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October 16, 2026
10-oct
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 नवम्बर 2023,🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 01 – Nov – 2023
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि चतुर्थी 09:21 PM
🔅 नक्षत्र मृगशिरा +04:36 AM
🔅 करण :
बव 09:21 AM
बालव 09:21 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग परिघ 02:05 PM
🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:44 AM
🔅 चन्द्रोदय 08:30 PM
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 सूर्यास्त 05:49 PM
🔅 चन्द्रास्त 10:16 AM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1945 शोभकृत
🔅 कलि सम्वत 5125
🔅 दिन काल 11:05 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2080
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित कोई नहीं
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 11:55 AM – 12:39 PM
🔅 कंटक 04:21 PM – 05:05 PM
🔅 यमघण्ट 08:57 AM – 09:42 AM
🔅 राहु काल 12:17 PM – 01:40 PM
🔅 कुलिक 11:55 AM – 12:39 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 07:29 AM – 08:13 AM
🔅 यमगण्ड 08:08 AM – 09:31 AM
🔅 गुलिक काल 10:54 AM – 12:17 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅लाभ 06:44:52 – 08:08:00
🔅अमृत 08:08:00 – 09:31:08
🔅काल 09:31:08 – 10:54:16
🔅शुभ 10:54:16 – 12:17:24
🔅रोग 12:17:24 – 13:40:32
🔅उद्वेग 13:40:32 – 15:03:40
🔅चल 15:03:40 – 16:26:48
🔅लाभ 16:26:48 – 17:49:55
🔅उद्वेग 17:49:55 – 19:26:53
🔅शुभ 19:26:53 – 21:03:50
🔅अमृत 21:03:50 – 22:40:48
🔅चल 22:40:48 – 24:17:45
🔅रोग 24:17:45 – 25:54:42
🔅काल 25:54:42 – 27:31:40
🔅लाभ 27:31:40 – 29:08:37
🔅उद्वेग 29:08:37 – 30:45:35

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 तुला चर
शुरू: 05:42 AM समाप्त: 08:01 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:01 AM समाप्त: 10:20 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:20 AM समाप्त: 12:25 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 12:25 PM समाप्त: 02:08 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:08 PM समाप्त: 03:36 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:36 PM समाप्त: 05:02 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 05:02 PM समाप्त: 06:38 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:38 PM समाप्त: 08:34 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:34 PM समाप्त: 10:49 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 10:49 PM समाप्त: अगले दिन 01:09 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:09 AM समाप्त: अगले दिन 03:26 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:26 AM समाप्त: अगले दिन 05:42 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

* बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

🌄 करवा चौथ 🌄

सनातन धर्म में करवा चौथ का बहुत बड़ा महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम के समय पूजा के बाद चंद्रमा को जल देकर व्रत पारण करती हैं। करवा चौथ का व्रत बहुत कठिन माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक उपवास रखती हैं और व्रत में पति की लंबी उम्र की कामना करती है ताकि पति-पत्नी का साथ जन्मों-जन्मों तक बना रहें। यह पर्व पति-पत्नी के अटूट रिश्ते की मिसाल है। कहा जाता है कि करवा चौथ का व्रत रखकर करवा माता की विधि-विधान से पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में सभी समस्याओं से छुटकारा मिलता है और जीवन सुखमय रहता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत महाभारत के समय से हुई थी। मान्यता है कि सबसे पहले श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने पांडवों के प्राण की रक्षा के लिए इस व्रत को किया था। यह भी कहा जाता है कि, द्रौपदी के व्रत रखने के कारण ही पांडवों की जान बच पाई थी इसलिए कहा जाता है कि, हर सुहागिन महिला को अपने पति की लंबी उम्र और उनकी रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए।
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से शुरू हो जाता है और फिर पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है।
पूजा के लिए सोलह श्रृंगार करके तैयार हों जाए और दीवार पर करवा माता का चित्र बनाएं या बाजार से बना बनाया खरीद कर लगाएं ।
चावल के आटे में हल्दी मिलाकर जमीन पर चित्र बनाएं। जमीन में बने इस चित्र के ऊपर करवा रखें और इसके ऊपर घी का जलता हुआ दीपक रखें।
करवा में आप 21 या 11 सींकें लगाएं और करवा के भीतर खील बताशे , साबुत अनाज इनमें से कुछ भी डालें।
इसके बाद भोग के लिए आटे की बनी पूड़ियां, मीठा हलवा, खीर आदि रखें।
करवा के साथ आप सुहाग की सामग्री भी अवश्य चढ़ाएं। यदि आप सुहाग की सामग्री चढ़ा रही हैं तो सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। करवा के पूजन के साथ एक लोटे में जल भी रखें इससे चन्द्रमा को जल दिया जाता है।
पूजा करते समय करवा चौथ की व्रत कथा जरूर सुने ।
चांद निकलने के बाद छलनी से पति को देखें फिर चांद के दर्शन करें। चन्द्रमा को जल से अर्घ्य दें और पति की लंबी उम्र की कामना करें।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026