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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 27 नवंबर 2022। क्षेत्र का छोटा सा गांव लाधड़िया अगले नौ दिन तक धर्ममय रहेगा और मंत्र, भागवत, मायरा के भक्ति स्वरों से गूंज उठेगा। इस भव्य धार्मिक आयोजन के सूत्रधार बने है गांव के प्रवासी विष्णुकुमार तथा उनके पुत्र किशनकुमार सारस्वा। सारस्वा परिवार द्वारा अपने पूर्वजों की पुण्य स्मृति में ठाकुरजी मंदिर का पुनर्निर्माण एवं विस्तार करवाया गया है। गांव में आज शाम को आयोजन प्रारंभ हो गया है और ठाकुरजी को नगर भ्रमण करवाते हुए शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया व भगवान के जयकारै लगाएं। महिलाओं ने मंगल कलश लेकर यात्रा पूर्ण की।

कल होगी प्राण प्रतिष्ठा और भागवत कथा, परसों से मायरा वाचन।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कल सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का महोत्सव मनाया जाएगा तथा कल से ही मंदिर प्रागंण में भागवत कथा प्रारंभ होगी। पंडित प्रकाश तिवाड़ी द्वारा 4 दिसम्बर तक दोपहर 12.15 बजे से शाम 4.15 बजे तक कथा का वाचन किया जाएगा। 29 नवंबर से 3 दिसम्बर तक रात 8.15 बजे से 10.15 बजे तक पंडित महेशराज पारीक द्वारा नानी बाई का मायरा का वाचन किया जाएगा। संगीतमय कथा के दौरान मनमोहक झांकिया सजाई जाएगी। कथा में लाधड़िया के ग्रामीणों सहित आस पास के गांवो से भी ग्रामीण भाग लेंगे।

प्रवासी बेटों ने निवासी पूर्वजों के प्रति प्रकट की श्रद्धा, जानें इतिहास।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सारस्वा परिवार लाधड़िया निवासी है तथा हाल निवासी चुरू व बीकानेर है। परिवारजनों ने बताया कि हमारे पूर्वज स्वर्गीय लेखुराम सारस्वा के पुत्र नथमल और हनुमानमल ने गांव में छोटा सा ठाकुरजी का मंदिर बनवाया तथा ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए एक बड़े कुंड का निर्माण करवाया। विष्णु सारस्वा ने जानकारी दी कि प्राचीन समय में गांव में सांपो की संख्या अधिक थी और सांपो के डसने से परिवार खत्म होने की कगार पर आ गया तो लेखुराम चुरू चले गए। विष्णु सारस्वा ने गौरव प्रकट करते हुए बताया कि आज 165 साल बीत जाने के बाद भी उनके पूर्वजों का अपने पैतृक गांव लगाव रहा और आज भी है। मंदिर की सार संभाल कर रहें रामेश्वरलाल ओझा ने बताया कि स्वर्गीय लालचंद सारस्वा उनकी पत्नी स्वर्गीय विमला देवी की स्मृति में उनके पुत्र विष्णु सारस्वा ने मंदिर का पुर्नर्निमाण करवाया है और नौ दिन के धार्मिक महोत्सव मनाया जा रहा है। ओझा ने बताया कि सारस्वा परिवार ने ही गांव में स्कूल के लिए भी भूमि दान की व 3 कमरों का नर्माण भी तत्कालीन समय में करवाया था। गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग धन्नाराम भगत बताते है कि आज के दौर में भी लाधड़ीया गांव पानी की कमी से जुझ रहा है परंतु तत्कालीन समय में लेखुराम ने पानी का कुंड व गांव के बच्चों को उदरासर स्कूल जाने से बड़ी राहत देकर गांव के हित में अविस्मरणीय योगदान दिया। आज भी जल संकट के समय ग्रामीण इस कुंड का पानी प्रयोग में लेते है। सारस्वा परिवार के मूलचंद ने बताया लेखुराम सारस्वा परिवार के संस्कार आज भी प्रेरणीय है। मूलचंद ने कहा कि गांव में हर ग्रामीण इस उत्सव में उल्लास पूर्वक भाग ले रहें है। आयोजन की पूर्व तैयारियां धूमधाम से ग्रामीण कर रहें है। अनेक व्यस्थाओं में श्रवण कुमार नाई, दातार सिंह, मंगलाराम नायक, मुनिराम गोदारा, मोटाराम गोदारा, बिहारी दास, पुजारी राजेन्द्र स्वामी, लेखराम सुथार सहित अनेक युवा भाग ले रहें है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ठाकुरजी ने किया लाधड़िया गांव का भ्रमण।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। धूमधाम से निकाली कलश यात्रा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्रामीणों ने लगाए जयकारै।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सारस्वा परिवार ने पूर्वजों की स्मृति में करवाया मंदिर का पुनर्निमाण, होगा नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन।