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October 16, 2026
16-dec
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 16 दिसंबर 2025।श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 16-Dec-2025
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि द्वादशी 11:59 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति 02:09 PM
🔅 करण कौलव, तैतिल 10:40 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग अतिगंड 01:21 PM
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:18 AM
🔅 चन्द्रोदय 04:52 AM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 05:40 PM
🔅 चन्द्रास्त 02:48 PM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:22:19
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत मार्गशीर्ष
🔅 मास पूर्णिमांत पौष
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:08 PM 12:50 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 09:22 AM 10:04 AM
🔅 कंटक 07:59 AM 08:41 AM
🔅 यमघण्ट 10:45 AM 11:27 AM
🔅 राहु काल 03:04 PM 04:22 PM
🔅 कुलिक 01:31 PM 02:13 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 09:22 AM 10:04 AM
🔅 यमगण्ड 09:53 AM 11:11 AM
🔅 गुलिक काल 12:29 PM 01:47 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅 रोग 07:18 AM – 08:36 AM
🔅 उद्वेग 08:36 AM – 09:54 AM
🔅 चल 09:54 AM – 11:11 AM
🔅 लाभ 11:11 AM – 12:29 PM
🔅 अमृत 12:29 PM – 01:47 PM
🔅 काल 01:47 PM – 03:05 PM
🔅 शुभ 03:05 PM – 04:22 PM
🔅 रोग 04:22 PM – 05:40 PM
🔅 काल 05:40 PM – 07:22 PM
🔅 लाभ 07:22 PM – 09:05 PM
🔅 उद्वेग 09:05 PM – 10:47 PM
🔅 शुभ 10:47 PM – 00:29 AM
🔅 अमृत 00:29 AM – 02:11 AM
🔅 चल 02:11 AM – 03:54 AM
🔅 रोग 03:54 AM – 05:36 AM
🔅 काल 05:36 AM – 07:18 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 05:02 AM समाप्त: 07:16 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 07:16 AM समाप्त: 09:25 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 09:25 AM समाप्त: 11:08 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 11:08 AM समाप्त: 12:37 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 12:37 PM समाप्त: 02:02 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 02:02 PM समाप्त: 03:38 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 03:38 PM समाप्त: 05:34 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:34 PM समाप्त: 07:49 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 07:49 PM समाप्त: 10:10 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 10:10 PM समाप्त: 00:27 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 00:27 AM समाप्त: 02:43 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 02:43 AM समाप्त: 05:02 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺

दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है

🌼 मलमास प्रारंभ 🌼

मलमास में क्या कार्य नहीं करना चाहिए (वर्जित कार्य):

मांगलिक कार्य: विवाह, सगाई, मुंडन, नामकरण, गृहप्रवेश, वधू प्रवेश, और उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्य वर्जित हैं।
नए कार्य: नया व्यवसाय शुरू करना, घर बनाना, भूमि पूजन, और यज्ञोपवीत संस्कार नहीं करना चाहिए।
खरीदारी: नया वाहन, मकान, गहने या नए कपड़े खरीदने से बचना चाहिए, हालांकि अत्यंत आवश्यक होने पर खरीदारी की जा सकती है।

🌼 मलमास में क्या करना चाहिए (शुभ कार्य):

भगवान विष्णु की पूजा: इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा, आराधना और सूर्य को अर्घ्य देना विशेष फलदायी होता है।
दान-पुण्य: गरीब, दुखी और अनाथों की सेवा, पशुओं को अन्न देना, और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
धार्मिक कार्य: व्रत, उद्यापन, कथा, जप, और तप जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
सात्विक भोजन: सात्विक और शुद्ध भोजन ग्रहण करना चाहिए।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री