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October 16, 2026
26jan
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लगता है देश को अभी से अगले लोकसभा चुनाव के मूड में लाया जा रहा है, इसी कारण हर दल राजनीति की चादर ओढ़ अपनी अपनी चाल चल रहा है। आम आदमी को कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिल रहा है। खाद्य पदार्थों, पेट्रोलियम पदार्थों, सब्जी आदि की महंगाई पर तो राजनीति के कारण ध्यान ही नहीं जा रहा है।
सबसे पहले बात कुमार विश्वास, केजरीवाल और पंजाब में सरकार आने से उत्साह में आई आम आदमी पार्टी की। आप अभी तक दिल्ली की ही सरकार में थी, जहां उसके अधीन पुलिस नहीं। वो केंद्र सरकार के अधीन है। इसी वजह से आप और केजरीवाल की राजनीति पूरी तरह आम आदमी के सामने नहीं आ पाई थी। अब पंजाब में भी आप की सरकार आ गई, जो पूर्ण राज्य है। बस, केजरीवाल के सोच को उसने सामने ला दिया।
अब तक भाजपा पर आरोप था कि वो विरोधियों पर कार्यवाही करती है। खुद केजरीवाल भी यही आरोप भाजपा पर लगाते थे। मगर पंजाब में सरकार बनते ही सब कुछ बदला हुआ नजर आया। एक दिन अचानक पंजाब पुलिस दिल्ली पहुंची और कभी आप के साथी और पार्टी बनाने वाले देश के पॉपुलर कवि कुमार विश्वास तथा कांग्रेस प्रवक्ता जो पहले आप में थी अलका लांबा, उनके घर पहुंची। उनके चुनाव के दौरान दिए बयानों पर केश दर्ज हुआ और नोटिस दिए गए। आपराधिक मुकदमें इन दोनों पर दर्ज हुए हैं। इससे देश की राजनीति गर्मा गयी है।
कुमार विश्वास और अलका लांबा, पहले केजरीवाल के साथी थे। साथ रहे आप को बनाने में मगर बाद में अलग हो गये। कुमार विश्वास तो किसी दल में नहीं गये मगर केजरीवाल पर हमलावर रहे। अलका लांबा कांग्रेस में गई और केजरीवाल पर हमलावर हो गई। अब उनको फरवरी में दिए अपने बयानों पर पंजाब पुलिस का सामना करना पड़ रहा है। जिस पर केजरीवाल मौन है मगर विपक्षी इसे बदले की कार्यवाही बता रहे हैं। कुछ तो बात है राजनीति की इस मामले में, नहीं तो आप के पुराने नेताओं को ही केवल निशाने पर नहीं लिया जाता। क्या केजरीवाल भी उसी राह पर है, जिस राह के लिए वे खुद भाजपा की आलोचना करते थे। आप और केजरीवाल की इस राजनीति से आप के आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी की धमक मिल रही है, राजनीतिक विश्लेषक तो यही मान रहे है। आने वाला समय इस बात को ज्यादा स्पष्ट करेगा।
दूसरी चर्चा पीके की है। उन्होंने कांग्रेस में प्राण फूंकने के लिए एक रोड मैप सोनिया गांधी के सामने रखा है। जिसे मिशन 370 का नाम दिया जा रहा है। लगातार हार झेल रही कांग्रेस में ये हलचल भी बड़ी राजनीति का परिचायक है। अब बात ये बड़ी है कि पीके पार्टी में शामिल होंगे या नहीं, बात ये बड़ी हो गई है। पीके के पावर प्रजेंटेशन पर सोनिया पार्टी नेताओं से चर्चा कर रही है।
पीके के बाद कांग्रेस में ये चर्चा आम हो गयी है कि अब युवा नेताओं को फ्रंट पर लाया जायेगा। पंजाब में पार्टी प्रमुख बदलने के निर्णय से इसकी पुष्टि होती है।
राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी इस दौर में चर्चा मिली है। अशोक गहलोत के बाद सोनिया ने उनसे अकेले में अलग से चर्चा की, राजनीति इससे गर्मा गयी। सोनिया से मुलाक़ात के बाद प्रेस के पूछने पर उन्होंने कांग्रेस में बदलाव के जो संकेत दिए, उससे राजनीति में उबाल आ गया है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की सूरत में आने वाले दिनों में बड़ा चेंज होगा, ये तय है। क्योंकि कांग्रेस के पास खोने को अब कुछ भी नहीं है। ये तैयारी भी अगले आम चुनाव की तैयारी का संकेत है।
कुल मिलाकर देश अब जैसे अगले आम चुनाव के मोड पर आ गया, ये ही लग रहा है। अब बात राजनीति की, निर्णय राजनीति के, आम आदमी उसके मध्य अपने को गायब सा महसूस कर रहा है। वो वोटर ही है ना, उससे क्या पूछना।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार