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October 16, 2026
श्रीडूंगरगढ़ की प्रेम कहानी, निभाया सात फेरों का बंधन, दरकते रिश्तों की पीड़ा के काल में जरूर पढ़ें ये स्नेहसिक्त खबर।
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 मार्च 2021। सतयुग की सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से छुड़ा लाई थी ये कहानी आप सभी को याद होगी। आज बताते है कोरोना के इस कठिन काल में जब रिश्ते अर्थ की कसौटी पर कसे जा रहें है तब निर्मल प्रेम से सिक्त सात फेरों का बंधन निभाने वाली हमारे क्षेत्र की फुलादेवी की कहानी राहत देने वाली है। गांव दुसारणा बड़ा की वधू और इंदपालसर बड़ा की बेटी फुलादेवी ने महिला सम्मान में एक पृष्ठ ओर जोड़ दिया है। बता देवें कोरोना के लॉकडाउन के बाद से ही समाज में दरकते रिश्तों व बढ़ रहें अपराधों से समाज चिंतकों की चिंताए बढ़ गई है और ऐसे में ये खबर आपको सुकुन देने वाली होगी। दुसारणा बड़ा की 24 वर्षीय फुलादेवी ने अपने 25 वर्षीय पति प्रभुराम पंवार को अपनी एक किडनी देकर उन्हें जीवनदान दिया है। क्षेत्र में आज फुलादेवी की ही चर्चा चारों ओर हो रही है और नागरिक उनके सम्मान में सर झुका रहें है। दुसारणा के प्रभुराम दस भाई बहनों में आठ बड़ी बहनों के छोटे भाई है और कुछ समय पूर्व किडनी की बीमारी से उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई थी। परिवार ने बीकानेर के बाद जयपुर में ईलाज करवाया परन्तु डॉक्टरों ने नई किडनी लगाने के अलावा कोई चारा नहीं बताया तो परिजन परेशान हो गए। माता पिता की उम्र अधिक होने के कारण वे अपने बेटे को किडनी देने में असर्मथ पाएं गए। प्रभु का इकलौता छोटा भाई जगदीश कम उम्र होने के कारण मदद करने में असमर्थ था। ऐसी घड़ी में प्रभु की पत्नी व एक पुत्र की माता फुलादेवी ने अपने पति को एक किडनी देने की बात कही। डॉक्टर्स ने उनकी कम उम्र को देखते हुए मना किया परन्तु वे सात फेरों के बंधन को निभाने के लिए अड़ी रही। सरकारी डॉक्टर्स की टीम ने उनकी कांउसलिंग की और पीहर के परिवार को भी बुलाया गया। परन्तु फुलादेवी अपनी बात पर अड़ी रही। फुला ने टाइम्स को बताया कि प्रभु ने या किसी परिजन ने मुझे ऐसा करने को नहीं कहा। मैं अपने बेटे को उसके पिता के साथ बड़ा होते हुए देखना चाहती हूं। डॉक्टर्स ने उनकी ईच्छा का सम्मान करते हुए जयपुर के मोनीलेक अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के एचओडी डॉ. विजय बेनीवाल ने भी फुलादेवी के जज्बे को नमन करते हुए कहा कि फुला ऐसी नारी शक्ति है जो अपने पति के लिए मौत भी लड़ने को तैयार थी। बेनीवाल ने बताया कि अभी दोनों स्वस्थ है और उम्मीद है कि शीघ्र ही सामान्य जीवन जी सकेंगे। बता देवें फुला के पिता और जीजाजी रेड़ा निवासी बीरबलराम सहित परिजनों ने ऑपरेशन का भारी भरकम खर्चा उठाने में भी मिलजुल कर सहयोग दिया है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। फुलादेवी ने अपने पति प्रभुराम पंवार से निभाया सात फेरों का बंधन। आज क्षेत्र में सर्वाधिक चर्चा में है ये सच्ची प्रेम कहानी।