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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 अप्रेल 2023। आयुर्वेद के अनुसार, सरल स्वस्थ दिनचर्या से शरीर और मन शुद्ध होते हैं, त्रिदोष संतुलित होते हैं, प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और दिन की शुरुआत ताजगी से होती है। आइए कुछ सामान्य नियमों पर डालें एक नजर…

-ब्रह्म मुहूर्त में जागने का प्रयास करें। इसके बाद सबसे पहला काम अपने शरीर पर चिंतन करें। हर अंग पर‍ विचार करें। ध्यान करें कि उसमें कहां कठिनाई आ रही है। बिस्तर से उठने में जल्दबाजी ना करें।

-व्यायाम ऐसा करें कि उसमें शरीर की कुल क्षमता की आधी ऊर्जा लगे। यदि आप एक किमी. टहलने में थक जाते हैं तो इससे ज्यादा ना चलें।

-अनुतैलअवयम तेल का प्रयोग करें। यह विशेष आयुर्वेदिक तेल है। यह तिल के तेल व अन्य हर्ब्सं से तैयार होता है। आप बाहर जाएं तो दो-तीन बूंद दोनों नासिका में डालकर जाएं। यह एक कवच की तरह काम करता है। सूक्ष्म जीवाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।

-समय पर भोजन करें पर भोजन पेट भर के ना खाएं।

-भोजन को चार हिस्से में बांटें। खाना ऐसा हो कि पेट में आधा ठोस आहार, एक चौथाई द्रव और बाकी भाग खाली रहे। यह पाचन प्रक्रिया को बेहतर करता है, पाचन संबंधी विकारों से आपकी रक्षा करता है।

-आठ घंटे की नींद जरूरी है पर समय पर सोना व जागना दोनों जरूरी है। सोने का समय रात्रि 11 बजे तक रहता है। इसके बाद सोते हैं तो अच्छी नींद कम होने लगती है।

शिफ्ट में काम करने वाले यदि पाचन संबंधी समस्या या मोटापा आदि की परेशानी से जूझते हैं तो इसका बड़ा कारण यह भी है कि वे भले दो बजे रात से सुबह देर तक सोकर अपनी नींद पूरी करना चाहें पर अच्छी नींद से वंचित रह जाते हैं।

– कोशिश करें कि मौसम के अनुसार ही आहार विहार रहे। आवश्‍यकता पड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्‍सक से पंचकर्म करा सकते हैं। इस ऋतु में वमन चिकित्सा के जरिये पंचकर्म किया जाता है। इसमें दवा पिलाकर कफ निष्कासन होता है, ताकि शरीर बीमारियों से दूर रह सके।