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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 अक्टूबर 2020।🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

🌻शनिवार,10 अक्टूबर 2020🌻

सूर्योदय: 🌄 06:38
सूर्यास्त: 🌅 18:09
चन्द्रोदय: 🌝 24:12
चन्द्रास्त: 🌜13:48
अयन 🌕 दक्षिणायन
ऋतु: ❄️ शरद
शक सम्वत: 👉 1942
विक्रम सम्वत: 👉 2077
मास 👉 आश्विन (अधिक)
पक्ष 👉 कृष्ण
तिथि👉 अष्टमी 18:16 तक
नक्षत्र 👉 पुनर्वसु 01:18 तक
योग 👉 शिव 00:30 तक
करण 👉 कौलव 18:16 तक
तैतिल 06:11 तक
सूर्य 🌟 कन्या
चंद्र 🌟 मिथुन 19:10 तक
अभिजित मुहूर्त 👉 12:00-12:45
राहुकाल 👉 09:31-10:57
दिशाशूल 👉 पूर्व
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – काल =06:38-08:04
२ – शुभ =08:04-09:31
३ – रोग =09:31-10:57
४ – उद्वेग =10:57-12:23
५ – चर =12:23-01:50
६ – लाभ =01:50-03:16
७ – अमृत =03:16-04:42
८ – काल =04:42-06:09

॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – लाभ =06:09-07:42
२ – उद्वेग =07:42-09:16
३ – शुभ =09:16-10:50
४ – अमृत =10:50-12:24
५ – चर =12:24-01:57
६ – रोग =01:57-03:31
७ – काल =03:31-05:05
८ – लाभ =05:05-06:39

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शुभ यात्रा दिशा
🚌🚈🚗⛵🛫
उत्तर-पश्चिम (वाय विन्डिंग अथवा तिल मिश्रित चावल का सेवन कर यात्रा करें)
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• शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
• शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
• शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढ़ने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
• शनि देव “पिप्लाद ऋषि” के नाम का जाप करने वाले को कभी भी पीड़ा नहीं देते है । शिव का अवतार और महर्षि दधीचि के पुत्र पिप्लाद ऋषि पीपल वृक्ष के नीचे अवतरित हुए थे, स्वयं ब्रह्मा ने ही शिव के इस अवतार का नामकरण किया था।
• पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
(पंडित विष्णुदत्त शास्त्री)