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October 17, 2026
25-march
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 मार्च 2026। आज का पंचांग, देखें दिन भर का शुभ-अशुभ समय।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 25 – Mar – 2026
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि सप्तमी 01:52 PM
🔅 नक्षत्र मृगशिरा 05:34 PM
🔅 करण :
वणिज 01:52 PM
विष्टि 01:52 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग सौभाग्य +03:08 AM
🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:32 AM
🔅 चन्द्रोदय 11:03 AM
🔅 चन्द्र राशि मिथुन
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 06:47 PM
🔅 चन्द्रास्त +01:51 AM
🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:14 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित कोई नहीं
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:15 PM – 01:04 PM
🔅 कंटक 05:09 PM – 05:58 PM
🔅 यमघण्ट 08:59 AM – 09:48 AM
🔅 राहु काल 12:40 PM – 02:12 PM
🔅 कुलिक 12:15 PM – 01:04 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 07:21 AM – 08:10 AM
🔅 यमगण्ड 08:04 AM – 09:36 AM
🔅 गुलिक काल 11:08 AM – 12:40 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅लाभ 06:32:58 – 08:04:49
🔅अमृत 08:04:49 – 09:36:39
🔅काल 09:36:39 – 11:08:30
🔅शुभ 11:08:30 – 12:40:20
🔅रोग 12:40:20 – 14:12:11
🔅उद्वेग 14:12:11 – 15:44:01
🔅चल 15:44:01 – 17:15:52
🔅लाभ 17:15:52 – 18:47:42
🔅उद्वेग 18:47:42 – 20:15:43
🔅शुभ 20:15:43 – 21:43:44
🔅अमृत 21:43:44 – 23:11:45
🔅चल 23:11:45 – 24:39:46
🔅रोग 24:39:46 – 26:07:47
🔅काल 26:07:47 – 27:35:48
🔅लाभ 27:35:48 – 29:03:49
🔅उद्वेग 29:03:49 – 30:31:50

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:07 AM समाप्त: 07:32 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 07:32 AM समाप्त: 09:08 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:08 AM समाप्त: 11:04 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:04 AM समाप्त: 01:19 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 01:19 PM समाप्त: 03:39 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:39 PM समाप्त: 05:56 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:56 PM समाप्त: 08:13 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 08:13 PM समाप्त: 10:32 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:32 PM समाप्त: अगले दिन 00:51 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:51 AM समाप्त: अगले दिन 02:55 AM

🔅 मकर चर
शुरू: अगले दिन 02:55 AM समाप्त: अगले दिन 04:38 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:38 AM समाप्त: अगले दिन 06:07 AM

🌼 आप सभी को नवरात्री के सातवें दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कालरात्रि

नवरात्रि के सातवें दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा- आराधना की जाती है। काल रात्रि का अर्थ है अँधेरी रात, माता काल रात्रि का स्वरूप माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों में क्रोध का रूप है ।

मां के माता कालरात्रि के स्वरूप की पूजा करने से सभी तरह के पापो, शत्रुओं, नकारात्मक शक्तियों और काल का नाश होता है। माता कालरात्रि अपने भक्तो की काल से भी रक्षा करने वाली शक्ति है, इनकी पूजा से अकाल मृत्यु का भी भी समाप्त होता है ।

मां का रूप अत्यंत भयानक है एवं बाल सभी दिशाओं में बिखरे हुए हैं। मां कालरात्रि के तीन नेत्र हैं, इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है और ये गर्दभ की सवारी करती हैं।

माँ काल रात्रि की चार भुजाएं है । माँ के ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है जो भक्तों को निर्भय रहने का आशीर्वाद देता है अर्थात माँ कालरात्रि के भक्तो की समस्त संकटो से रक्षा होती है।

वहीँ बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है ।

माता काल रात्रि के गले में बिजली से चमकती हुई विधुत की माला सुशोभित रहती है ।

माँ काल रात्रि को लाल गुड़हल का पुष्प अत्यंत प्रिय है, माँ को गुड़हल के पुष्प की माला अर्पित करनी चाहिए । मां को गुड का भोग अर्पित करके पूजा के बाद सबको गुड का प्रसाद वितरित करना चाहिए ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री