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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 2 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।

भावों का उल्टा-पकता गणित, एक ओर गोलमाल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के चुनावों में इस बार चारों ओर मामला गोल-माल ही प्रतीत हो रहा है। यहां सभी प्रत्याशी एक दूसरे से अधिक ताकत दिखाने के लिए अपना पूरजोर प्रयास कर रहे है। मंगलवार को क्षेत्र में दो अलग-अलग रोड शो होने के बाद बुधवार को तीसरे मुख्य प्रत्याशी द्वारा भी रोड शो हुआ। रोड शो से पहले 23 को देवउठनी एकादशी का सावा होने के कारण उम्मीद से कम सर्मथकों के पहुंचने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन प्रत्याशी और उनके कार्यकर्ताओं का यह जबरदस्त मैनेजमेंट रहा कि सावे के बावजूद जबरदस्त भीड़ रोड शो में पहुंची। भीड़ को देख कर प्रत्याशी, सर्मथक, कार्यकर्ता सभी उत्साहित एवं खुश भी नजर आए लेकिन शेयर मार्केट से भी ज्यादा दगाबाज सट्टा मार्केट में भावों का गणित उल्टा-पलटा होने से सभी हैरानी व परेशानी में भी है। यहां भीड़ के मामले में गोल-माल होने के बाद यह भावों का एक ओर गोल-माल सामने आ गया है। यहां भारी भीड़ एकत्र करने वाले एक प्रत्याशी के भाव ओर बढ़ा दिए गए है व सट्टा मार्केट उन्हें जीत से दूर मान रहा है। वहीं सर्मथकों, कार्यकर्ताओं की हैरानी परेशानी के बीच बात यह गूंज रही है कि जीत तो पहले 7 रुपए के भावों में भी मिल गई थी तो अभी तो भाव 2.5 रुपए ही है। इतिहास का यह ज्ञान मरहम तो दे रही है लेकिन चर्चाएं तो चर्चाएं है रूकती ही नहीं।

लाली तेरे लाल की, जित देखूं तित लाल, चुनाव का रंग लाल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के चुनाव में इस बार लाल रंग की खासी धूम मची है। यहां जाट, मेघवाल और मुस्लिम वोट दो प्रत्याशियों की नींव तय करेगें। ऐसे में दोनो ही किसान कौम के प्रत्याशी अन्य वोटों को प्रभावित कर चुनाव जीतने की रणनीति के प्रयासों में जुटे है। बेस वोटर दोनों के एक ही है और अब तो दोनो के सर्मथकों की नारेबाजी में रंग भी एक ही हो गया है। पहले प्रत्याशी के नारों में तो लाल-लाल लहरा रहा और प्रत्याशी जयुपर जा रहा है। वहीं दूसरे प्रत्याशी के नारो में प्रत्याशी जयपुर जा रहा है और लाल बत्ती(मंत्री पद) लेकर आ रहा है। दोनों ही नारों में आत्मविश्वास जबरदस्त दिख रहा है। पहले प्रत्याशी के सर्मथकों का नारा जहां उनकी जीत के लिए विश्वास दिखा रहा है वहीं दूसरे प्रत्याशी का नारा तो जीतने से ओर आगे बढ़ कर मंत्री बनने तक के लिए विश्वास दिखा रहा है। किसी ने ठीक ही कहा है कि हालात भले ही कैसे भी हो जंग के मैदान में दुश्मन को अपना आत्मविश्वास कमजोर नहीं दिखना चाहिए। अपने सर्मथकों को आत्मविश्वास से भरने के लिए इस बार यह नारे खासे जुबान पर चढ़ रहे है।

तू डाल-डाल, मैं पात-पात।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। तु डाल-डाल, मैं पात-पात यह कहावत तो सभी ने सुनी ही है और आजकल इस डाल-डाल, पात-पात का यह संघर्ष श्रीडूंगरगढ़ चुनाव में देखा जा रहा है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे वोट भी है जो किसी से अधिक नाराज या कहीं कोई किसी के अधिज सर्मथक नहीं है, यही वो वोटर है जो पहले नाराज थे लेकिन अब नाराजगी पुरानी होने के कारण कम हो गई है। सही मायने में देखा जाए तो हार जीत को तय करने वाले ये वोटर साबित हो सकते है। ऐसे में सभी दलों के नेता इन घरों में पहुंच रहे है। स्थिति यह है कि इन वोटरों के घरों में रात को एक गुट के नेता पहुंच कर अपने पक्ष में करने का प्रयास करते है तो उनके निकलते ही दूसरा पक्ष भी वहीं पहुंच रहा है। यह देख चर्चा यह जोर खा गई कि नेताओं की इंटेलीजेंस कितनी जबरदस्त है और पूरे अंचल में काम कर रही है।