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October 15, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 दिसम्बर 2023। दुनिया के बहुत से हिस्सों में, हींग (ऐसाफ़ेटिडा) को खाने का स्वाद बढ़ाने वाले तत्व के रूप में और विभिन्न प्रकार की बीमारियों का पारंपरिक रूप से उपचार करने के लिए किया जाता है। हींग (फ़ेरुला ऐसाफ़ेटिडा), एक ओलिओ-गम-रेज़िन है जो अंबेलीफेरा फ़ैमिली के फ़ेरुला पौधों के तनों में बनती है। फ़ेरुला के पौधे काफ़ी बड़े स्तर पर मध्य एशिया, ख़ासकर पश्चिमी अफगानिस्तान, इराक, तुर्की और पूर्वी ईरान, यूरोप एवं उत्तरी अफ्रीका में फ़ैले हुए हैं जहां इनकी लगभग 170 प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में, ऐसाफ़ेटिडा को हींग या हींगु के नाम से जाना जाता है। पूरी जानकारी पढें और आज से ही हींग को जरूर शामिल करें अपने रोजाना के भोजन में, हींग के एक पैक के साथ एक पैक पाएं बिल्कुल मुफ्त, केवल श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स का विज्ञापन दिखाकर महावीर किराना मर्चेंट, हाई स्कूल रोड से प्राप्त करें। बता देवें आज स्किम का अंतिम दिन है, आप जरूर इसका लाभ उठावें।

फ़ेरुला के पौधे, बड़ी टैपरूट या गाजर के आकार की जड़ें बनाते हैं जिनके ऊपरी हिस्से की चौड़ाई 4 से 5 साल में लगभग 15 सेमी तक हो जाती है और इनसे हींग प्राप्त की जाती है। हींग की गंध तीखी, लंबे समय तक बरकरार और सल्फर वाली होती है। अपनी गंध के कारण अब यह भारतीय व्यंजनों में डाली जाने वाली एक आम चीज़ बन गई है, जो लहसुन, प्याज़ और साथ ही मांस के समान तीखी गंध वाली होती है। फ़ेरुला एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब है ‘ले जाने वाला’ या ‘वाहन’। ‘असा’ शब्द फारसी ‘असा’ से बना लैटिन रूप है, जिसका अर्थ होता है ‘रेज़िन’ और फोएटिडस का अर्थ है ‘महक’।

हींग दो रूपों में आती है: ठोस रूप में और छोटे टुकड़ों में, आमतौर पर इसका ठोस रूप पाया जाता है। फ़ेरूला हींग के पौधे में पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है: रेज़िन, गोंद और एसेन्शिअल ऑयल। वैनिलिन, 3,4-डाइमेथॉक्सीसिनामाइल-3-(3,4-डाइसेटॉक्सीफेनिल) एक्रिलेट, पिसिलैक्टोन सी और 7-ऑक्सोकैलिट्रिस्टिक एसिड, फ़ेरुला ऐसाफ़ेटिडा के पौधे में पाए जाने वाले फेनोलिक यौगिकों और डाइटरपेन में शामिल हैं।2

हींग में पाए जाने वाले पोषक तत्व इस प्रकार हैं: 2

हींग का पोषण तत्वों की मात्रा

तत्व प्रतिशत
कार्बोहाइड्रेट 68%
प्रोटीन 4%
फाइबर 4%
वसा 1%
खनिज 7%

टेबल1: हींग में पाए जाने वाले पोषक तत्व2

उपचार के लिए किए जाने वाले हींग के उपयोग

अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, काली खांसी, आंतों में पलने वाले परजीवी, अल्सर, पेट दर्द, मिर्गी, पेट फूलना, कमजोर पाचन, ऐंठन और इन्फ्लूएंजा कुछ ऐसी स्थितियां हैं जिनके लिए हमेशा हींग का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हींग, पेट से जुड़ी कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मदद करती है। इसका उपयोग अनचाहे गर्भावस्था, असामान्य दर्द, बाँझपन, कठिन और अत्यधिक मासिक धर्म एवं ल्यूकोरिया जैसी कई तरह की समस्याओं से निपटने में किया जाता है।1

