियुक्त कर दिया। इसके बाद शुरू हुए सिस्टम का जोर सत्ता पर भारी पड़ा एवं निवर्तमान अध्यक्ष तुलछीराम गोदारा ने उन्हें हटाने के आदेश के एक माह के भीतर ही राजस्थान हाई कोर्ट से स्टे ले लिया है। हाईकोर्ट ने सरकार को चुनाव करवाने के लिए स्वतंत्र रखते हुए आगामी चुनाव होने तक गत चुनाव में निर्वाचित अध्यक्ष एवं संचालक मंडल को यथावत रखने के आदेश दिए है।
लोकतंत्र की हो रही हत्या, न्यायालय का आभार – गोदारा
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्रय विक्रय सहकारी समिति के गत चुनावों में निर्वाचित अध्यक्ष तुलछीराम गोदारा इस प्रकरण में वर्तमान सत्ता को आड़े हाथ लेते हुए जम कर आरोप लगा रहे है। गोदारा ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा सत्ता के अहंकार से लोकतंत्र की हत्या की जा रही थी, सहकारी समिति में अध्यक्ष को हटाने का अधिकार समिति सदस्यों के पास है एवं अगर सरकार हटाना चाहे तो चुनाव करवा दे। जिससे नए निर्वाचन में पुन: जिसे चुना जाएगा वह पुराने को अपने आप ही हटा देगा। लेकिन सत्ता चुनावों के बजाय केवल समिति पर नियंत्रण चाहती है एवं इस कारण ही प्रशासक लगाने के आदेश जारी किए गए। यह आदेश भी जानबूझ कर 10 जून को निकाले गए, जबकि सबको पता है कि जून में हाईकोर्ट में अवकाश चल रहें होते है। इसके साथ ही हाईकोर्ट में कैवियट लगाना भी सत्ता के मंसूबो को जाहिर कर रहा है। लेकिन हम न्यायालय का आभार जताते है कि न्याय देकर हुए लोकतंत्र की रक्षा की है।
यह है मामला।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पूरे राज्य के सहकारी समितियों के चुनावों के साथ ही श्रीडूंगरगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति के चुनाव 3 जुलाई 2013 को हुए थे। जिसमें कामरेड मोहन भादू, गोपाल भादू एवं नत्थूनाथ मंडा को संचालक मंडल सदस्य चुना गया था। साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियों में से निर्वाचित सदस्य के रूप में उदरासर से तुलछीराम गोदारा, बरजांगसर से माणकचंद, आडसर से मोडाराम तर्ड, रीड़ी से सुमित्रा, लिखमीसर से रामेश्वरलाल एवं मोमासर से मालाराम चुने गए थे। इनमें से तुलछीराम गोदारा को समिति अध्यक्ष चुना गया। इनका कार्यकाल तो 2 जुलाई 2018 को समाप्त हो गया था लेकिन चुनाव नहीं हो पाया। इसके बाद वर्ष 2023 में सरकारी ने चुनाव की कवायद तो शुरू की थी और निर्वाचन कार्यक्रम 27 मार्च 2023 को घोषित भी कर दिया गया। इस निर्वाचन कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित मतदाता सूची जारी की गई और इस संबंध में सदस्यों से आक्षेप प्राप्त किए गए। आक्षेपों के निस्तारण के उपरांत दिनांक 2 अप्रैल 2025 को अंतिम मतदाता सूची सोसायटी कार्यालय के बोर्ड पर चस्पा की गई, जिसमें ‘अ’ श्रेणी का एक भी सदस्य नहीं था एवं ‘ब’ श्रेणी के 669 सदस्यों को शामिल किया गया। इस संबध में तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी ने 3 अप्रैल को पत्र देकर राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण से मार्गदर्शन भी मांगा था लेकिन 5 अप्रैल तक मार्गदर्शन प्राप्त नहीं होने पर चुनाव नहीं करवाया जा सका। इसके बाद से ही लगातार समिति विवादों में चल रही है एवं संचालक मंडल में भी आपसी मतभेद कई बार खुल कर सामने आ चुके है। ऐसे में की गई जांच में भी संचालक मंडल के आपसी मतभेदों के कारण समिति को नुकसान होने की बात प्रमाणित मानी गई एवं अध्यक्ष को हटाते हुए प्रशासक की नियुक्ति की गई।
सरकारी खरीद में महत्वपूर्ण है सहकारी समिति।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में होने वाली मूंगफली, चना, सरसों, मूंग सहित सभी फसलों की सरकारी सर्मथन मुल्य पर खरीद में स्थानीय खरीद एंजेसी श्रीडूंगरगढ़ क्रय विक्रय सहकारी समिति ही होती है एवं इस कारण इस समिति के अध्यक्ष एवं संचालक मंडल का प्रभाव आम किसानों में काफी ज्यादा पड़ता है। यही कारण है कि सहकारी समिति होने के बाद भी इस समिति में राजनैतिक हस्तक्षेप हमेशा से ही रहता है।