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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 जून 2026। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रति सम्मान दर्शाते हुए बड़ी टिप्पणी करते हुए देश की आधी आबादी यानी मातृ शक्ति के लिए कहा है की महिलाएं होम मेकर नहीं, राष्ट्र निर्माता हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि गृहिणी का काम सिर्फ खाना बनाना या घर संभालना नहीं है। उन्हें “होममेकर”नहीं बल्कि “नेशन बिल्डर”कहा जाना चाहिए।
गृहिणी यानी वो महिलाएं जो अपने पूरे घर का कामकाज संभालती हैं. जिनके लिए ‘होममेकर शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि घर को बनाने और संभालने में उनकी अहम भूमिका होती है। कई बार लोग ऐसी महिलाओं को कामकाजी महिलाओं के मुकाबले कमतर समझते हैं, क्योंकि वे कमाती नहीं हैं और घर के कामकाज के बदले उन्हें कोई सैलरी नहीं मिलती। इसी वजह से किसी हादसे में होममेकर महिला की मौत के बाद मुआवजा तय करना मुश्किल हो जाता है। क्योंकि आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु पर मुआवजा उसकी उम्र और आय के आधार पर तय किया जाता है। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना केस में फैसला देते हुए महिलाओं के घर में किये जा रहे श्रम की कीमत ₹30 हजार महीना मानते हुए पति को 62 लाख का मुआवजा देने का गृहिणियों को लेकर एक अहम फैसला दिया है।
जानिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की 3 बड़ी बातें:-
1. होममेकर’ नहीं ‘नेशन बिल्डर’: अदालत ने कहा कि महिलाओं का काम सिर्फ खाना पकाना या घर संभालना नहीं है, वे परिवार की नींव मजबूत करती हैं और भावी पीढ़ी का निर्माण करती हैं।
2. मुआवजे का नया आधार: यदि किसी सड़क हादसे में गृहिणी की मौत या चोट होती है, तो उन्हें केवल “बेरोजगार” मानकर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता। उनके घरेलू श्रम और देखभाल के नुकसान को भी मुआवजा तय करने का अलग आधार माना जाएगा।
3. आर्थिक मूल्यांकन: कोर्ट ने घरेलू सेवाओं का आर्थिक महत्व बताते हुए मुआवजे के निर्धारण के लिए अनुमानित मासिक योगदान ₹30,000 तय किया है।
“देश की आधी आबादी को ध्यान में रखते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया ये फैसला आने वाले समय में एक्सीडेंट के मुकदमो में बड़ी नजीर बनेगा और फैसले के दौरान महिलाओं को सिर्फ गृहणी ही नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माता बताने वाली टिप्पणी ही अपने आप में ऐतिहासिक हो जाती है, जो महिलाओं के प्रति बड़ा सम्मान पैदा करती है”
एडवोकेट अनिल धायल (96608 01700)
विधि सेतु लीगल कंसल्टेंसी, श्रीडूंगरगढ़