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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 अक्टूबर 2023। क्षेत्र के गांव सूडसर में एक डेढ साल की बछिया के टूटे पैर को जोड़कर ठीक कर देने का मामला सामने आया है। पशु सेवा में भी इसे क्षेत्र में एक नया कदम माना जा रहा है। गांव सूडसर के ही निवासी माणकचंद के घर करीब एक माह पहले खुंटे से उछलकर बछिया गिर गई और उसने कई बार खड़े होने का प्रयास किया परंतु खड़ी नहीं हो पाई। परिजनों ने पशुचिकित्सक डॉ सुभाष घारू से बात की और घारू ने उनके घर पहुंच कर बछिया का निरीक्षण किया। वेटेरिनरी सर्जरी एंड रेडियोलोजी में पीजी और पीएचडी प्राप्त डॉ घारू ने पिछले बाएं पैर की टिबिया हड्डी में ओबलिक फ्रेक्चर बताया। ग्राीमणों ने कहा कि बीकानेर के वेटनरी कॉलेज में बंधवाने व खुलवाने जाना होगा। डॉ घारू ने बताया कि पशुओं में भी प्लास्टर बांधे जाते है और एक डेढ माह तक खराब नहीं होता तो पशु की हड्डियां जुड़ भी जाती है। इस दौरान पशु की विशेष देखभाल करनी होती है। यदि गोबर या मूत्र द्वारा प्लास्टर गीला हो जाए तो प्लास्टर ढीला पड़ जाता है और हड्डी जुड़ नहीं पाती है। परिजनों ने पूरा ध्यान रखने का आश्वासन देकर डॉ॰ घारु से ईलाज प्रारंभ करने की बता कही। इस पर घारू ने निवार का ट्रेक्सन और काउंटर ट्रेक्सन लगाया और टिबिया हड्डी के फ्रेक्चर को हाथ से सही अप्रोच में करके प्लास्टर ऑफ पेरिस की सहायता से पक्का पट्टा बांधा। उन्होंने दो से तीन दिन तक दर्दनिवारक दवा दी तथा केल्शियम युक्त मिनरल मिक्सचर देने को कहा। माणकचंद ने बताया कि 8-10 दिन बाद बछिया स्वयं अपने पैरो पर पट्टे सहित चलने लगी। परिजनों ने भी दो समय मालिश की और बछिया का पूरा ध्यान रखा जिससे पट्टा ढीला भी नहीं हुआ। बुधवार शाम को डॉ घारू ने पट्टा खोला तो बछिया की टिबिया की हड्डी जुड़ चुकी थी। परिवार जनों ने डॉ घारू का आभार जताया।

प्रथम श्रेणी अस्पताल, जरूरत है एक्स-रे मशीन की, एक दर्जन गांवो को मिलेगी राहत। 

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डॉ॰ सुभाष घारु ने टाइम्स को बताया कि अब इस क्षेत्र में प्रथम श्रेणी का पशुचिकित्सालय सूडसर में बन चुका है। यदि एक एक्स-रे मशीन इस अस्पताल को मिल जाए तो ये सूडसर सहित गांव दुलचासर, देराजसर, गोपालसर, टेऊ, सूडसर, शेरुणा, पुनरासर, लखासर, कोटासर, बेनीसर, संवतसर, बादनु, लिखमीसर, राजेडू, नारसीसर तक के पशुओं के लिए राहत का कार्य हो सकेगा। उन्होंने बताया कि चूंकि बड़े पशुओं के फ्रेक्चर का यदि पूरी तरह से ईलाज नहीं हो पाता है तो पशु का पैर काटना पड़ता है या पशु की मौत भी हो जाती है। एक मशीन मिलने से पशुओं को इलाज़ भी मिलेगा और बार-बार बीकानेर जाने आने में लगने वाला धन व समय भी पशुपालकों का बच पाएगा। डॉ घारू ने बताया कि हालांकि सरकार को आवेदन भेज दिया गया है और किसी दानदाताओं से भी आग्रह किया गया है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डॉ घारू ने बांधा बछिया को पक्का प्लास्टर पट्टा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बुधवार शाम को प्लास्टर खोला तो पाया बछिया की हड्डी जुड़ चुकी है, पशुपालक परिवार ने जताया आभार।