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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 अप्रैल 2025। राजस्थानी भाषा केवल बोलचाल की भाषा तक ही सीमित रही तो इसका संरक्षण संभव नहीं है आवश्यकता है कि राजस्थानी विचार एवं अभिव्यक्ति की प्रमुख भाषा बने। राजस्थानी भाषा संरक्षण, विकास एवं मान्यता के लिए राजस्थानी को जनभाषा बनाने का यह आह्वान राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के प्रकाशन जागती जोत के संपादक मधु आचार्य ने बुधवार को हनुमानगढ़ में आयोजित अपने अभिनंदन समारोह में किया। हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित होटल ग्रेंड इन में पत्रकारों एवं साहित्यप्रेमियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में संबोधन देते हुए आचार्य ने कहा कि जागती जोत केवल एक साहित्यिक पत्रिका नहीं बल्कि यह राजस्थानी अस्मिता की आवाज है। हमारा प्रयास होगा कि इस मंच के ज़रिए गांव-कस्बों में छिपे रचनाकारों की आवाज़ भी सुनी जाए। आचार्य ने जागती जोत के आगामी सभी अंकों में नवाचार, लोकवाणी और शोधपरक सामग्री को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। विदित रहे कि वरिष्ठ साहित्याकार आचार्य अभी तक राजस्थानी एवं हिंदी में 108 पुस्कतें लिख चुे है एवं अनेकों पदों, अनेकों पुरस्कारों से नवाजे जा चुके है। उनका अभिनदंन करते हुए डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष ललित पारीक ने कहा कि “राजस्थानी भाषा को उसका हक दिलाने के लिए जिस गंभीरता और संकल्प के साथ मधु आचार्य कार्य कर रहे हैं, वह पूरे भाषा-समुदाय के लिए प्रेरणादायी है। ऐसे साहित्यिक व्यक्तित्व का हनुमानगढ़ में आगमन हम सबके लिए गौरव की बात है। जागती जोत के जरिए गांवों की बोली और मन की बात को सम्मान मिलेगा। इस मौके पर ख्यातनाम पत्रकार धीरेन्द्र शास्त्री, श्रीमती विजय लक्ष्मी, श्रीमती सरस्वती, डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के संरक्षक मदन अरोड़ा, दीपक भारद्वाज, बालकृष्ण थरेजा, भवानी तिवाड़ी, विनोद नागलिया सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।