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October 17, 2026
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क्षेत्र के भविष्य की खेती, किसानी के लिए विशेष रिपोर्ट, बचाएं भूजल, क्योंकि जल है तो हमारा कल है। विडियो प्ले करने के निशान पर क्लिक कर देखें विशेष विडियो रिपोर्ट।

आंकडों को समझें और भविष्य बचाने के प्रयास में शामिल हों क्षेत्र के किसान।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 दिसंबर 2022। केंद्रीय भूजल बोर्ड के ताजा आंकड़ो के अनुसार बीकानेर संभाग में पाताल का पानी पेंदे बैठ गया है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ की जीवनरेखा व यहां स्थित सभी उद्योग धंधो की नींव का एकमात्र स्त्रोत भूजल ही है। पानी के अत्यधिक दोहन का अधिकांश भाग खेती में होता है। मूंगफली, चना उत्पादन में अग्रणी है लगातार भूजल दोहन से रीत रही धरती गोद चिंताजनक बन रही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाने की जिम्मेदारी भी वर्तमान पीढ़ी के कंधो पर है।
श्रीडूंगरगढ़ में धरती की गोद में घटता जलस्तर।
श्रीडूंगरगढ टाइम्स। बरसाती पानी के रिस्टोर के प्रयास आंकडो में भले ही हो परंतु जमीनी स्तर पर पानी कम ही हो रहा है। श्रीडूंगरगढ अंचल में धरती की गोद में जलस्तर लगातार घट रहा है। 336 ट्यूबवैल है और सभी में पानी नीचे जा रहा है और कुओं की गहराई बढ़ने के साथ ही पानी निकलने में कमी आ रही है। क्षेत्र के गांव कोटासर में 25 मीटर जलस्तर गहरा हो गया है। गांव कुनपालसर सोनियासर के बासों में, राजेडु में 18 मीटर गहराई बढ गई है वहीं गांव हेमासर में 17 व बरजांगसर में 16, समदंसर में 15 मीटर कुओं की गहराई बढ़ गई है। वहीं कुओं से पानी निकलने की मात्रा में सालासर में 45 लीटर प्रति मिनिट की कमी आई है वहीं बींझासर में 42 और देराजसर, गुसाईंसर बडा, इंदपालसर, नारसीसर में 40 लीटर प्रति मिनिट पानी कम निकल रहा है।

गांव आडसर में 8 कोण के खेत मे नंदलाल ने लगवाया मिनी फव्वारा, अपनाया नवाचार।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने के लिए किसान नन्दलाल लुखा ने कदम बढ़ाया है। उन्होंने 8 कोण के अपने खेत में मिनी फुव्वारा पद्धति अपनाने की चुनौती स्वीकार की और सफलता पूर्वक लगवा कर इसे संचालित कर रहें है। लुखा इससे प्रसन्न है और अन्य किसानों को भी मिनी फुव्वारा अपनाने की प्रेरणा दे रहें है।
80 से 85 प्रतिशत पानी की बचत, लाइनें बदलने से मिलेगा छुटकारा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नंदलाल लुखा ने बताया कि इस पद्धति से पानी की बचत हो रही है और सर्दी की ठंडी रातों में पाइप लाइनें बदलने से मुक्ति मिल गयी है। उन्होंने बताया कि इससे कोई अन्य कामगार रखने की आवश्यकता भी नहीं पड़ रही है। कृषि एक्सपर्ट सुरेंद्र मारू ने बताया कि मिनी फुव्वारा तकनीक से 80 से 85 प्रतिशत पानी की बचत होती है तथा 70 प्रतिशत राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है। महिला व एससी एसटी वर्ग के किसान को 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने कहा कम होते जलस्तर में किसानों के लिए ये बेहतरीन उपाय हो सकता है।