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October 16, 2026
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किसान आंदोलन के समय लखीमपुर खीरी में किसानों के कुचले जाने की घटना ने जहां आंदोलन को तेज किया वहीं केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया था। यूपी में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं तो सरकार इस घटना को सामान्य में नहीं ले सकती थी। विपक्ष ने भी एकजुट होकर इस मसले पर हमला बोला था। क्योंकि इस कांड से केंद्र के गृह राज्यमंत्री और उनके पुत्र का नाम जुड़ा था।
किसान भी अपने साथियों की मौत से आक्रोश में थे। समझौता तुरंत हुआ। मुआवजा घोषित हुआ। मामले की एफआईआर दर्ज हुई। माननीय न्यायालय ने प्रसंज्ञान लिया और एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए।
जांच के चलने की अवधि में किसान आंदोलन मांगे माने जाने पर समाप्त हुआ। केंद्र सरकार ने अपने बनाये कृषि कानून वापस लिए। किसानों की अन्य मांगे भी मानी। राजनीति चरम पर थी। यूपी और पंजाब विधान सभा चुनावों के चलते निर्णयों में जल्दी हुई।
मगर एसआईटी की तीन दिन पहले आई रिपोर्ट ने एक बार फिर से लखीमपुर खीरी कांड को राजनीति के केंद्र में ला दिया है। एसआईटी ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे को दोषी माना। बस, फिर क्या था। लखीमपुर खीरी कांड फिर से जीवित हो गया।
विपक्ष ने संसद में मसला उठाया। राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षियों ने लोक सभा मे केंद्रीय मंत्री की बर्खास्तगी को लेकर स्थगन प्रस्ताव दिए, मगर वे सब प्रस्ताव खारिज कर दिए गए। तर्क ये था कि मामला न्यायालय में है। लिहाजा विपक्ष ने लोक सभा में शोरगुल किया, कार्यवाही स्थगित हो गई। ये ही स्थिति राज्य सभा में रही।
विपक्ष भी यूपी चुनाव को देखते हुए इस मुद्दे को नरम नहीं पड़ने देना चाहता, उसने अब लखीमपुर खीरी के कांड को संसद के बाद सड़क पर भी उठा लिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री फिर निशाने पर आ गये।
इसी बीच खुद मंत्री पत्रकारों से उलझ गये। उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वाइरल हो रहा है। जाहिर है ध्येय राजनीतिक है। मुद्दे को जिंदा रख विपक्ष केंद्र सरकार को निशाने पर लाने का प्रयास कर रहा है।
किसान आंदोलन समाप्त हो गया मगर लखीमपुर खीरी कांड पर एसआईटी की आयी जांच रिपोर्ट ने एक बार फिर किसान को केंद्र में ला दिया है जो भाजपा के लिए बड़ा संकट बन गयी है। लखीमपुर खीरी कांड यूपी चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता साफ दिख रहा है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार