Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
000000000000
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 जून 2025। सुप्रीम कोर्ट ने प्रॉपर्टी से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी जमीन या मकान पर सिर्फ कब्जा कर लेने से उसका मालिक नहीं बना जा सकता। अगर कोई व्यक्ति किसी प्रॉपर्टी को खरीदता है, तो जब तक उसकी सेल डीड (बिक्री का कागज) रजिस्ट्री ऑफिस में पंजीकृत नहीं हो जाती, तब तक उसे कानूनी रूप से मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ ज़मीन या मकान पर कब्जा लेने से उसका मालिकाना हक नहीं मिलता। जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा है कि किसी भी अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री तभी वैध मानी जाएगी जब वह रजिस्टर्ड सेल डीड यानी पंजीकृत बिक्री दस्तावेज़ के जरिए की गई हो। कोर्ट ने बताया कि 1882 के ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के सेक्शन 54 के अनुसार, अगर संपत्ति की कीमत 100 रुपये या उससे ज्यादा है, तो उसका ट्रांसफर बिना रजिस्ट्री के मान्य नहीं होगा। मतलब ये कि चाहे आपने प्रॉपर्टी के पैसे दे दिए हों और कब्जा भी ले लिया हो, तब भी आप कानूनी मालिक तब तक नहीं माने जाएंगे जब तक कि रजिस्टर्ड सेल डीड नहीं बन जाती। फैसला उस केस में आया जहां एक व्यक्ति ने नीलामी में संपत्ति खरीदी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि प्रॉपर्टी का असली हकदार वही होगा जिसकी बिक्री विलेख रजिस्टर्ड होगी। इस फैसले से प्रॉपर्टी डीलर और बिचौलियों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अब वे सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी या वसीयत के जरिए प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकेंगे। अब मालिकाना हक तभी मिलेगा जब बिक्री की रजिस्ट्री कानूनी तरीके से हो सकेगा। एडवोकेट अनिल धायल ने बताया कि इसका प्रावधान पहले से है, लेकिन लागु नहीं हो रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में फैसला देकर इसके लागु करने को आवश्यक कर दिया है।