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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 नवंबर 2020। बुधवार को जिलाप्रशासन ने तूफानी दौरा श्रीडूंगरगढ़ में किया। तूफानी इसलिए कि आए अधिकारियों ने चार घंटे के दौरे में ही तीन गांवों में जनसुनवाई, दो कार्यालयों का वार्षिक निरीक्षण, रिव्यू बैठक, पूनरासर मंदिर में दर्शन आदि कई कार्य फटाफट ही निपटा दिए। जिला मुख्यालय से अधिकारी रवाना तो हुए की जनता के कार्य कैसे हो लेकिन उनका दौरा केवल यहीं तक सीमित रहा की एक चर्चा हो जाए कि जनता का काम कैसे हो? इस चर्चा के साथ ही खानापूर्ति की गई और जिला मुख्यालय से आए अधिकारी लौट गए। जनता से प्रशासन का वास्ता भी कहाँ, आमजन दो जून की रोटी के जुगाड़ में जुटें रहते है। और उन्हें अधिकारियों से मतलब कहाँ? और अधिकारी जो बड़ी बड़ी पोथियों का ज्ञान समेट कर बड़ी परीक्षाएं पास कर कुर्सी पर बैठे है तो उन्हें जनता से लेना देना क्या? जिलाकलेक्टर अधिकारियों की फौज के साथ पुनरासर, मणकरासर और गुसाईंसर पहुंचे और जनसुनवाई का आयोजन तो किया लेकिन जनसुनवाई में बिजली पानी की समस्या के अलावा ग्रामीण कोई बात कह सकें इतना समय अधिकारियों के पास नहीं था। और हद तो ये रही की जनता तक ये बात पहुंच ही ना सकी की जिले के मालिक उनके बीच दुःख दर्द सुनने आ रहें है। कोई परेशान, आहत, गरीब नहीं पहुंच सका जनसुनवाई में और केवल प्रशासन के नुमाइंदे, गिनती के गांव के रसूखदार ही आएं और बमुश्किल आधा घंटे में कर ली गयी जन सुनवाई बिना जन के। बुधवार को जिलाप्रशासन का श्रीडूंगरगढ़ में आना और मात्र खानापूर्ति कर गुजर जाने को हम सभी बहुत सामान्य ही ले रहे है क्योंकि अधिकांशतः यही भाग्य रहा है श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र का। कलेक्टर के अलावा बुधवार को सीएमएचओ भी आए पर कोरोना जांच के अभाव में दम तोड़ रही जिंदगियों को बचाने के लिए कोरोना जांच बढ़ाने पर बात नहीं कर शुद्ध के लिए युद्ध की खानापूर्ति कर निकल जाना जागरूक नागरिकों में अफसरशाही की छाप छोड़ गया। जिलाकलेक्टर ने बाबा के मन्दिर में धोक लगा कर जनता से जुड़ाव दिखाने का प्रयास किया परन्तु उसी मन्दिर का भव्य निर्माण लंबे समय से विवाद में उलझा है उसका निपटारा करने पर विचार नहीं किया। ग्राम पंचायत मुख्यालय समंदसर के स्थान पर वाहन रूट में आने वाले पंचायत के छोटे गांव मणकरासर में ही जनसुनवाई की खानापूर्ति कर ली गई और गुसाईंसर बड़ा में तो सम्पूर्ण ग्रामीणों को जानकारी ही नहीं थी और जो आएं उन्हें कोई शिकायत ही नहीं थी। पर हमें साधारण जन को शिकायत नहीं बस एक टिस ह्रदय में उठ कर बैठ जाती है कि क्षेत्र में विकास की बात करने वाली किताब बनी नहीं जो ये अधिकारी उसे पढ़ पाते। जहां शिक्षा का उजाला घना नहीं और महिला व बाल विकास से कोई पहचान ही नहीं उस क्षेत्र में विकास की राह कोई जनता के बीच लेकर आएं ऐसी कोई परीक्षा होती नहीं। क्योंकि हम शिकायत करते ही नहीं है, हम तो आमजन उलझे है दो जून की रोटी के जुगाड़ में।