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October 17, 2026
24-march
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 मार्च 2026।🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 24 – Mar – 2026
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि षष्ठी 04:10 PM
🔅 नक्षत्र रोहिणी 07:05 PM
🔅 करण :
तैतिल 04:10 PM
गर 04:10 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग :
प्रीति 09:06 AM
आयुष्मान 09:06 AM
🔅 वार मंगलवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:34 AM
🔅 चन्द्रोदय 10:03 AM
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 06:47 PM
🔅 चन्द्रास्त +00:48 AM
🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:13 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:16:12 – 13:05:05
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 09:00 AM – 09:49 AM
🔅 कंटक 07:22 AM – 08:11 AM
🔅 यमघण्ट 10:38 AM – 11:27 AM
🔅 राहु काल 03:43 PM – 05:15 PM
🔅 कुलिक 01:53 PM – 02:42 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 09:00 AM – 09:49 AM
🔅 यमगण्ड 09:37 AM – 11:09 AM
🔅 गुलिक काल 12:40 PM – 02:12 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅रोग 06:34:07 – 08:05:44
🔅उद्वेग 08:05:44 – 09:37:23
🔅चल 09:37:23 – 11:09:00
🔅लाभ 11:09:00 – 12:40:38
🔅अमृत 12:40:38 – 14:12:16
🔅काल 14:12:16 – 15:43:54
🔅शुभ 15:43:54 – 17:15:32
🔅रोग 17:15:32 – 18:47:10
🔅काल 18:47:10 – 20:15:24
🔅लाभ 20:15:24 – 21:43:37
🔅उद्वेग 21:43:37 – 23:11:51
🔅शुभ 23:11:51 – 24:40:04
🔅अमृत 24:40:04 – 26:08:18
🔅चल 26:08:18 – 27:36:31
🔅रोग 27:36:31 – 29:04:45
🔅काल 29:04:45 – 30:32:58

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:11 AM समाप्त: 07:36 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 07:36 AM समाप्त: 09:12 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:12 AM समाप्त: 11:08 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:08 AM समाप्त: 01:23 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 01:23 PM समाप्त: 03:43 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:43 PM समाप्त: 06:00 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:00 PM समाप्त: 08:16 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 08:16 PM समाप्त: 10:36 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:36 PM समाप्त: अगले दिन 00:54 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:54 AM समाप्त: अगले दिन 02:59 AM

🔅 मकर चर
शुरू: अगले दिन 02:59 AM समाप्त: अगले दिन 04:42 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:42 AM समाप्त: अगले दिन 06:11 AM

🌼 आप सभी को नवरात्री के छठे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ कात्यायनी

नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित है। मां कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में जानी जाती हैं।

मां कात्यायनी ने महिषासुर नाम के असुर का वध किया था, जिस कारण मां कात्यायनी को असुरों और पापियों का संहार करने वाली देवी कहा जाता है। इनकी सवारी सिंह है।

मां कात्यायनी की चार भुजा हैं इनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल तथा अन्य दोनों हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा है।

माता कात्यायनी की पूजा से विवाह में हो रही बाधाएं दूर होती है, देवगुरु बृहस्पति प्रसन्न होते हैं और कन्याओं को अच्छा मिलने के योग बनते हैं, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बनता है।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने माता कात्यायनी की पूजा की थी।

मां कात्यायनी की पूजा माता को लाल या पीले फूल, कच्‍ची हल्‍दी की गांठ एवं चांदी के या मिटटी के पात्र में शहद अर्पित करके, शहद का भोग लगाकर शाम को गोधुलि बेला में करनी चाहिए।

नवरात्रि के छठवें दिन अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए गोबर के कंडे जलाकर माँ कात्यायनी के मंत्रो का जाप करते हुए उस पर लौंग व कपूर की आहुति दें।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री