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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 नवंबर 2022। गुजरात विधानसभा के चुनाव में इस बार भाजपा – कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं होगा, आम आदमी पार्टी ने मैदान में उतर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया। वहीं अब डेढ़ दर्जन से अधिक छोटे दलों के आ जाने से चुनावी गणित रोचक बन गई है। ओवैसी के मैदान में आने के बाद तो सब कुछ उलट – पुलट हो गया है। जिसके कारण ही इस चुनाव को लेकर अब तक हुए सर्वे पर भी सवालिया निशान लग गया है।
पिछले गुजरात चुनाव में कांग्रेस से भाजपा की सीधी टक्कर थी। कांटे का मुकाबला था और पलड़ा कांग्रेस का भारी लगता था। मगर गैर राजनीतिक मान्यता प्राप्त छोटे दल उतर गए और कांग्रेस का पूरा गणित बिगाड़ दिया। भाजपा उस चुनाव में केवल 99 सीट ही जीत पाई। उसमें में 15 से अधिक वो सीटें थी जिस पर कांग्रेस को मात्र 500 से 1500 वोटों के बीच हार मिली थी। इससे अधिक वोट छोटी पार्टियों ने लिए थे। पहली बार उस चुनाव में भाजपा की सीटों की संख्या तीन अंकों में नहीं पहुंची थी। तब आम आदमी पार्टी ने तो बहुत कम सीटों पर चुनाव लड़ा था।
इस बार तो काफी पहले से ही आम आदमी पार्टी मैदान में उतर गई है। वो इस चुनाव में सभी सीट पर लड़ रही है और उसने अपना कैम्पेन भी काफी पहले आरम्भ कर दिया। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, राघव चड्ढा आदि ने गुजरात मे डेरा डाल रखा है। आप इस बार चुनाव में कांग्रेस को नुकसान पहुंचायेगी। जाहिर है, भाजपा के विरोध के वोट पर ही उसकी नजर है। मगर ग्राउंड के हालात बताते हैं कि ये दिख रहा जैसा सही राजनीतिक समीकरण नहीं है। आप के उम्मीदवार कांग्रेस के साथ साथ भाजपा के भी वोट बैंक में भी सेंध लगा रहे हैं। अब तो ये साफ दिखने लग गया है कि आप भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों का नुकसान कर रही है। चुनावी गणित इसी कारण गड़बड़ा रहा है।
अचानक से गुजरात चुनाव में ओवैसी की एंट्री हुई है। गुजरात जाते समय उन पर पथराव की घटना भी हुई है और वो धुंआधार प्रचार में उतरे हैं। यहां ओवैसी ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतार रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस को कच्छ व मध्य गुजरात मे काफी सीट मिली थी, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक वोटर है। यहीं ओवैसी ज्यादा ताकत लगा रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस व आप को होगा और फायदा भाजपा को ही मिलेगा। ये चुनावी भंवर में फंसी भाजपा के लिए बड़ी राहत है।
बिहार के गोपालगंज का चुनावी फार्मूला यहां लागू करने की तैयारी है। गोपालगंज में ओवैसी ने अपना उम्मीदवार उतारा था। जिसे 12500 से अधिक वोट मिले। उसके कारण ही आरजेडी प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में 2000 से भी कम वोटों से हार गई। उसी फार्मूले के आधार पर गुजरात की भी मुस्लिम बहुल सीटों पर काम हो रहा है। अब देखना ये है कि ओवैसी कितना असर कर पाते हैं। मगर ये तय है कि वे जितने भी वोट लेंगे, नुकसान कांग्रेस व उसके बाद आप का होगा। भाजपा को तो इससे लाभ ही मिलेगा। कांग्रेस ओवैसी के मामले में बंगाल का उदाहरण दे रही है, वहां उनका असर नहीं हुआ और टीएमसी जीत गयी। मगर ये यक्ष प्रश्न है कि गुजरात मे भी वैसा होगा क्या?
मगर छोटे छोटे बड़ी संख्या के दल मिलकर भी भाजपा को अपरोक्ष रूप से फायदा ही देंगे। क्योंकि उनको मिलने वाले मत भाजपा विरोध के ही होंगे, ये तो तय है।
मगर भाजपा के लिए चिंता की बात आदिवासी पार्टी है। ट्राइबल वोट पर अब तक भाजपा की मजबूत पकड़ रही है मगर इस बार इनकी पार्टी भी मैदान में है और ट्राइबल बहुल सीट पर वो अपने उम्मीदवार उतार रही है। उससे नीतीश कुमार का समझौता भी हुआ है। नीतीश उनके लिए प्रचार भी करेंगे। ये भाजपा का सीधा नुकसान है। इस नुकसान की भरपाई ओवैसी की पार्टी को मिलने वाले वोटों से होगी, ये अभी स्पष्ट नहीं है। मगर ट्राइबल पार्टी और नीतीश ने भाजपा की मुश्किलें जरूर बढ़ा दी है।
छोटे गैर राजनीतिक मान्यता वाले दलों, ट्राइबल पार्टी व नीतीश, आप के इस बार मैदान में आने का असर भाजपा व कांग्रेस पर पूरा पड़ रहा है, इसी कारण गुजरात मे रोचक चुनावी समीकरण बने है। भाजपा व कांग्रेस में से जो दल वोट कटवा पार्टियों से अपने को बचा लेगा, वही फायदे में रहेगा। फिलहाल तो गुजरात मे रोचक राजनीतिक समीकरण बने हुए हैं और मुकाबला रोचक है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार