Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
00
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 जुलाई 2022। आज जालोर जिले की विश्व प्रसिद्ध पथमेड़ा गौशाला में लंपी चर्म रोग से 330 गायों के मरने व 1440 गायों के संक्रमित होने की सूचना से राज्य भर में हड़कंप मच गया है। श्रीडूंगरगढ़ के किसान व पशुपालकों में घबराहट का माहौल बन गया है। परंतु किसानों को केवल जागरूक होने की जरूरत है। इससे घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। लंपी चर्म रोग से पीड़ित गाय को अन्य पशुओं से अलग कर आइसोलेट करें व पशु चिकित्सालय में संपर्क करें।

श्रीडूंगरगढ़ में 606 संक्रमित, 28 की हुई मौत।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ उपखंड क्षेत्र में अब तक 606 गायें लंपी चर्म रोग से संक्रमित हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मौतों की संख्या 28 है। जिनमें से 10 मौते बाना की गौशाला में हुई है। अब इस गौशाला में भी संक्रमण पूरी तरह से कंट्रोल में है। बता देवें 139 पशु उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो गए है। 275 पशुओं का मेडिकल टीम ईलाज कर रही है।

36 पशु चिकित्सालयों में अलर्ट।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नॉडल अधिकारी डॉ. उत्तम सिंह भाटी ने बताया कि उपखंड में हालात नियंत्रण में है। क्षेत्र के सभी 36 पशु चिकित्सालयों में कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है। अतिआवश्यक होने के अतिरिक्त पशु चिकित्साकर्मियों की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई है। भाटी ने बताया कि विभाग पूरे प्रयास कर रहा है किसानों को जागरूक करने व लंपी रोग पर नियंत्रण के लिए।

पशु को आइसोलेट करें, घबराएं नहीं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डॉ. उत्तम सिंह भाटी ने कहा कि पशुपालक व किसान बिल्कुल घबराएं नहीं और जिस भी पशु में लंपी के लक्षण नजर आए उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर आइसोलेट करें। पशु को पौष्टिक आहार देवें व नजदीकी चिकित्सालय में संपर्क कर ईलाज करवाए। डॉ.भाटी ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि किसी भी दवा का स्टॉक नहीं करें और चिकित्सकों से संपर्क कर ही दवा का प्रयोग करें।

जागरूक किसान ने तुंरत किया ईलाज, पढ़ें ये भी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। किसान गौरीशंकर सारस्वत निवासी सातलेरा ने बताया कि उनके घर में दो छोटे बछड़ों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए और मैंने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं से बीमारी बछड़ो में जहां थी वहीं रूक गई व आगे भी नहीं बढ़ी। आज दोनों बछड़े बिल्कुल स्वस्थ है। सारस्वत ने कहा कि किसान भाई बिना घबराएं डॉक्टर से संपर्क करें जिससे पशु शीघ्र ही स्वस्थ हो सकेंगे।