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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 अगस्त 2025। पश्चिमी राजस्थान का पहला आधुनिक गुरुकुल जिसमें राजस्थान बोर्ड की नवीन शिक्षण पद्धति से संचालित होने के साथ वैदिक संस्कारों के पोषक केंद्र के रूप में आर्यस्थली गुरूकुल अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। गुरूकुल में अंग्रेजी व हिंदी माध्यम में पढ़ाई के साथ गुरूकुलीय पद्धति और सनातन संस्कार भी विद्यार्थियों को दिए जा रहें है। क्षेत्र के गांव बेनीसर के नेशनल हाइवे से उत्तर दिशा में बस स्टैंड के सामने की ओर एक खेत छोड़कर 14 बीघा के खुले परिसर के मध्य स्थित आर्यस्थली गुरूकुल का परिसर पूर्ण रूप से हरा भरा, खुला और शांत वातावरण में स्थित है। यहां विद्यार्थी आवासीय गुरुकुल एवं स्कूली शिक्षा, दोनों प्रकार से अध्ययन कर रहें है। गुरूकुल के संस्थापक अमित आर्य ने बताया कि आवासीय छात्रावास के विद्यार्थियों की दिनचर्या प्रात: 4 बजे ब्रह्ममुहुर्त में प्रारंभ होती है। विद्यार्थी योग आसन, प्राणायाम, परंपरागत खेलों के साथ ध्यान का अभ्यास करते है। इसी के साथ नित्य यज्ञ, संध्या एवं वैदिक ग्रंथो के स्वाध्याय के माध्यम से विद्यार्थियों का आध्यात्मिक विकास किया भी जा रहा है। रात्रि 10 बजे तक बच्चे गुरूकुलीय दिनचर्या का पालन करते है। गुरूकुल में सुपाच्य व सात्विक भोजन परोसा जाता है एवं सरकारी नौकरियों के लिए जीके व फिजिकल की तैयारी भी करवाई जा रही है। बालकों के लिए अनुशासन युक्त एवं सुरक्षित वातावरण में ये सारी सुविधाएं अत्यंत सामान्य शुल्क पर उपलब्ध करवाई जा रही है। आर्य ने बताया कि जो अभिभावक चाहते है कि बच्चे संस्कारवान हो, आज्ञाकारी हो, विवेकशील हो और धर्म व संस्कृति को जानने वाले हो तो वे अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुरुकुल में अवश्य प्रवेश दिलावें। उन्होंने कहा कि बच्चों के बिगड़ने के मुख्य कारण मोबाइल, गलत संगती और दूषित माहौल से बच्चे को दूर करके, देश व धर्म की सेवा हेतु चरित्रवान, ज्ञानवान, विवेकशील, विद्वान और बलवान मनुष्यों के निर्माण का प्रयास इस गुरुकुल के द्वारा किया जा रहा है। बच्चे हमारी परंपराओं को जाने, गौरवशाली इतिहास, सामाजिक सभ्यता एवं संस्कार को सिखने वाले बने। आचार्य ने बताया कि विद्यालय व आवासीय गुरूकुल में प्रवेश प्रारंभ है और अभिभावक विद्यालय व गुरूकुल परिसर का अवलोकन भी अवश्य करें। जिससे वे बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकें।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पूर्णत: शांत, सुरक्षित व प्राकृतिक माहौल में बच्चों में आधुनिक शिक्षण के साथ परंपरागत संस्कारों की नींव को मजबूत किया जा रहा है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गुरूकुल में नित्य हवन पूजन व विशेष अवसरों पर पूरा विद्यालय हवन में भागीदारी निभाता है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गुरूकुल के बच्चे योग, आसन व प्राणायाम का प्रतिदिन अभ्यास करते है।