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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 जून 2026। नगरपालिका में स्थायी ईओ नियुक्त करने की मांग करते हुए क्षेत्र के सामाजिक संगठन ने लोगों के मानवाधिकार हनन की बात कहते हुए प्रकरण की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।
नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ में गत करीब एक साल से अधिशाषी अधिकारी (ईओ) और तहसीलदार जैसे दो महत्वपूर्ण पदों का दायित्व एक ही अधिकारी के पास होने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता शूरवीर मोदी ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन को विस्तृत शिकायत भेजकर इसे आमजन के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। पूछता है श्रीडूंगरगढ़ के बैनर तले शिकायत में आरोप लगाया गया है, कि नगरपालिका और तहसील के कार्यों का भार एक ही अधिकारी पर होने के कारण क्षेत्र की हजारों की आबादी को रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जन्म-मृत्यु पंजीकरण, विवाह पंजीकरण, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, भवन निर्माण स्वीकृति, कॉलोनियों के विकास, सड़क निर्माण, अग्निशमन सेवाओं तथा बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान में आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में कहा है कि तहसीलदार के रूप में राजस्व एवं भूमि पंजीकरण से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी एक ही अधिकारी के पास होने से अक्सर अधिकारी बैठकों, वीडियो कॉन्फ्रेंस, न्यायालयीन कार्यवाही, जिला स्तरीय बैठकों एवं प्रशासनिक दायित्वों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में नगरपालिका से जुड़े कार्य प्रभावित होते हैं और आम नागरिकों को कार्यालयों के बीच भटकना पड़ता है। शिकायतकर्ता ने इसे नागरिक सुविधाओं के अधिकार और सुशासन के अधिकार से जुड़ा विषय बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सर्वे और जांच करवाने की मांग की है। मोदी ने कहा कि इस अवधि में सरकारी वाहनों, संसाधनों एवं सार्वजनिक धन के उपयोग की जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस विषय को लेकर पूर्व में जिला प्रशासन और राज्य सरकार को भी कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकला। ऐसे में उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप कर आमजन को राहत दिलाने की मांग की है।