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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ टाइम्स 7 जून 2020। मृत्युभोज को सामाजिक कुप्रथा मानते हुए आज कितासर भाटियान में सभी जातियों ने सर्वसम्मति से इसके आयोजन पर विराम लगा दिया है। गांवो में इस कुप्रथा के खिलाफ समय समय पर मांग उठती है। आज सरपंच प्रतिनिधि भंवरलाल पूनिया की अगुवाई में ग्राम पंचायत भवन में गांव के सभी जातियों ने मिल कर किसी मृत्युभोज का आयोजन नहीं करने व गांव में कोई डीजे नहीं बजाने की रोक लगा दी। गांव में तेज साउंड में बजने वाले डीजे भी बेन कर दिए गए है तथा ग्रामीणों ने इसे बुराई मानते हुए एकराय से बन्द कर दिया है। इस रोक के साथ गांव में इसके उल्लघंन पर पांच हजार नगद जुर्माना भी देना होगा। गांव के 75 वर्षीय बुजुर्ग सदाराम जाट ने कहा कि हम सब ने ये अपने जीवन में अनुभव किया है कि ये गलत है परंतु इस कुप्रथा को बंद करने का पहले साहस कौन करें आज पूरे गांव ने फैसला ले लिया है। गांव के बुजुर्ग 70 वर्षीय सोहनराम नाई, 63 वर्षीय कुम्भाराम, भंवरलाल ब्राह्मण, खेतानसिंह राजपूत, भियांराम मेघवाल, भंवरलाल बावरी सहित सभी बुजुर्गों ने इसकी पाबंदी पर सहमति दी। गांव के बुजुर्गों ने एक स्वर में इसी सभा में किसी मृत्युभोज भोजन नहीं करने का प्रण भी लिया।

गांव के युवाओं का साथ।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कितासर भाटियान के युवा भी इस कुरीति के खिलाफ एक जुट नजर आए। गरीब सेवा संस्थान के रामकिशन फौजी व दिनेश पारीक, ओम प्रकाश पूनिया, संजय नाई, सुभाष व्यास ने युवाओं के समर्थन के लिए सार्थक प्रयास किए। युवाओं मृत्यु भोज बंद करने के साथ ही गांव में डीजे नहीं बजाने पर भी सहमति दी।

यह सिर्फ दिखावा है और धन की बर्बादी- सरपंच शारदा पूनिया
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरपंच शारदा पूनिया ने टाइम्स को बताया कि इस बैठक में हम सभी ने स्वीकार किया कि मृत्युं भोज पर खर्च किए जा रहे धन को धर्मशालाओं, अस्पतालों, गोशालाओं, के निर्माण व रखरखाव पर खर्च किया जाना चाहिए ताकि गांव का विकास हो सकें और ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सकें। इस प्रस्ताव को एक स्वर में सभी ने स्वीकार किया। यह पूछे जाने पर कि आप फैसले को कैसे लागू करेंगे, उन्होंने कहा की गांव की सभी जातियां इसका पालन करेंगी। इसके अलावा, हम नजर रखेंगे और जुर्माना वसूला जाएगा। पूनिया ने गांव के अनुभवी बुजुर्गों व प्रगतिशील युवाओं का आभार प्रकट किया।

श्रीडूंगरगढ टाइम्स। कितासर भाटियान में आयोजित सभा में सर्वसम्मति से ग्रामीणों ने मृत्युभोज को बंद करने का निर्णय लिया है।
सरपंच शारदा देवी पूनिया