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October 16, 2026
25-july
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 जुलाई 2026।🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 25-Jul-2026
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि एकादशी 11:36 AM
🔅 नक्षत्र ज्येष्ठा पूर्ण रात्रि
🔅 करण विष्टि, बव 11:36 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग ब्रह्म 09:08 PM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:52 AM
🔅 चन्द्रोदय 04:26 PM
🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक
🔅 चन्द्र वास उत्तर
🔅 सूर्यास्त 07:28 PM
🔅 चन्द्रास्त 02:34 AM
🔅 ऋतु वर्षा
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 काली सम्वत 5127
🔅 दिन काल 13:36:24
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत आषाढ
🔅 मास पूर्णिमांत आषाढ
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:13 PM 01:07 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 05:52 AM 06:46 AM
🔅 कंटक 12:13 PM 01:07 PM
🔅 यमघण्ट 03:50 PM 04:45 PM
🔅 राहु काल 09:16 AM 10:58 AM
🔅 कुलिक 06:46 AM 07:40 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 02:01 PM 02:56 PM
🔅 यमगण्ड 02:22 PM 04:04 PM
🔅 गुलिक काल 05:52 AM 07:34 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅 काल 05:52 AM – 07:34 AM
🔅 शुभ 07:34 AM – 09:16 AM
🔅 रोग 09:16 AM – 10:58 AM
🔅 उद्वेग 10:58 AM – 12:40 PM
🔅 चल 12:40 PM – 02:22 PM
🔅 लाभ 02:22 PM – 04:04 PM
🔅 अमृत 04:04 PM – 05:46 PM
🔅 काल 05:46 PM – 07:28 PM
🔅 लाभ 07:28 PM – 08:46 PM
🔅 उद्वेग 08:46 PM – 10:04 PM
🔅 शुभ 10:04 PM – 11:22 PM
🔅 अमृत 11:22 PM – 00:40 AM
🔅 चल 00:40 AM – 01:58 AM
🔅 रोग 01:58 AM – 03:16 AM
🔅 काल 03:16 AM – 04:34 AM
🔅 लाभ 04:34 AM – 05:52 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कर्क चर
शुरू: 05:18 AM समाप्त: 07:38 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 07:38 AM समाप्त: 09:55 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 09:55 AM समाप्त: 12:12 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 12:12 PM समाप्त: 02:31 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 02:31 PM समाप्त: 04:50 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 04:50 PM समाप्त: 06:54 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 06:54 PM समाप्त: 08:37 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 08:37 PM समाप्त: 10:05 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:05 PM समाप्त: 11:31 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 11:31 PM समाप्त: 01:07 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 01:07 AM समाप्त: 03:03 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:03 AM समाप्त: 05:18 AM

🌼 देवशयनी एकादशी का महत्व 🌼

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी, हरिशयनी एकादशी या पद्मा एकादशी कहा जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान श्रीविष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होता है, जो चार माह तक चलता है और कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को भगवान पुनः जागृत होते हैं।

देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व इस प्रकार है—

* इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा, व्रत, जप एवं दान करने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है।
* चातुर्मास के आरंभ के कारण इस अवधि में साधु-संत एक स्थान पर निवास कर अधिकाधिक साधना, स्वाध्याय और सत्संग करते हैं।
* इस दिन से विवाह, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य सामान्यतः स्थगित कर दिए जाते हैं और देवउठनी एकादशी के बाद पुनः आरंभ होते हैं।
* भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसीदल, पंचामृत एवं खीर का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
* इस दिन व्रत रखने, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने तथा “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने से सुख, समृद्धि और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शास्त्रों का संदेश है—

“एकादशी व्रतों में देवशयनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायिनी है। यह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है तथा भगवान विष्णु की भक्ति को दृढ़ करती है।”

क्या होता है चातुर्मास ?

चातुर्मास हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र चार माह का काल है। इसकी शुरुआत आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से होती है और समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी/प्रबोधिनी एकादशी) पर होता है। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान श्रीविष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए इस समय विशेष रूप से साधना, संयम और धर्माचरण का महत्व बढ़ जाता है।

चातुर्मास का मुख्य उद्देश्य

चातुर्मास का उद्देश्य केवल कुछ कार्यों का निषेध नहीं, बल्कि आत्मसंयम, भक्ति, तप, जप, स्वाध्याय और सात्त्विक जीवन का अभ्यास है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति और आत्मशुद्धि के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
चातुर्मास में क्या करना चाहिए?

* प्रतिदिन भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, शिव तथा तुलसी का पूजन।
* “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा विष्णु सहस्रनाम का जप।
* गीता, श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस आदि का नियमित पाठ एवं श्रवण।
* एकादशी व्रत का पालन तथा यथाशक्ति अन्य व्रत।
* दान-पुण्य, गौसेवा, ब्राह्मण सेवा और जरूरतमंदों की सहायता।
* सात्त्विक भोजन, इन्द्रिय-संयम और सदाचार का पालन।
* अपनी क्षमता के अनुसार कोई एक त्याग का नियम लेना (जैसे किसी विशेष खाद्य पदार्थ का त्याग या किसी बुरी आदत का त्याग)।
*
चातुर्मास में किन कार्यों से बचना चाहिए?

* विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत (उपनयन) जैसे मांगलिक संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते। (कुछ परंपराओं में विशेष अपवाद हो सकते हैं।)
* अत्यधिक तामसिक भोजन, मद्यपान, मांसाहार और नशे से दूर रहें।
* असत्य, क्रोध, हिंसा, चुगली और अनैतिक आचरण से बचें।
* बिना आवश्यकता लंबी यात्राओं से बचने का उल्लेख भी कई परंपराओं में मिलता है, क्योंकि प्राचीन काल में वर्षा ऋतु में भ्रमण कठिन होता था।
*
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री