Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
000000
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 16 अप्रैल 2025। राजस्थान के इतिहास को गर्वित करने वाला किस्सा है नागौर के जायल खिंयाला के गोपाल जाट-धर्मों चौधरी द्वारा दिल्ली सल्तनत के सोने के सिक्कों से लिछमा गुजरी का मायरा भरने का। चौदहवीं शताब्दी का यह किस्सा आज भी भातृप्रेम का आदर्श स्थापित करता है एवं नागौर के कई मायरे तो पूरे राज्य में ही नहीं देश भर में चर्चाएं हासिल करते रहें है। नागौर क्षेत्र के अनेक ऐतिहासिक मायरा आयोजनों जैसा एक मायरा श्रीडूंगरगढ़ में भी देखने को मिला है। जहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य हरिराम बाना एवं उनके बड़े भाई सीताराम बाना ने गांव राजेडू पहुंच कर अपनी बहिन भंवरीदेवी मदेरणा के पुत्र मुकेश मदेरणा के विवाह में 1 करोड़ 21 लाख रुपए से अधिक का मायरा भरा है। गांव बाना से 101 वाहनों में करीब 500 ग्रामीण मायरा भरने वाले भाई सीताराम-हरिराम के पिता हड़मानाराम बाना की अगुवाई में काफिले के रूप में गांव राजेडू पहुंचे। पूरे गांव के ग्रामीण जब एक जैसे साफे में पहन कर भाई बन कर सजे और राजेडू पहुंचे तो बहन भंवरी देवी सहित वहां मौजूद महिलाएं भावुक हो गई। यहां मायरे गीतों के बीच मायरा भरा गया जिसमें 21 लाख नकद, 2 लाख नकद की टिकावणी, नया मैसी 241 ट्रेक्टर एवं गेंहू से भरी ट्रॉली, 80 ग्राम सोने के गहने, करीब 80 लाख रुपए की कीमत का बीकानेर में रेडियो स्टेशन के सामने तिलक नगर में स्थित प्लॉट देकर मायरा भरा। इस मौके पर राजेडू गांव के अनेक मौजिज लोग उपस्थित रहें। गांव बाना से भी सभी वरिष्ठजन मायरे में शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में मायरे को भाई-बहिन का आदर्श प्रेम बताया। क्षेत्र में सोशल मीडिया पर भी पिछले दो दिनों यह मायरा खासा ट्रेंड में है और चर्चित हो रहा है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बाना के बाना परिवार ने भरा यादगार मायरा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गेहूं भरकर नई ट्रेक्टर ट्रॉली लेकर पहुंचे भाई, सौंपी बहन के परिवार को चाबियां।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। हर किसी ने की मायरे की सराहना, याद आए पुराने ऐतिहासिक मायरे भी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 101 वाहनों में गांव बाना के 500 ग्रामीण मायरा भरने पहुंचे तो भावुक हुई महिलाएं।