हींग के फ़ायदे

Hing (Asafoetida) ke faayede

नसों की समस्याओं से निपटने के लिए हींग के फ़ायदे:

  • लिम्फोसाइट घुसपैठ को रोकते हुए एक्सोनल पुनर्जनन और रीमेलिनेशन को बढ़ावा देकर न्यूरोपैथिक दर्द के उपचार में तंत्रिका उत्तेजक के रूप में कार्य करने के लिए फ़ेरूला हींग की क्षमता इसके न्यूरोप्रोटेक्टिव प्रभाव को प्रदर्शित करती है।
  • अपने एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव और एंजाइम एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ को खत्म करने के गुण के कारण फ़ेरूला हींग याददाश्त तेज़ करती है।1
  • फ़ेरूला हींग की गोंद के अर्क की जांच प्रयोग में शामिल जानवरों में दौरे पड़ने पर की गई।
  • ऐसा इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने की क्षमता के कारण है।1

हृदय के लिए हींग के फ़ायदे

प्रयोग में शामिल जानवरों में फ़ेरूला हींग गोंद के अर्क को ब्लड प्रेशर को कम करने में कारगर पाया गया।1

लीवर के लिए हींग के फ़ायदे :

फ़ेरूला हींग के पॉलीहर्बल सस्पेंशन और मोमोर्डिका चारेंटिया लिन, नरदोस्ताचस जटामांसी वास के अर्क का रक्त में एंजाइमों को कम करने का एक महत्वपूर्ण बेहद सुरक्षापूर्ण प्रभाव पाया गया, जिसमें ग्लूटामेट पायरुवेट ट्रांसमानेज, ग्लूटामेट ऑक्सेलोसेट ट्रांसमानेज और क्षारीय फॉस्फेट शामिल है।1

रोगों से बचाने वाले एजेंट के रूप में हींग के फ़ायदे:

● हींग के अर्क के रोगों से बचाने के गुण का कई तरह के कवक और जीवाणुओं की किस्मों पर परीक्षण किया गया।

● इसके एल्कोहोलिक और जलीय अर्क ने कवक और बैक्टीरिया को रोककर रोगों से बचाने की बेहद महत्वपूर्ण काम किया। बी. सबटिलिस, ई. कोलाई, क्लेबसिएला निमोनिया और एस. ऑरियस पर इसकी जीवाणुरोधी क्षमता को जांचा गया, जबकि हींग की एंटिफंगल क्षमता को ए. नाइगर और कैंडिडा एल्बीकैंस पर जांचा गया।1

एंटीकैंसर एजेंट के रूप में हींग के फ़ायदे:

फ़ेरूला हींग के ओलियो-गम-रेसिन की कीमोप्रिवेंटिव क्षमता का अध्ययन चूहों में होने वाले कोलन कैंसर में, ट्यूमर के आकार, ट्यूमर की बहुलता और ट्यूमर होने की घटनाओं के अलावा इसके सीरम के कुल सियालिक एसिड के स्तर को मापकर किया गया।1

डायबिटीज से निपटने में हींग के फ़ायदे:

हींग के अर्क ने ब्लड शुगर को मात्रा को कम करने में सहायक है और इस तरह इसके अर्क में पाए जाने वाले फेनोलिक एसिड और टैनिन के कारण इसका इस्तेमाल डायबिटीज के रोगियों के ब्लड शुगर के स्तर को कम करने के लिए किया जा सकता है।

मोटापा से बचाने और चर्बी कम करने वाले एजेंट के रूप में हींग के फ़ायदे:

●     डायबिटीज के रोगियों में वजन बढ़ने और वसा बनने की प्रक्रिया में फ़ेरूला हींग के प्रभावों को जानने के लिए शोध किया गया और यह पता चला कि यह शरीर के वजन, असामान्य वसा और एडिपोसाइट कोशिका के आकार को कम करने में सहायक है।

●      इसी वजह से इसे डायबिटीज के कारण होने वाले मोटापे के उपचार में सहायक विकल्प माना जा सकता है।

कृमिनाशक एजेंट के रूप में हींग के फ़ायदे:

कृमि मारने की गतिविधि में जांच में फ़ेरूला हींग के तरल अर्क के प्रभाव की जांच कई कृमियों के काफ़ी हद तक कमज़ोर बनने और इनके मरने के समय को मापकर की गई।1

एंटीऑक्सिडेंट के रूप में हींग के फ़ायदे:

●     हींग के पौधे के अर्क ने प्रायोगिक जानवरों में एंटीऑक्सीडेंट की भूमिका निभाई।

●     अध्ययन के परिणामों ने चूहों के लीवर में लिपिड पेरोक्सीडेशन के स्तरों में कमी का पता चला।2

रिलैक्स करने के गुण के कारण हींग के फ़ायदे:

●     फ़ेरूला हींग और इसके अवयवों अनेक तरह से तैयार करके विभिन्न प्रकार की चिकनी मांसपेशियों पर इसके प्रभावों की जांच की गई।

●     हींग के ओलेओ-गम-रेज़िन और इसके कूमेरिन घटक अम्बेलिप्रेनिन की चिकनी मांसपेशियों को आराम देने वाली क्रियाओं की इन-विट्रो अध्ययनों द्वारा जांच की गई।

●     हींग के अर्क में अंबेलिप्रेनिन मौजूद होने के कारण यह श्वासनली की चिकनी मांसपेशियों को आराम पहुंचा सकती है।1

पाचन प्रक्रिया को तेज़ करने में हींग के फ़ायदे:

●      हींग की पाचन प्रक्रिया तेज़ करने का शरीर पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण लार अधिक बनती है और लार एमाइलेज की गतिविधि में वृद्धि होती है।

●     यह पित्त के प्रवाह को तेज़ करके और पित्त में एसिड के स्राव को बढ़ाती है, अग्न्याशय और छोटी आंत के पाचन एंजाइमों की गतिविधि को तेज़ कर आहार को पचाने में सहायता करता है।1

अल्सर से बचाव में हींग के फ़ायदे:

जानवरों पर किए गए अध्ययन के अनुसार, हींग को पानी में घोलने पर यह अल्सर से बचने में सहायक साबित हो सकता है।

हींग को कैसे इस्तेमाल करें?

हींग का उपयोग नीचे बताए गए तरीकों से किया जा सकता है:

गोंद

हिस्टीरिया, काली खांसी और अल्सर के इलाज के लिए इसके सूखे गोंद को गर्म पानी में घोलकर इसे पिया जाता है। इसका उपयोग अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के इलाज के लिए भी किया जाता है। मलेशिया में, एमेनोरिया के इलाज के लिए इससे बना च्यूइंग गम चबाया जाता है और मोरक्को में इसे एंटीपीलेप्टिक के रूप में चबाया जाता है। मिस्रवासी सूखे गोंद का उपयोग गर्भनिरोधक के रूप में करते हैं।

जड़

ऐंठन रोधी, मूत्रवर्धक, वर्मीफ्यूज और एनाल्जेसिक के रूप में इसकी सूखी जड़ का उपयोग काढ़ा बनाने के लिए किया जाता है

कृमिनाशक के रूप में रेज़िन के पानी के अर्क को मौखिक रूप से लिया जाता है। रेज़िन का तरल अर्क मुंह से लेने पर यह कफ़ नाशक, कृमिनाशक, कामोत्तेजक और दिमाग उत्तेजित करने का काम करता है। काली खांसी से निपटने के लिए इसकी सूखी रेज़िन का पेस्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पत्ते और तना

पुरूष इसके सूखे पत्ते और तने के अर्क को गर्म पानी से पी सकते हैं। यह कामवासना बढ़ाने का काम करता है।2

ओलेरेज़िन पाउडर

इसके चूर्ण का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है।

हींग के साइड इफ़ेक्ट्स:

हींग के अर्क की जांच में यह रोजमर्रा के उपयोग के लिए सुरक्षित पाया गया है। ज़्यादा मात्रा में हींग लेने से मुंह में सूजन, पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट फूलना, दस्त, घबराहट और सिरदर्द की समस्या हो सकती है।