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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 दिसम्बर 2023। आज के स्वास्थ्य समाचार को बच्चो को जरूर पढ़ाये ताकि बच सकें जंक फूड ओर चिप्स-कुरकुरे के दुष्परिणामों से। घर में बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते हैं कि बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए, यह सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. लेकिन हम आज की पीढ़ी बड़े बुजुर्गों की कहां सुनते हैं. हमें तो जब डॉक्टर, शोधकर्ता और वैज्ञानिक कहते हैं तब हमें समझ आता है. तो अब इस बात की गांठ बांध लें कि हमारे बड़े-बुजुर्ग ठीक ही कहते हैं, क्योंकि अब अध्ययन में भी ये बात साबित हो चुकी है कि बर्गर-चिप्स जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ सेहत के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक होते हैं। ब्रिटेन में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने बताया कि चिप्स, बर्गर और पैकेज्ड कुकीज या बिस्किट जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का नियमित तौर पर 400-500 कैलोरी से ज्यादा सेवन करने से हमारी याददाश्त पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इससे हमारी याददाश्त कमजोर होने के साथ ही याददाश्त जा भी सकती है.

8 साल तक किया गया शोध

8 साल तक किए गए इस शोध में 10,775 महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया. इस अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों ने बर्गर-पिज्जा जैसे अल्ट्रा प्रोसेस्डड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन किया, उनकी याददाश्त कमजोर होने की दर कम अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों की तुलना में 28 प्रतिशत तक ज्यादा थी. यानी जो लोग अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करते उनकी याददाश्त ज्यादा बेहतर थी.

भारत में हालात गंभीर, लेकिन ब्रिटेन-अमेरिका में चिंताजनक

भारत में युवा पीढ़ी के लोग ऐसे अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करती है और उन पर यह खतरा ज्यादा है. वहीं ‘जामा न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित इस शोध ने अमेरिका और ब्रिटेन को लेकर चिंता जाहिर की है. शोध के अनुसार इन दोनों देशों में प्रोसेस्ड पदार्थों का सेवन अधिक हो रहा है. बड़ी बात यह है कि अमेरिका और ब्रिटेन में लोगों के दैनिक आहार का 50 फीसद तक हिस्सा अल्ट्रा प्रोसेस्ड होता है, जो चिंता का विषय है. ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में पोषण व खाद्य विज्ञान के प्रोफेसर गुंटर कुन्हले ने इसे मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी जटिल और चिंताजनक बताया.

इन वजहों से भी याददाश्त कमजोर होती है

संतुलित भोजन न करने की वजह से तो याददाश्त कमजोर हो ही रही है. इसके अलावा कई अन्य वजहें भी हैं, जिनके कारण लोगों की याददाश्त कमजोर हो रही है. इसमें व्यायाम की कमी, शराब और धूम्रपान का अधिक सेवन करना, हृदय और पाचन संबंधी बीमारियां भी शामिल हैं। आज पूरी दुनिया के सामने अच्छे स्वास्थ्य और पोषक आहार दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि एक समय भूख बड़ी समस्या थी, लेकिन आज मोटापा, भूख से भी ज्यादा बड़ी समस्या बन गया है. अधित चीनी, नमक और फैट वाले भोजन के कारण न सिर्फ मोटापा बढ़ रहा है, बल्कि हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ रहे हैं. चिंताजनक यह है कि इससे मरने वालों की संख्या में भी अच्छा-खासा इजाफा हुआ है.

3 अरब लोगों को नहीं मिलता पोषक आहार

ग्लोबल पैनल ऑन एग्रीकल्चर एंड फूड सिस्टम्स न्यूट्रिशन, पोषण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक स्वतंत्र समूह है. इस समूह की हाल में जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार भारत जैसे जिन विकासशील देशों में प्रोसेस्ड फूड्स का चलन तेजी से बढ़ा है, वहां आने वाले वर्षों में मोटापे का खतरा भी तेजी से बढ़ सकता है. वहीं दुनियाभर में करीब तीन अरब लोग ऐसे हैं, जिन्हें पोषक आहार नहीं मिलता. इसके कारण उन्हें उचित पोषण नहीं मिल पाता है.

स्वस्थ भोजन किसे कहें, क्या खाएं

ऐसे में कई लोगों के सामने प्रश्न होता है कि स्वस्थ भोजन किसे कहा जाए, क्या खाएं? अगर आप अपनी सेहत का ध्यान रखते हैं तो आपको सब्जियां, फल, दालें, मेवे, मोटे अनाज, डेयरी उत्पाद और ताजा रोटी खाने की सलाह दी जाती है.