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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अगस्त 2023। ये देश आस्था और विश्वास का देश है और यहां श्रद्धालुओं में अपने ईष्ट के प्रति अगाध श्रद्धा के अनेक उदाहरण सहज मिल जाते है। सावन माह युं तो शिव अराधना से जुड़ा है परंतु श्रीडूंगरगढ़ में श्रावण पूर्णिमा पर ठाकुरजी को झूले झूलाने की परंपरा भी अनवरत जारी है। कालूबास में स्थित रघुनाथजी के मंदिर में भगवान कृष्ण के बाल रूप की झांकी सजाने व उन्हें झूलाने की परंपरा मंदिर स्थापना के समय से चली आ रही है। मंदिर के संस्थापक सरजुदास जी महाराज ने 28 भरी सोने से झूले का निर्माण करवाया व प्रतिवर्ष पांच दिन इस झूले में ठाकुरजी को झूलाया जाता है। श्रावणी पूर्णिमा से तीन दिन पूर्व ये झूला सजाया जाता है व पूर्णिमा के एक दिन बाद झूला उतार लिया जाता है। सरजुदास जी महाराज के वंशज व मंदिर के वर्तमान पुजारी अशोक आसोपा ने बताया कि उनके पूर्वज महाराज सरजुदासजी ठाकुरजी के अंन्नय पुजारी थे व मंदिर में झूला उत्सव मनाने की परंपरा उनके द्वारा ही प्रारंभ की गई थी। उन्होंने ही सोने का झूला बनवाया जो आज तक लगातार प्रति श्रावण माह की पूर्णिमा से दो या तीन दिन पहले सजाया जाता है। यहां श्रद्धा से लोग आकर ठाकुरजी के दर्शन करते है व उन्हें झूला देते है। आसोपा ने बताया कि ऐसी लोक मान्यता है कि मंदिर में यहां ठाकुरजी के दर्शन करने व झूला झुलाने से कष्टों का नाश होता है और मन्नतें पूरी होती है। अनेक श्रद्धालुओं ने यहां मन्नतें पूरी होने पर भोग भी लगाएं है।

रहती है श्रद्धालुओं की भीड़।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंदिर के मुख्य द्वार पर लिखे होने के अनुसार मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 1542 में हुई व निर्माण सरजुदासजी महाराज ने करवाया। मंदिर में श्रावण पूर्णिमा के पास पांच या छह दिन शाम को खूब भीड़ लगती है और बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते है। भक्त पूरी श्रद्धा से ठाकुरजी को झूला झुलाते है व अपनी प्रार्थना सुनाते है।

कड़ी सुरक्षा का रहता है घेरा।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंदिर के पुजारी परिवार के पार्षद रजत आसोपा ने बताया कि सोने से मंढ़े झूले की सुरक्षा का कड़ा घेरा रहता है। रात को मंदिर पुजारी व श्रद्धालु युवा मंदिर में ही तैनात रहते है। इसी शुक्रवार तक झूले में ठाकुरजी के दर्शन हो सकेंगे। शुक्रवार को झूले के सभी पार्ट खोल कर एकत्र कर कड़ी सुरक्षा में बैंक के लॉकर तक पहुंचा दिया जाता है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 28 भरी सोने से बना है ये झूला, श्रावण पूर्णिमा के समय झूलते है ठाकुर जी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कालूबास स्थित रघुनाथजी मंदिर में शाम को दर्शन करने पहुंचते है श्रद्धालु, झूलाते है ठाकुरजी को।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मंदिर के संस्थापक सरजुदासजी महाराज ने प्रारंभ की झूला झूलाने की परंपरा, आज तक हो रहा है निर्वहन।