Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
00
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 जनवरी 2022। केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून लेने की एकतरफा घोषणा कर एक साल के किसान आंदोलन को खत्म करने का प्रयास किया। मगर किसान उस समय भी एमएसपी गारंटी कानून, किसानों के मुकदमें वापस लेने, शहीद किसानों को मुआवजा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर अड़े रहे। तब सरकार ने एक समिति के गठन की घोषणा कर बात बनाई। किसान थोड़े नरम हुए और आंदोलन स्थगित किया, समाप्त नहीं किया। जाहिर है, उनके मन में अनेक आशंकाएं थी।
रविवार को हरियाणा के कितलाना में सर्वजातीय महापंचायत हुई और किसानों ने फिर से मोर्चे पर आने की बात कह दी। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकेत ने इस महापंचायत में बोलते हुए कहा कि हमारा आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ, क्योंकि सरकार की नीयत ठीक नहीं। उन्होंने 26 जनवरी को पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकालने की भी घोषणा कर दी। जो केंद्र सरकार के लिए परेशानी का सबब है।
किसानों का कहना है कि एमएसपी के लिए अभी तक कमेटी नहीं बनी और न ही किसानों पर हुए सभी मुकदमें वापस हुए हैं। सरकार पर इस महापंचायत में फिर से किसानों की ज़मीन पर नजर होने का आरोप लगाया गया।
किसान नेताओं ने किसानों पर एक और प्रहार होने की बात भी यहां उठाई। उनका आरोप था कि अब सरकार भूमिहीन किसानों यानी पशु पालकों पर प्रहार करेगी। 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक हो रही है, यदि उससे पहले केंद्र सरकार ने मांगों पर सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया तो किसान फिर संघर्ष को उतर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए यूपी सहित पांच राज्यों के चुनाव में फिर से संकट खड़ा हो जायेगा। उस संकट से बचने के लिए ही तो सरकार ने कृषि कानूनों पर यूटर्न लिया था। कल की किसानों की महापंचायत भाजपा के लिए अलार्म है, किसान अभी तक संतुष्ट नहीं है। वो भाजपा के लिए चुनावी परेशानी खड़ी करेगा ही। किसानों की कल की 26 को देश भर में ट्रैक्टर मार्च की घोषणा किसानों के तीखे तेवर का संकेत है। केंद्र सरकार ने यदि उससे पहले बीच का रास्ता नहीं निकाला तो राजनीतिक परेशानी आना स्वाभाविक है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार