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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 दिसंबर 2021।  बढ़ती महंगाई के खिलाफ कांग्रेस की आज जयपुर में रैली होनी है, जिसके लिए बड़ी तैयारी की गई है। सभी बड़े नेता जयपुर पहुंच रहे हैं। कोरोना के नये वेरियंट के बीच ये राजनीतिक प्रदर्शन पांच राज्यों के आने वाले विधान सभा चुनावों की तैयारी है। अपने अंतर्विरोध से घिरी कांग्रेस इस रैली के जरिये नई सूरत बनाने का प्रयास करती नजर आ रही है।
पहले ये रैली दिल्ली में होनी थी मगर वहां इजाजत नहीं मिली। तब कांग्रेस के पास घर का मैदान केवल राजस्थान बचा था। पंजाब में पार्टी के लिए सब ठीक नहीं, वहीं छत्तीसगढ़ बहुत दूर है। पार्टी राजस्थान में भी दो गुटों में बंटी है, मगर फिर भी टकराहट कम है। इसलिए जयपुर को रैली के लिए चुना गया। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पार्टी में बड़ा स्थान है, एक वजह ये भी थी।
दूसरे यहां भाजपा भी अच्छी स्थिति में नहीं है। राजस्थान भाजपा गुटों में बंटी है और हाल ही में हुए विधान सभा उप चुनावों में बुरी तरह पराजित हुई है। इसलिए कमजोर विरोध ने भी कांग्रेस को राजस्थान की तरफ आकर्षित किया है।
कांग्रेस के लिए ये समय चुनोती का है। ममता लगातार पार्टी नेताओं को अपने साथ लाकर विपक्ष का नेतृत्त्व अपने हाथ लेने की कोशिश कर रही है। वहीं जी 23 के नेताओं के अपने अलग स्वर है। बिखरे पार्टी नेताओं को एकजुट करने की कोशिश भी है जयपुर रैली।
दबे स्वरों में पार्टी के नेता ये भी स्वीकार रहे हैं कि जयपुर रैली एक बार फिर से पार्टी की कमान राहुल गांधी को सौंपने की कवायद भी है। संगठन के चुनाव की प्रक्रिया चल ही रही है। इस बड़े ध्येय को देखकर ही पार्टी ने गहलोत और सचिन पायलट के बीच दूरी न होने का संदेश देने की कोशिश की। शनिवार को गहलोत से मिलने पायलट खुद उनके निवास पर गये, ताकि एकजुटता का संदेश जाये। गहलोत सरकार के मंत्री भी अपने अपने इलाके में भीड़ जुटाने के लिए दौरे पर रहे।
कांग्रेस की इस रैली के माध्यम से पूरी कोशिश सूरत बदलनी की है और भीतर के असंतोष को थामने का प्रयास है। ये रैली महंगाई का विरोध तो है ही मगर साथ में पार्टी को मजबूत करने की दिशा में भी एक कदम है। रैली कांग्रेस को कितना राजनीतिक फायदा देगी, ये तो आने वाला समय ही बतायेगा। मगर पार्टी ने इस रैली से बहुत उम्मीदें पाली है, ये साफ लग रहा है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार