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October 17, 2026
7-jan
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 जनवरी 2024,🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 07 – Jan – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि एकादशी +00:48 AM
🔅 नक्षत्र विशाखा 10:08 PM
🔅 करण :
बव 12:52 PM
बालव 12:52 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग शूल +04:51 AM
🔅 वार रविवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:26 AM
🔅 चन्द्रोदय +04:11 AM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 सूर्यास्त 05:53 PM
🔅 चन्द्रास्त 01:58 PM
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1945 शोभकृत
🔅 कलि सम्वत 5125
🔅 दिन काल 10:26 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2080
🔅 मास अमांत मार्गशीर्ष
🔅 मास पूर्णिमांत पौष

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:19:19 – 13:01:07
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 04:30 PM – 05:11 PM
🔅 कंटक 10:55 AM – 11:37 AM
🔅 यमघण्ट 01:42 PM – 02:24 PM
🔅 राहु काल 04:35 PM – 05:53 PM
🔅 कुलिक 04:30 PM – 05:11 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 12:19 PM – 01:01 PM
🔅 यमगण्ड 12:40 PM – 01:58 PM
🔅 गुलिक काल 03:16 PM – 04:35 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

 

📜 चोघडिया 📜

🔅उद्वेग 07:26:46 – 08:45:08
🔅चल 08:45:08 – 10:03:30
🔅लाभ 10:03:30 – 11:21:51
🔅अमृत 11:21:51 – 12:40:13
🔅काल 12:40:13 – 13:58:35
🔅शुभ 13:58:35 – 15:16:56
🔅रोग 15:16:56 – 16:35:18
🔅उद्वेग 16:35:18 – 17:53:40
🔅शुभ 17:53:40 – 19:35:19
🔅अमृत 19:35:19 – 21:16:58
🔅चल 21:16:58 – 22:58:37
🔅रोग 22:58:37 – 24:40:16
🔅काल 24:40:16 – 26:21:56
🔅लाभ 26:21:56 – 28:03:35
🔅उद्वेग 28:03:35 – 29:45:14
🔅शुभ 29:45:14 – 31:26:53

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 05:56 AM समाप्त: 08:29 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 08:29 AM समाप्त: 09:44 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 09:44 AM समाप्त: 11:12 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:12 AM समाप्त: 12:38 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 12:38 PM समाप्त: 02:14 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 02:14 PM समाप्त: 04:10 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:10 PM समाप्त: 06:25 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 06:25 PM समाप्त: 08:45 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 08:45 PM समाप्त: 11:02 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 11:02 PM समाप्त: अगले दिन 01:18 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 01:18 AM समाप्त: अगले दिन 03:37 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 03:37 AM समाप्त: अगले दिन 05:56 AM

🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺

दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है

⭐ सफला एकादशी व्रत एवं कथा ⭐

चम्पावती नगरी में एक महिष्मान नाम का राजा राज्य करता था। उसके चार पुत्र थे। उन सबमें लुम्पक नामवाला बड़ा राजपुत्र महापापी था। वह पापी सदा परस्त्री और वेश्यागमन तथा दूसरे बुरे कामों में अपने पिता का धन नष्ट किया करता था। सदैव ही देवता, बाह्मण, वैष्णवों की निंदा किया करता था। जब राजा को अपने बड़े पुत्र के ऐसे कुकर्मों का पता चला तो उन्होंने उसे अपने राज्य से निकाल दिया। तब वह विचारने लगा कि कहाँ जाऊँ? क्या करूँ?

अंत में उसने चोरी करने का निश्चय किया। दिन में वह वन में रहता और रात्रि को अपने पिता की नगरी में चोरी करता तथा प्रजा को तंग करने और उन्हें मारने का कुकर्म करता। कुछ समय पश्चात सारी नगरी भयभीत हो गई। वह वन में रहकर पशु आदि को मारकर खाने लगा। नागरिक और राज्य के कर्मचारी उसे पकड़ लेते किंतु राजा के भय से छोड़ देते।

वन के एक अतिप्राचीन विशाल पीपल का वृक्ष था। लोग उसकी भगवान के समान पूजा करते थे। उसी वृक्ष के नीचे वह महापापी लुम्पक रहा करता था। इस वन को लोग देवताओं की क्रीड़ास्थली मानते थे। कुछ समय पश्चात पौष कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन वह वस्त्रहीन होने के कारण शीत के चलते सारी रात्रि सो नहीं सका। उसके हाथ-पैर अकड़ गए।

सूर्योदय होते-होते वह मूर्छित हो गया। दूसरे दिन एकादशी को मध्याह्न के समय सूर्य की गर्मी पाकर उसकी मूर्छा दूर हुई। गिरता-पड़ता वह भोजन की तलाश में निकला। पशुओं को मारने में वह समर्थ नहीं था अत: पेड़ों के नीचे गिर हुए फल उठाकर वापस उसी पीपल वृक्ष के नीचे आ गया। उस समय तक भगवान सूर्य अस्त हो चुके थे। वृक्ष के नीचे फल रखकर कहने लगा- हे भगवन! अब आपके ही अर्पण है ये फल। आप ही तृप्त हो जाइए। उस रात्रि को दु:ख के कारण रात्रि को भी नींद नहीं आई।

उसके इस उपवास और जागरण से भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए और उसके सारे पाप नष्ट हो गए। दूसरे दिन प्रात: एक ‍अतिसुंदर घोड़ा अनेक सुंदर वस्तुअओं से सजा हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

उसी समय आकाशवाणी हुई कि हे राजपुत्र! श्रीनारायण की कृपा से तेरे पाप नष्ट हो गए। अब तू अपने पिता के पास जाकर राज्य प्राप्त कर। ऐसी वाणी सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और दिव्य वस्त्र धारण करके ‘भगवान आपकी जय हो’ कहकर अपने पिता के पास गया। उसके पिता ने प्रसन्न होकर उसे समस्त राज्य का भार सौंप दिया और वन का रास्ता लिया।
अब लुम्पक शास्त्रानुसार राज्य करने लगा। उसके स्त्री, पुत्र आदि सारा कुटुम्ब भगवान नारायण का परम भक्त हो गया। वृद्ध होने पर वह भी अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर वन में तपस्या करने चला गया और अंत समय में वैकुंठ को प्राप्त हुआ।
अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है। जो नहीं करते वे पूँछ और सींगों से रहित पशुओं के समान हैं। इस सफला एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने से अथवा श्रवण करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026