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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 जुलाई 2024। भारतीय न्याय सहिंता में महिलाओं कि स्थिति समाज में मजबूत करने कि दिशा में अनेक कदम उठाए गए है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को अलग-अलग श्रेणी में बांटने का काम किया गया है। आज के लेख में आप जानेंगे कि महिला के विवाह से सबंधित अपराध कौनसे है? और इन अपराधों के घटित होने पर महिला को न्याय देने के लिए क्या प्रावधान किए गए है? युवा वकील अनिल धायल के साथ।
दहेज की मांग और क्रूरता:-
भारतीय न्याय सहिंता ने दहेज़ कि मांग को महिला के खिलाफ क्रूरता कि श्रेणी में रखा गया है। धारा 86 में परिभाषा बताते हुए कहा गया है कि किसी पुरुष, महिला के पति या उसके रिस्तेदारों द्वारा जानबूझकर किसी महिला से किसी प्रकार कि सम्पत्ति, मूल्यवान वस्तु या कोई प्रतिभूती या कोई विधि विरुद्ध मांग को पूरा करने कि मांग की जाती है या उस मांग के पूरा ना होने पर तंग परेशान किया जाता है या उस महिला का जीवन खतरे में डाला जाता है। जो चाहे यातना देकर (मानसिक और शारीरिक ) या आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए। इस तरह के अपराध महिला के खिलाफ क्रूरता मे रखें गए है। इस तरह के अपराध मे तीन वर्ष तक कारावास व जुर्माने का प्रवधान किया गया है।
दहेज़ मृत्यु:- भारतीय न्याय अधिनियम कि धारा 80 में यह कहा गया है कि किसी महिला कि मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कि जाती है या उसके विवाह के सात वर्ष के अंदर उसकी असामान्य मौत हो जाती है और यह ज्ञात होता है कि मृत्यु के कुछ समय पूर्व महिला के पति या रिश्तेदारों ने उसके साथ किसी तरह कि क्रूरता कि थी या उसे तंग किया था तो ऐसी दशा मे उस महिला कि मौत को “दहेज़ मृत्यु” कहा जाएगा।
सजा:- दहेज़ मृत्यु करने वाले को कम से कम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक कि सजा हो सकेगी।
धोखेबाजी से विवाह का विश्वास उत्पन्न कर सेक्सुएल रिलेशन बनाना:-
कोई पुरुष जो किसी महिला से विधिपूर्वक विवाहित नहीं है परन्तु धोखेबाजी करके किसी महिला को विश्वास दिलाता है कि वो दोनों विवाहित है और इस विश्वास के बल पर सेक्सुएल रिलेशन स्थापित करता है तो उसे 10 वर्ष तक के कारावास व जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।
पति या पत्नी के जीवनकाल में पुन: विवाह करना:-
जब कोई पति या पत्नी के जीवित होते हुए विधिपूर्वक अलग (तलाक या विवाह विच्छेद) हुए बिना दूसरा विवाह कर लेता है तो ऐसा विवाह अवैध या शून्य माना जाएगा। क्योंकि ये उसके पहले पति या पत्नी के जीवित होते हुए किया गया है। साथ ही अगर पति या पत्नी कोई भी निरंतर 7 वर्षों तक अनुपस्थित रहा हो और यह पता नहीं हो कि वह जिन्दा है या नहीं तो ऐसी स्थिति मे दूसरा पक्ष विवाह कर सकेगा।
सजा:- ऐसी स्थिति में सात वर्ष तक कारावास व जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। वहीं अगर कोई व्यक्ति अपने पहले विवाह कि बात छीपा कर कहीं दूसरी जगह विवाह कर लेता है तो उसे दस वर्ष तक कि सजा हो सकेगी।
कपटपूर्ण विवाह:-
जो कोई बेईमानी से या कपट करके यह जानते हुए विवाह करेगा कि उसका विवाह विधिपूर्ण नहीं हुआ है और विवाहित कर्म पूरा करेगा तब उसे सात वर्ष तक कि सजा व जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।
विवाहित महिला को फुसलाकार ले जाना:-
कोई महिला जो किसी अन्य पुरुष कि पत्नी है जानते हुए भी कोई व्यक्ति जानबूझकर उस महिला को बहला फुसलाकार ले जाता है और उस महिला को छुपा कर रखता है या बंधक बना कर रखता है और सेक्सुएल रिलेशन स्थापित करता है तो उसे दो वर्ष तक के कारावास व जुर्माने कि सजा हो सकेगी।